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कसाब: पाकिस्तान की गोल-गोल प्रतिक्रिया
Updated Wed, 21 Nov 2012 02:32 PM IST
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मुंबई में 26/11 को हुए हमले के दोषी पाकिस्तानी नागरिक आमिर अजमल कसाब को बुधवार की सुबह पुणे की यरवडा जेल में फाँसी दे दी गई है। इस ख़बर के आने के बाद से ही भारत की सारी मीडिया में सिर्फ़ और सिर्फ़ यही ख़बर हैं।
लेकिन पाकिस्तान में इस ख़बर पर ज्यादा चर्चा नहीं हो रही है और वहां की मीडिया भी लगभग ख़ामोश है। फ़ेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर भी कोई ख़ास गहमागहमी नहीं देखी जा रही है।
पाकिस्तान सरकार की तरफ़ से भी एक सधी प्रतिक्रिया में कहा गया है कि पाकिस्तान हर तरह की चरमपंथी कार्रवाईयों का विरोध करता है।
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोअज़्ज़म अली ख़ान ने कहा कि चरमपंथ के मुद्दे पर पाकिस्तान की नीति बिल्कुल साफ़ है और उसने हमेशा हर तरह की चरमपंथी कार्रवाईयों का विरोध किया है।
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एक बयान जारी कर पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने कहा, ''आतंकवाद के अभिशाप को इस पूरे क्षेत्र से समाप्त करने के लिए हम सभी देशों के साथ मिलकर काम करने के इच्छुक हैं।''
कसाब को फांसी दिए जाने के बारे में भारत से मिली जानकारी के बारे में पाकिस्तानी प्रवक्ता का कहना था कि मंगलवार को इस्लामाबाद स्थित भारतीय दूतावास के उपउच्चायुक्त ने पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के दफ़्तर जाकर कसाब की फांसी के संबंध में कुछ दस्तावेज़ दिए थे जिसे दक्षिण एशिया के महानिदेशक ने स्वीकार किया था।
लेकिन कसाब के शव के बारे में पाकिस्तान ने कुछ नहीं कहा है।
भारतीय विदेश मंत्री सलमान ख़ुर्शीद और गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे दोनों ने ही पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि भारत ने इसकी जानकारी पाकिस्तान को दे दी थी लेकिन उनकी तरफ़ से कसाब के शव की कोई मांग नहीं आई थी।
गृहमंत्री के मुताबिक़ सरकार ने कसाब के परिवार से भी संपर्क करने की कोशिश की थी। कसाब के परिवार से अभी तक बीबीसी का भी संपर्क नहीं हो पाया है।
'यही होना था'
पाकिस्तान में लाहौर स्थित बीबीसी संवाददाता एबादुल हक़ के अनुसार पाकिस्तानी मीडिया में इस बारे में जो थोड़ी बातें हो रहीं हैं वो सिर्फ़ ये कि अचानक कसाब को फांसी क्यों दी गई और उनकी फांसी को लेकर इतनी गोपनीयता क्यों बरती गई।
कुछ चैनलों में इस बात पर भी चर्चा हुई कि कसाब का मुक़दमा ठीक तरह ने नहीं लड़ा गया लिहाज़ा उनके साथ इंसाफ़ नहीं हुआ।
लेकिन पाकिस्तान के एक वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक हसन अस्करी रिज़वी इस दलील को नहीं मानते हैं। उनके मुताबिक़ भारत को अपने क़ानून के मुताबिक़ अदालती कार्रवाई करने का हक़ है और किसी दूसरे देश की न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता है।
राजधानी इस्लामाबाद स्थित एक और वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक एहतेशामुल हक़ के अनुसार आम पाकिस्तानी में इसको लेकर कोई ख़ास दिलचस्पी नहीं है।
उनके मुताबिक़ ज़्यादातर लोगों का यही मानना है कि कसाब ने जो किया था उसकी यही अंजाम होना था।
एहतेशामुल हक़ का कहना है कि आम पाकिस्तानी नागरिकों को लगता है कि मुंबई पर हमले के कारण पाकिस्तान और भारत के रिश्ते और ख़राब हो गए हैं और अब जबकि कसाब को फांसी दे दी गई है तब हो सकता है कि भारत और पाकिस्तान के संबंध थोड़े बेहतर हों।
एहतेशामुल हक़ के अनुसार मुंबई हमलों की साज़िश रचने वाले चरमपंथी संगठन लश्कर-ए-तैबा ने भी जब कसाब को अपना सदस्य मानने से इनकार कर दिया है तो फिर लश्कर की तरफ़ से उसकी फांसी पर भी कोई प्रतिक्रिया आने की संभावना नहीं है।
सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट फ़ेसबुक पर भी पाकिस्तानी नागरिकों में कुछ ख़ास उत्सुक्ता नहीं देखी जा रही है लेकिन पाकिस्तान के कुछ वरिष्ठ पत्रकारों ने ट्विटर पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
पाकिस्तान के जाने माने पत्रकार और जिओ टीवी चैनल के संपादक हामिद मीर ने ट्विट किया है, ''भारतीयों ने आज सुबह अजमल कसाब को फांसी दे दी। लेकिन अजमल और नेतन्याहू में क्या फ़र्क़ है? ''
कसाब को फांसी दिए जाने के बाद पाकिस्तानी जेल में फांसी की सज़ा काट रहे भारतीय नागरि सरबजीत के भविष्य के बारे में चर्चा शुरू हो गई है लेकिन इस तुलना को नकारते हुए पाकिस्तान की वरिष्ठ पत्रकार और फ़िल्मकार बीना सरवर ने ट्विट किया है, ''दोनों की तुलना करना बंद करें। सरबजीत ने 20 साल जेल में काटे हैं। उनकी पहचान को लेकर संदेह है और मुख्य गवाह ने भी कह दिया है कि उसने ग़लत गवाही दी थी।''
एक और पत्रकार युसरा अस्करी ने ट्विट किया है, ''मुझे ये नहीं समझ में आ रहा है कि इसमें आपको चार साल क्यों लग गए।''
"आतंकवाद के अभिशाप को इस पूरे क्षेत्र से समाप्त करने के लिए हम सभी देशों के साथ मिलकर काम करने के इच्छुक हैं। मंगलवार को इस्लामाबाद स्थित भारतीय दूतावास के उपउच्चायुक्त ने पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के दफ़्तर जाकर कसाब की फांसी के संबंध में कुछ दस्तावेज़ दिए थे जिसे दक्षिण एशिया के महानिदेशक ने स्वीकार किया था।"
मोअज़्ज़म अली ख़ान, पाकिस्तान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता
"आम पाकिस्तानी में इसको लेकर कोई ख़ास दिलचस्पी नहीं है। ज़्यादातर लोगों का यही मानना है कि कसाब ने जो किया था उसकी यही अंजाम होना था।"
एहतेशामुल हक़, राजनीतिक विश्लेषक
"भारत को अपने क़ानून के मुताबिक़ अदालती कार्रवाई करने का हक़ है और किसी दूसरे देश की न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता है।"
हसन अस्करी रिज़वी, राजनीतिक विश्लेषक
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लेकिन पाकिस्तान में इस ख़बर पर ज्यादा चर्चा नहीं हो रही है और वहां की मीडिया भी लगभग ख़ामोश है। फ़ेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर भी कोई ख़ास गहमागहमी नहीं देखी जा रही है।
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पाकिस्तान सरकार की तरफ़ से भी एक सधी प्रतिक्रिया में कहा गया है कि पाकिस्तान हर तरह की चरमपंथी कार्रवाईयों का विरोध करता है।
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोअज़्ज़म अली ख़ान ने कहा कि चरमपंथ के मुद्दे पर पाकिस्तान की नीति बिल्कुल साफ़ है और उसने हमेशा हर तरह की चरमपंथी कार्रवाईयों का विरोध किया है।
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एक बयान जारी कर पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने कहा, ''आतंकवाद के अभिशाप को इस पूरे क्षेत्र से समाप्त करने के लिए हम सभी देशों के साथ मिलकर काम करने के इच्छुक हैं।''
कसाब को फांसी दिए जाने के बारे में भारत से मिली जानकारी के बारे में पाकिस्तानी प्रवक्ता का कहना था कि मंगलवार को इस्लामाबाद स्थित भारतीय दूतावास के उपउच्चायुक्त ने पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के दफ़्तर जाकर कसाब की फांसी के संबंध में कुछ दस्तावेज़ दिए थे जिसे दक्षिण एशिया के महानिदेशक ने स्वीकार किया था।
लेकिन कसाब के शव के बारे में पाकिस्तान ने कुछ नहीं कहा है।
भारतीय विदेश मंत्री सलमान ख़ुर्शीद और गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे दोनों ने ही पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि भारत ने इसकी जानकारी पाकिस्तान को दे दी थी लेकिन उनकी तरफ़ से कसाब के शव की कोई मांग नहीं आई थी।
