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पाकिस्तान से लाई बधिर बच्ची के साथ वर्षों हुआ बलात्कार

Sat, 19 Oct 2013 11:06 AM IST
Updated Sat, 19 Oct 2013 11:06 AM IST
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pakistan_deaf_girl_rape

बच्ची की उम्र 10 दस साल थी, उसे सुनाई नहीं देता था। एक पाकिस्तानी दंपति उसे गैर कानूनी तरीके से अपने साथ ब्रिटेन लेकर आया। लेकिन यहां आकर बच्ची के साथ एक दशक तक बलात्कार होता रहा और उसे घरेलू नौकरानी की तरह रखा गया।

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ब्रिटेन मे चले मामले में इलयास और तलत अशार को दोषी पाया गया है। ये बच्ची दंपती के घर के तहखाने में रहती थी।

अब ये बच्ची वयस्क हो चुकी है और उनकी उम्र 20 साल से ज्यादा है। 84 साल के इलयास को बलात्कार और 68 साल की तलत को तस्करी का दोषी पाया गया है और सजा 23 अक्तूबर को होगी।
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अभी तक इस मामले की रिपोर्टिंग पर पाबंदी लगी हुई थी। कानूनी वजहों से लडकी का नाम सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।

मामले के बारे में तब पता चला जब कुछ अधिकारी दंपती के घर गैर कानूनी गतिविधियों के कथित शिकायतों की जांच करने गए। ये लडकी तहखाने से पाई गई जो एक तंग, ठंडी जगह थी।
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पुलिस का कहना है कि ये लडकी घर की साफ सफाई करती थी, खाना बनाती थी। उसे परिवार से जुडे दूसरे घरों में भी काम करने के लिए ले जाया जाता था।

ये लडकी बोल नहीं सकती थी और उन्हें पहले साइन लैंगवेज सिखाई गई जिसके बाद ही पुलिस से बातचीत में उनकी आपबीती पता चली।

‘शैतान का रूप’
 पुलिस का कहना है कि इस लडकी को ब्रिटेन लाने वाले परिवार ने उनके नाम पर कई वर्षों तक सरकारी वित्तीय लाभ भी लिया और बैंक अकाउंट बनाए।

इलयास और तलत की बेटी फाएजा अशर को भी गलत तरीके से वित्तीय लाभ उठाने का दोषी पाया गया है। पुलिस ने इलयास को ‘शैतान का रूप’ कहा है।

ग्रेटर मैनचेस्टर पुलिस की मे डोयल ने पीडिता की तारीफ कहते हुए कहा, “वो बहुत बहादुर है, उसने आगे आकर गवाही दी है। अब वो अच्छी जिंदगी बिता रही है। वो काफी होनहार है।”

वकील इयन रशटन ने बताया है, “जब उन्हें ब्रिटेन लाया गया था वो बच्ची थीं। वो न बोल सकती थीं न सुन सकती थीं। वो इशारों में भी बात करना नहीं जानती थीं। उनका कोई परिवार नहीं था, कोई दोस्त नहीं था। वो कभी स्कूल नहीं गई और ब्रिटेन की संस्कृति के बारे में नहीं जानती थी। उनका बार बार बलात्कार हुआ, बुरा बर्ताव होता था।”

जिस पासपोर्ट पर बच्ची को ब्रिटेन लाया गया था उस पर लिखा था वो 20 साल की हैं और ये चिंता का विषय बताया गया है कि हीथ्रो पर अप्रवासन अधिकारियों को उम्र में फर्क का पता नहीं चला।


स्टॉप द ट्रेफिक नाम की संस्था से जुडे हाना फ्लिंट कहते हैं कि ये जरूरी है कि पुलिस, शिक्षकों, वकीलों आदी को ट्रेनिंग मिलनी चाहिए कि वो मानव तस्करी के मामलों को पहचान सकें।

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