पाकिस्तान: अल्पसंख्यक बिल पर हाफिज सईद को हिंदू सांसद की चुनौती
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पाकिस्तान के एक अल्पसंख्यक हिंदू सांसद ने कहा है कि अगर सिंध सरकार ने हाल में पारित किए गए अल्पसंख्यक बिल को निरस्त किया तो देश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ सकता है। गौरतलब है कि मुंबई हमलों का मास्टरमाइंड और आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का सरगना हाफिज सईद इस बिल को निरस्त करने के लिए लगातार पाक सरकार पर दबाव बना रहा है। ऐसे में पाकिस्तान हिंदू परिषद के मुख्य संरक्षक और सत्तारूढ़ पीएमएल-एन पार्टी से नेशनल असेंबली के सदस्य डॉ. रमेश कुमार वांकवानी का यह बयान हाफिज सईद को चुनौती से कम नहीं है।
यह बिल हिंदुओं समेत दूसरे अल्पसंख्यकों के लिए काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें मुस्लिम बहुल देश में जबरन धर्मांतरण को अपराध करार दिया गया है।
मुंबई हमले का मास्टरमाइंड हाफिज सईद समेत जमात-ए-इस्लामी व कई अन्य कट्टरपंथी पार्टियां एवं संगठन इस कानून का विरोध कर रहे हैं। इनका कहना है कि यह कानून पाकिस्तान को उदार और धर्मनिरपेक्ष देश बनाने के षड्यंत्र का एक हिस्सा है।
'1,000 हिंदू लड़कियों का पाक में हर साल जबरन धर्मांतरण'
वांकवानी ने उन मीडिया रिपोर्टों पर गंभीर चिंता जताई जिसमें कहा गया है कि सिंध प्रांत की सरकार सिंध क्रिमिनल लॉ (अल्पसंख्यकों की सुरक्षा से संबंधित बिल 2015) को रद्द या संशोधन करने पर विचार कर रही है। डॉन अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक वांगवानी ने आगाह किया है कि अगर कट्टरपंथी धार्मिक पार्टियों के दबाव में इस बिल को निरस्त किया गया तो गैर-मुस्लिमों में असुरक्षा की भावना और बढ़ेगी। उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान यह गलती करता है तो वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ सकता है।
दरअसल पाकिस्तान में नाबालिग हिंदू लड़कियों के जबरन धर्मांतरण और अपहरण की बड़ती घटनाओं के मद्देनजर यह कानून लाया गया है। कट्टरपंथी धार्मिक पार्टियों के विरोध को ‘अनुचित’ करार देते हुए हिंदू सांसद ने कहा कि इस सवाल का जवाब दिया जाए कि सिंध में केवल नाबालिग हिंदू लड़कियां ही अपना धर्म परिवर्तन क्यों कर रही हैं। 1,000 हिंदू लड़कियों का पाक में हर साल जबरन धर्मांतरण करा दिया जाता है