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कश्मीरियों के साथ बर्ताव पर पाक चिंतित
बीबीसी मॉनिटरिंग
Updated Tue, 12 Feb 2013 01:52 PM IST
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भारतीय संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु को फांसी दिए जाने पर पाकिस्तान ने आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ अपनी सहानुभूति प्रकट की है और कश्मीरी लोगों के साथ भारत सरकार के बर्ताव पर गंभीर चिंता जताई है।
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पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोअज्जम खान ने अफजल गुरु को फांसी के बारे में कहा है कि वो अफजल के मुकदमे की प्रक्रिया के विस्तार में नहीं जाना चाहते।
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हालांकि उन्होंने कहा कि हम जम्मू कश्मीर के लोगों के प्रति अपनी सहानुभूति प्रकट करते हैं और अफजल गुरु की फांसी के बाद भारत सरकार ने जिस तरह जम्मू-कश्मीर के लोगों की आकांक्षाओं को गिरफ्तारियों, हुर्रियत नेताओं की हिरासत, कर्फ्यू, मोबाइल और इंटरनेट सेवा बंद करके और अन्य तरीक़ों से दबाने की कोशिश की है, उस पर हम गंभीर चिंता जताते हैं।
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पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने हुर्रियत नेताओं के खिलाफ की जा रही कार्रवाइयों को रोकने और उनकी तुरंत रिहाई की भी मांग की है।
पाकिस्तानी मीडिया
इस बीच पाकिस्तान की मीडिया ने अफजल गुरु को अचानक दी गई फांसी पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पाकिस्तान के कई दक्षिणपंथी अखबारों ने अफजल गुरु की फांसी के बारे में लिखा है कि भारत सरकार का ये कृत्य कश्मीरी लोगों पर अत्याचार का उदाहरण है।
नवा-ए-वक्त और द नेशन जैसे राष्ट्रवादी अखबारों ने तो यहां तक लिखा है कि पाकिस्तान सरकार को अफजल की फांसी का जवाब पाकिस्तान की जेल में बंद सरबजीत सिंह को फांसी देकर देना चाहिए।
नवा ए वक़्त ने लिखा है, "न्याय की मांग है कि भारतीय एजेंट सरबजीत सिंह को तुरंत फांसी दी जानी चाहिए। जिन परिवारों की जिंदगी सरबजीत की वजह से तबाह हुई है उन्हें न्याय दिलाने के लिए ये जरूरी क़दम होगा।"
उधर, उदारवादी माने जानेवाले अखबार समूह एक्सप्रेस ने भारत के कदम की निंदा करते हुए लिखा है कि इससे बदला लेने का एक अलग वातावरण तैयार होगा।
कराची से छपनेवाले उदारवादी अंग्रेजी अखबार ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ ने लिखा है, “इस घटना से कश्मीरियों में अलगाव की भावना बढ़ेगी क्योंकि अफजल को फांसी दिए जाने से पहले ही भारत सरकार ने घाटी में कर्फ्यू लगा दिया था।”
शांति की अपील
पाकिस्तान में सबसे ज्यादा बिकनेवाले उर्दू अखबार ‘जंग’ ने अलग रवैया अख्तियार करते हुए शांति बनाए रखने की अपील की है और किसी भी तरह की भावनात्मक प्रतिक्रिया से बचने की चेतावनी दी है। हालांकि इस अखबार की राय का डॉन, द न्यूज और पाकिस्तान टूडे जैसे अन्य उदारवादी अख़बारों ने समर्थन नहीं किया है।
“भावनात्मक प्रतिक्रिया देने की जगह हमें सब्र का परिचय देना चाहिए। हमें कश्मीरियों को नैतिक समर्थन देना जारी रखना चाहिए। राजनीतिक और कूटनीतिक मोर्चे पर भी हमें कश्मीर विवाद का हल संयुक्त राष्ट्र मसौदों के अनुरूप ढूंढने के लिए प्रयास करते रहना चाहिए।"
बीबीसी मॉनिटरिंग
(बीबीसी मॉनिटरिंग दुनिया भर के टीवी, रेडियो, वेब और प्रिंट माध्यमों में प्रकाशित होने वाली खबरों पर रिपोर्टिंग और विश्लेषण करता है।)