गृहमंत्री के मुताबिक़ सरकार ने कसाब के परिवार से भी संपर्क करने की कोशिश की थी। कसाब के परिवार से अभी तक बीबीसी का भी संपर्क नहीं हो पाया है।
'यही होना था'
पाकिस्तान में लाहौर स्थित बीबीसी संवाददाता एबादुल हक़ के अनुसार पाकिस्तानी मीडिया में इस बारे में जो थोड़ी बातें हो रहीं हैं वो सिर्फ़ ये कि अचानक कसाब को फांसी क्यों दी गई और उनकी फांसी को लेकर इतनी गोपनीयता क्यों बरती गई।
कुछ चैनलों में इस बात पर भी चर्चा हुई कि कसाब का मुक़दमा ठीक तरह ने नहीं लड़ा गया लिहाज़ा उनके साथ इंसाफ़ नहीं हुआ।
लेकिन पाकिस्तान के एक वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक हसन अस्करी रिज़वी इस दलील को नहीं मानते हैं। उनके मुताबिक़ भारत को अपने क़ानून के मुताबिक़ अदालती कार्रवाई करने का हक़ है और किसी दूसरे देश की न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता है।
राजधानी इस्लामाबाद स्थित एक और वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक एहतेशामुल हक़ के अनुसार आम पाकिस्तानी में इसको लेकर कोई ख़ास दिलचस्पी नहीं है।
उनके मुताबिक़ ज़्यादातर लोगों का यही मानना है कि कसाब ने जो किया था उसकी यही अंजाम होना था।
एहतेशामुल हक़ का कहना है कि आम पाकिस्तानी नागरिकों को लगता है कि मुंबई पर हमले के कारण पाकिस्तान और भारत के रिश्ते और ख़राब हो गए हैं और अब जबकि कसाब को फांसी दे दी गई है तब हो सकता है कि भारत और पाकिस्तान के संबंध थोड़े बेहतर हों।
एहतेशामुल हक़ के अनुसार मुंबई हमलों की साज़िश रचने वाले चरमपंथी संगठन लश्कर-ए-तैबा ने भी जब कसाब को अपना सदस्य मानने से इनकार कर दिया है तो फिर लश्कर की तरफ़ से उसकी फांसी पर भी कोई प्रतिक्रिया आने की संभावना नहीं है।
सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट फ़ेसबुक पर भी पाकिस्तानी नागरिकों में कुछ ख़ास उत्सुक्ता नहीं देखी जा रही है लेकिन पाकिस्तान के कुछ वरिष्ठ पत्रकारों ने ट्विटर पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
पाकिस्तान के जाने माने पत्रकार और जिओ टीवी चैनल के संपादक हामिद मीर ने ट्विट किया है, ''भारतीयों ने आज सुबह अजमल कसाब को फांसी दे दी। लेकिन अजमल और नेतन्याहू में क्या फ़र्क़ है? ''
कसाब को फांसी दिए जाने के बाद पाकिस्तानी जेल में फांसी की सज़ा काट रहे भारतीय नागरि सरबजीत के भविष्य के बारे में चर्चा शुरू हो गई है लेकिन इस तुलना को नकारते हुए पाकिस्तान की वरिष्ठ पत्रकार और फ़िल्मकार बीना सरवर ने ट्विट किया है, ''दोनों की तुलना करना बंद करें। सरबजीत ने 20 साल जेल में काटे हैं। उनकी पहचान को लेकर संदेह है और मुख्य गवाह ने भी कह दिया है कि उसने ग़लत गवाही दी थी।''
एक और पत्रकार युसरा अस्करी ने ट्विट किया है, ''मुझे ये नहीं समझ में आ रहा है कि इसमें आपको चार साल क्यों लग गए।''
"आतंकवाद के अभिशाप को इस पूरे क्षेत्र से समाप्त करने के लिए हम सभी देशों के साथ मिलकर काम करने के इच्छुक हैं। मंगलवार को इस्लामाबाद स्थित भारतीय दूतावास के उपउच्चायुक्त ने पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के दफ़्तर जाकर कसाब की फांसी के संबंध में कुछ दस्तावेज़ दिए थे जिसे दक्षिण एशिया के महानिदेशक ने स्वीकार किया था।"
मोअज़्ज़म अली ख़ान, पाकिस्तान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता
"आम पाकिस्तानी में इसको लेकर कोई ख़ास दिलचस्पी नहीं है। ज़्यादातर लोगों का यही मानना है कि कसाब ने जो किया था उसकी यही अंजाम होना था।"
एहतेशामुल हक़, राजनीतिक विश्लेषक
"भारत को अपने क़ानून के मुताबिक़ अदालती कार्रवाई करने का हक़ है और किसी दूसरे देश की न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता है।"
हसन अस्करी रिज़वी, राजनीतिक विश्लेषक