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जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने पढ़ी थी वाजपेयी की नज्म
बीबीसी हिंदी
Updated Fri, 17 Aug 2018 05:35 PM IST
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नवाज शरीफ के साथ अटल बिहारी वाजपेयी
नज्म भारतीय प्रधानमंत्री की थी लेकिन इसे पढ़ पाकिस्तानी प्रधानमंत्री रहे थे। "जंग न होने देंगे, हम जंग न होने देंगे…" पाकिस्तान के तीन दिवसीय दौर पर आए भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सम्मान में लाहौर के शाही किले में एक शानदार दावत का आयोजन था। नवाज शरीफ ने स्वागत भाषण में प्रधानमंत्री वाजपेयी के कविता संग्रह से अमन के बारे में ये नज्म पढ़ी तो मेहमान ने भी इसी जज्बे में जवाब दिया।
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उन्होंने अपने संक्षिप्त से भाषण में कश्मीर के मसले का जिक्र किया। भारतीय प्रधानमंत्री की ओर से अपने तौर पर कश्मीर का जिक्र करना और इस समस्या के समाधान के लिए प्रतिबद्धता का इजहार करना, उस समय बहुत से लोगों के लिए खुशगवार हैरत का कारण बना। कश्मीर में तनाव चरम पर था और सरहदें भी इस तनाव की लपेट में थीं।
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इसी तनाव की एक झलक लाहौर के शाही किले के बाहर भी दिखाई दे रही थी। अटल बिहारी वाजपेयी ने बस से पाकिस्तान आने का ऐलान किया तो पाकिस्तान में इस फैसले को बड़े पैमाने पर सराहना मिली। तमाम राजनीतिक दलों ने इसे दोनों देशों के बीच विवादों के समाधान का सही मौका करार दिया।
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लाहौर में स्वागत
दक्षिणपंथ की जमाअत इस्लामी एक ऐसी राजनीतिक पार्टी थी जिसने इस दौरे का विरोध किया और इस मौके पर लाहौर में विरोध-प्रदर्शन की धमकी दी। नवाज शरीफ ने राजनेताओं से परामर्श किया और इस धमकी के बावजूद अटल बिहारी वाजपेयी के लाहौर में स्वागत का फैसला किया।
इसी पृष्ठभूमि में जब लाहौर के शाही किले में जंग न होने की बात हो रही थी तो बाहर जमाअत इस्लामी के सदस्य लाहौर की सड़कों पर गाड़ियों पर पथराव कर रहे थे। पुलिस के साथ पूरे दिन जारी रहने वाली इन झड़पों के बावजूद भारतीय प्रतिनिधिमंडल का दौरा प्लान के मुताबिक चलता रहा।
इस स्वागत समारोह से पाकिस्तान की सशस्त्र सेनाओं के प्रमुखों की कमी को भी महसूस किया गया। अफवाहें थीं कि थल सेना प्रमुख जो तीनों सशस्त्र सेना के प्रमुख भी थे, जनरल परवेज मुशर्रफ भारतीय प्रधानमंत्री को सैल्यूट करने के हक में नहीं थे।
सिर्फ नवाज शरीफ ही नहीं, इस दौरे पर भारतीय प्रधानमंत्री को भी अपने देश में विरोध का सामना करना पड़ा था। उन्हें पाकिस्तान के बनने की निशानी समझे जाने वाले मीनार पर जाना था। इस दौरे से जरा पहले उन्होंने अपने एक भाषण में बताया कि जब उन्होंने मीनार-ए-पाकिस्तान पर हाजिरी की हामी भरी तो भारत में इसका विरोध किया गया।
"मुझे कहा गया कि अगर मैं मीनार-ए-पाकिस्तान पर जाऊंगा तो पाकिस्तान के बनने पर मुहिम लग जाएगी। अरे भाई, पाकिस्तान बन चुका, ये हकीकत है और इसे अब किसी मुहर की जरूरत नही।"
जंग न होने देंगे
अटल बिहारी वाजपेयी तीन दिन पाकिस्तान में रहे।
इस दौरान दोनों देशों के सरबराहों ने 'ऐलान-ए-लाहौर' पर हस्ताक्षर किए जिसमें परमाणु हथियारों के आकस्मिक या गैर-इरादी इस्तेमाल को रोकने के लिए वादा किया गया। इस समझौते का दोनों देशों की संसद ने प्रमाणीकरण भी कर दिया और विभिन्न स्तरों पर बातचीत के जरिए विवादों को हल करने की योजना भी बना ली।
लेकिन फिर कारगिल के पहाड़ों पर गोला-बारी शुरू हो गई। और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की जबानी भारतीय प्रधानमंत्री की इस नज्म की आवाज गोलियों की तड़तड़ाहट में दब सी गई। "जंग न होने देंगे, हम जंग न होने देंगे…"