सिख श्रद्धालुओं से न मिलने देने के आरोपों को पाक ने खारिज किया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पाकिस्तान गए भारत के सिख तीर्थयात्रियों से भारतीय राजनयिकों को न मिलने देने के आरोपों को इस्लामाबाद ने आधारहीन करार देकर खारिज कर दिया। पाकिस्तान के डिप्टी हाईकमिश्रर ने कहा कि वे भारतीयों के स्वागत के लिए हमेशा तैयार हैं। साथ ही बातचीत को बनाए रखने के लिहाज से ही इस मुद्दे पर कदम उठाए जा रहे हैं।
We are always happy to host them, we deal with these issues in the light of our bilateral agreements and protocols: Syed Haider Shah,Deputy High Commissioner of Pakistan on Pakistan denies consular access to Sikh pilgrims from India pic.twitter.com/5sPPBsjvRh
— ANI (@ANI) April 17, 2018विज्ञापन
इससे पहले विदेश कार्यालय के प्रवक्ता मोहम्मद फैसल ने कहा, यह अफसोस की बात है कि इस मामले में तथ्यों को पूरी तरह से गलत तरीके से पेश किया गया।
उन्होंने आगे कहा, निर्वासित ट्रस्ट संपत्ति बोर्ड (ईटीपीबी) के सचिव ने 14 अप्रैल को गुरुद्वारा पंजा साहिब में बैसाखी के मुख्य समारोह में भाग लेने के लिए भारत के उच्चायुक्त को निमंत्रण दिया था और विदेश मंत्रालय ने उन्हें यात्रा की अनुमति दी थी। इस बीच भारत और दुनिया के अन्य हिस्सों से आए सिखों ने बाबा गुरु नानक देवजी पर बनी किसी फिल्म का विरोध करते हुए प्रदर्शन किया।
इसे देखते हुए पाकिस्तान प्रशासन ने भारत के उच्चायुक्त को फोन कर दौरा रद्द करने को कहा। उन्होंने कहा कि उनकी तरफ से कार्यक्रम को रद्द करने के पीछे किसी अप्रिय घटना से बचना था और यह दोनों देशों की सहमति से हुआ था।
बता दें कि भारत ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए इसे विएना समझौते का खुला उल्लंघन बताया है। विदेश मंत्रालय के बयान के मुताबिक, पाक की ये हरकत ‘अतार्किक कूटनीतिक बेअदबी’ है। पाक ने यह कदम ऐसे समय उठाया है जब राजनयिकों के उत्पीड़न मामले में दोनों पक्षों ने समाधान ढूंढने पर सहमति दी थी।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, 1800 सिख श्रद्धालुओं का एक जत्था तीर्थाटन सुगमता संधि के तहत 12 अप्रैल को पाकिस्तान गया था। इन श्रद्धालुओं का गुरुद्वारा पंजा साहिब में सम्मान होना था।
यह राजनयिकों के साथ दुर्व्यवहार की श्रेणी में आता है। पाक ने विएना संधि 1961, धार्मिक तीर्थ यात्रियों के लिए द्विपक्षीय प्रोटोकॉल 1974 और हाल ही में द्विपक्षीय संबंधों को लेकर दोनों देशों की सहमति से तैयार समझौते का उल्लंघन किया है।