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'देर रात फोन कॉल यानी संस्कृति भ्रष्ट'
बीबीसी
Updated Mon, 02 Sep 2013 06:48 PM IST
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मीडिया रिपोर्टों की मानें तो देर रात बातें करने के लिए फोन कंपनियों के पैकेज पर रोक लगाने संबंधी पाकिस्तान सरकार के फैसले की कड़ी आलोचना हो रही है।
मोबाइल कंपनियां अपना बिजनेस बढ़ाने के मक़सद से ग्राहकों को रात में सस्ती या मुफ्त कॉल का प्रलोभन देती हैं।
मीडिया रिपोर्टों की मानें तो देर रात बातें करने के लिए फोन कंपनियों के पैकेज पर रोक लगाने संबंधी पाकिस्तान सरकार के फैसले की कड़ी आलोचना हो रही है।
मोबाइल कंपनियां अपना बिजनेस बढ़ाने के मकसद से ग्राहकों को रात में सस्ती या मुफ्त कॉल का प्रलोभन देती हैं।
शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले कुद्सिया सज्जाद मानते हैं कि टीवी चैनलों के आने के बाद समाज काफी बदल चुका है और रात में बातें करना इसी बड़े बदलाव का एक पहलू है। सज्जाद मानते हैं कि इन पर रोकर लगाने से मसला सुलझेगा नहीं।
ऐसे ही एक अन्य कार्यकर्ता साजिद मिन्हास ने पाकिस्तान टुडे से कहा है कि ''इस तरह के कदम अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव डाल सकते हैं। मिन्हास कहते हैं कि दूरसंचार कंपनियां पाकिस्तान में दुनिया की सबसे सस्ती दरों पर कॉल मुहैया कराती हैं इसलिए ये रणनीति का हिस्सा है। ऐसे किसी भी क़दम से उनका पूरा बिजनेस मॉडल प्रभावित होगा।''
ट्विटर पर इसे लेकर ज्यादा प्रतिक्रिया तो नजर नहीं आई लेकिन ज्यादातर लोगों ने इसे उनकी निजता पर हमला माना है।
पत्रकार अरशद शरीफ ने टवीट् किया कि "शॉर्टकट अपनाने की बजाय व्यवस्था पर ध्यान देने की जरूरत है। परिवार, माता-पिता और शिक्षक एक इंसान के नैतिक मूल्य निर्धारित करते हैं ना कि रात में फोन पर बातें करना।
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शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले कुद्सिया सज्जाद मानते हैं कि टीवी चैनलों के आने के बाद समाज काफी बदल चुका है और रात में बातें करना इसी बड़े बदलाव का एक पहलू है। सज्जाद मानते हैं कि इन पर रोकर लगाने से मसला सुलझेगा नहीं।
ऐसे ही एक अन्य कार्यकर्ता साजिद मिन्हास ने पाकिस्तान टुडे से कहा है कि ''इस तरह के कदम अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव डाल सकते हैं।
मिन्हास कहते हैं कि दूरसंचार कंपनियां पाकिस्तान में दुनिया की सबसे सस्ती दरों पर कॉल मुहैया कराती हैं इसलिए ये रणनीति का हिस्सा है। ऐसे किसी भी क़दम से उनका पूरा बिजनेस मॉडल प्रभावित होगा।''
ट्विटर पर इसे लेकर ज़्यादा प्रतिक्रिया तो नजर नहीं आई लेकिन ज्यादातर लोगों ने इसे उनकी निजता पर हमला माना है।
पत्रकार अरशद शरीफ ने टवीट् किया कि "शॉर्टकट अपनाने की बजाय व्यवस्था पर ध्यान देने की जरूरत है। परिवार, माता-पिता और शिक्षक एक इंसान के नैतिक मूल्य निर्धारित करते हैं ना कि रात में फोन पर बातें करना।
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मोबाइल कंपनियां अपना बिजनेस बढ़ाने के मक़सद से ग्राहकों को रात में सस्ती या मुफ्त कॉल का प्रलोभन देती हैं।
मीडिया रिपोर्टों की मानें तो देर रात बातें करने के लिए फोन कंपनियों के पैकेज पर रोक लगाने संबंधी पाकिस्तान सरकार के फैसले की कड़ी आलोचना हो रही है।
मोबाइल कंपनियां अपना बिजनेस बढ़ाने के मकसद से ग्राहकों को रात में सस्ती या मुफ्त कॉल का प्रलोभन देती हैं।
शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले कुद्सिया सज्जाद मानते हैं कि टीवी चैनलों के आने के बाद समाज काफी बदल चुका है और रात में बातें करना इसी बड़े बदलाव का एक पहलू है। सज्जाद मानते हैं कि इन पर रोकर लगाने से मसला सुलझेगा नहीं।
ऐसे ही एक अन्य कार्यकर्ता साजिद मिन्हास ने पाकिस्तान टुडे से कहा है कि ''इस तरह के कदम अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव डाल सकते हैं। मिन्हास कहते हैं कि दूरसंचार कंपनियां पाकिस्तान में दुनिया की सबसे सस्ती दरों पर कॉल मुहैया कराती हैं इसलिए ये रणनीति का हिस्सा है। ऐसे किसी भी क़दम से उनका पूरा बिजनेस मॉडल प्रभावित होगा।''
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ट्विटर पर इसे लेकर ज्यादा प्रतिक्रिया तो नजर नहीं आई लेकिन ज्यादातर लोगों ने इसे उनकी निजता पर हमला माना है।
पत्रकार अरशद शरीफ ने टवीट् किया कि "शॉर्टकट अपनाने की बजाय व्यवस्था पर ध्यान देने की जरूरत है। परिवार, माता-पिता और शिक्षक एक इंसान के नैतिक मूल्य निर्धारित करते हैं ना कि रात में फोन पर बातें करना।
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शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले कुद्सिया सज्जाद मानते हैं कि टीवी चैनलों के आने के बाद समाज काफी बदल चुका है और रात में बातें करना इसी बड़े बदलाव का एक पहलू है। सज्जाद मानते हैं कि इन पर रोकर लगाने से मसला सुलझेगा नहीं।
ऐसे ही एक अन्य कार्यकर्ता साजिद मिन्हास ने पाकिस्तान टुडे से कहा है कि ''इस तरह के कदम अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव डाल सकते हैं।
मिन्हास कहते हैं कि दूरसंचार कंपनियां पाकिस्तान में दुनिया की सबसे सस्ती दरों पर कॉल मुहैया कराती हैं इसलिए ये रणनीति का हिस्सा है। ऐसे किसी भी क़दम से उनका पूरा बिजनेस मॉडल प्रभावित होगा।''
ट्विटर पर इसे लेकर ज़्यादा प्रतिक्रिया तो नजर नहीं आई लेकिन ज्यादातर लोगों ने इसे उनकी निजता पर हमला माना है।
पत्रकार अरशद शरीफ ने टवीट् किया कि "शॉर्टकट अपनाने की बजाय व्यवस्था पर ध्यान देने की जरूरत है। परिवार, माता-पिता और शिक्षक एक इंसान के नैतिक मूल्य निर्धारित करते हैं ना कि रात में फोन पर बातें करना।