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सियासी संकट की ओर पाकिस्तान

Fri, 28 Sep 2012 12:44 AM IST
लाहौर/एजेंसी
लाहौर/एजेंसी Updated Fri, 28 Sep 2012 12:44 AM IST
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pakistan government not to exclude presidential immunity clause from swiss letter
पाकिस्तान एक बार फिर सियासी संकट की ओर बढ़ता दिख रहा है। सत्तारूढ़ पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट की आपत्ति के बावजूद राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के खिलाफ  भ्रष्टाचार के मामलों को फिर से खोलने के संबंध में स्विस सरकार को भेजे जाने वाले खत में राष्ट्रपति को छूट संबंधी उपबंध को नहीं हटाने का फैसला किया है।
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शीर्ष अदालत ने बुधवार को विधि मंत्री फारूक नायक को स्विस प्रशासन को भेजे जाने वाले पत्र को अंतिम रूप देने के लिए पांच अक्तूबर तक की समय सीमा दी थी। इसमें 2007 के पहले के उस पत्र को रद्द किए जाने की बात कही गई है जिसमें जरदारी के खिलाफ  भ्रष्टाचार के मामलों को बंद करने की अपील की गई थी। बताया जाता है कि शीर्ष अदालत चाहती है कि पत्र में राष्ट्रपति को पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 248 के तहत आपराधिक कार्यवाही से मिली छूट का जिक्र नहीं किया जाए।
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सूत्रों ने बताया कि सरकार की इस निर्देश का पालन करने की कोई इच्छा नहीं है। पूर्व प्रधानमंत्री यूसुफ  रजा गिलानी ने संकेत दिए हैं कि पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की सरकार स्विस प्रशासन को भेजे जाने वाले पत्र के नए मसौदे से राष्ट्रपति को छूट संबंधी उल्लेख को नहीं हटाएगी। जरदारी के खिलाफ  मामलों को फिर से खोलने से इनकार करने के लिए जून में शीर्ष अदालत द्वारा अदालत की अवमानना और अयोग्य ठहराए गए गिलानी ने कहा कि यदि पत्र (संशोधित मसौदे) में राष्ट्रपति को मिली छूट को दरकिनार किया जाता है तो मैं इसका विरोध करूंगा।
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राष्ट्रपति को संविधान के तहत छूट मिली है। मैंने संविधान का अनुपालन किया और पत्र लिखने से इनकार कर दिया। रिश्वत के मामलों में माफी संबंधी अध्यादेश को खारिज करने के बाद सुप्रीम कोर्ट दिसंबर 2009 से ही राष्ट्रपति के खिलाफ मामलों को फिर से खोले जाने के लिए दबाव बना रहा है। इस अध्यादेश के तहत जरदारी तथा आठ हजार अन्य लोगों को फायदा पहुंचा था। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि संशोधित मसौदा पत्र पांच अक्तूबर तक नहीं सौंपा जाता है तो प्रधानमंत्री राजा परवेज अशरफ  के खिलाफ  अदालत की अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाएगी।
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