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पाकिस्तान: परदे के पीछे सरकार और सेना का 'महाभारत'

Mon, 27 Nov 2017 05:10 PM IST
बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Updated Mon, 27 Nov 2017 05:10 PM IST
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Pakistan: Behind the scenes, the government and the army's 'Mahabharat'
नवाज शरीफ
पाकिस्तान में शनिवार को हिंसा भड़कने से पहले इस्लामाबाद में पिछले तीन हफ्तों से अंदरखाने सब कुछ ठीक नहीं चल रहा था। कई लोग इसके लिए सरकार को कसूरवार ठहरा रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों को बड़ी तादाद में इकट्ठा होने की इजाजत दी जिससे देश भर में उनके आंदोलन के लिए माहौल बन गया। जब प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कदम उठाया गया तो ऐसा लगा कि उन पर काबू पाने के लिए सरकार के पास कोई ठोस योजना नहीं है।
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पुलिस प्रदर्शन के अगुवा लोगों को गिरफ्तार कर पाने में नाकाम रही। और जब इस विरोध प्रदर्शन की हवा दूसरे शहरों में फैलने लगी तो उन्होंने उस विवादास्पद नीति का सहारा लिया जिसके तहत न्यूज चैनलों पर लाइव प्रसारण की रोक और सोशल मीडिया पर पाबंदी लगा दी जाती है।
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नवाज का जनाधार

लेकिन पाकिस्तान जैसे देश में ये हालात कोई बहुत अप्रत्याशित नहीं कहे जा सकते जहां हर दो-चार साल पर चुनी हुई सरकारों के क़दमों के नीचे से जमीन खिसक जाती है। भ्रष्टाचार के मुकदमों का इस्तेमाल अदालतों के ज़रिए सरकार गिराने के लिए किया जाता है। ऐसे मामले भी देखे गए हैं जब मजहब के नाम पर इकट्ठा हुए लोग शहरी इलाक़ों में उत्पात मचाकर चुनी हुई सरकारों की हैसियत को चुनौती देते हैं। कुछ लोग तो ये अंदेशा भी जताते हैं कि इन सब के पीछे कहीं फौज का हाथ तो नहीं! लेकिन पाकिस्तान की आर्मी इन आरोपों से इनकार करती है।
जुलाई में भ्रष्टाचार के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद नवाज शरीफ को प्रधानमंत्री का पद छोड़ना पड़ा था। इसके बाद ये माना जा रहा था कि नवाज शरीफ की पार्टी का जनाधार सिकुड़ेगा लेकिन ऐसा होते हुए दिख नहीं रहा है।

दक्षिणपंथी संगठन

Pakistan: Behind the scenes, the government and the army's 'Mahabharat'
नवाज शरीफ
और अब तो ये भी कहा जा रहा है कि नवाज शरीफ की पार्टी अगले बरस होने वाले आम चुनावों में फिर से जीत का परचम फहरा सकती है। पंजाब सूबे के दक्षिणपंथी मजहबी मतदाताओं पर नवाज शरीफ की पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) की अच्छी पकड़ रही है। लेकिन शनिवार की हिंसा के बाद कई लोग ये मानते हैं कि धुर दक्षिणपंथी संगठन 'तहरीक लब्बैक या रसूल-उल-उल्लाह' (टीएलवाईआरए) के विरोध प्रदर्शन का मकसद पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) के कुछ समर्थकों को अपनी ओर खींचना है। शनिवार को इस मामले में सेना भी उस वक्त जुड़ गई जब उसके प्रवक्ता ने ट्विटर पर कहा, "आर्मी चीफ ने प्रधानमंत्री शाहिद खकान से अब्बासी से बात की है और कहा है कि 'दोनों पक्षों को हिंसा से दूर रहकर' प्रदर्शनकारियों का मुद्दा सुलझाना चाहिए..."

आर्मी का ट्वीट
 
सेना के इस बयान पर कई सवाल उठे हैं। अंग्रेजी अखबार 'डॉन' ने अपने संपादकीय में लिखा है, "सरकार और प्रदर्शनकारियों की गलत तरीके से एक दूसरे से तुलना की जा रही है।" कुछ लोगों ने सेना के इस ट्वीट की टाइमिंग पर चिंता जाहिर की है। उन्हें डर है कि इससे प्रदर्शनकारियों को बढ़ावा मिलेगा। इस ट्वीट के कुछ ही घंटों के भीतर सरकार ने नागरिक प्रशासन की मदद के लिए सेना बुलाने का फैसला कर लिया। लेकिन सुरक्षा विशेषज्ञों की राय में सेना केवल सरकारी इमारतों और दूसरी संपत्तियों पर किसी संभावित हमले की सूरत में उनकी हिफाजत कर सकती है।

इस बात की संभावना कम ही है कि सेना प्रदर्शनकारियों से सीधे उलझे। पाकिस्तान में ऐसी समझ बनती हुई दिख रही है कि सरकार को पहले से इन हालात का अंदेशा था, इसलिए वो शुरुआत में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई सख्त कदम उठाने से हिचक रही थी लेकिन न्यायपालिका के दबाव में उन्हें कार्रवाई करनी पड़ी। दो हफ्ते पहले ही इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने हाइवे पर धरना देने पर पाबंदी लगा दी थी।

तेजी से बिगड़े हालात

Pakistan: Behind the scenes, the government and the army's 'Mahabharat'
पाकिस्तान
पिछले हफ्ते कोर्ट ने धरने पर बैठे प्रदर्शनकारियों को हटाने में प्रशासन की नाकामी को लेकर हाई कोर्ट ने आला अधिकारियों को अवमानना का नोटिस भी जारी किया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई शुरू करते हुए सरकार से कहीं आने-जाने के आम लोगों के हक को बहाल करने के लिए कहा था। शुरू में इस विरोध प्रदर्शन को मीडिया में ज्यादा कवरेज नहीं मिल रहा था। एक तो प्रदर्शनकारियों की तादाद कोई बहुत ज्यादा नहीं थी और दूसरा ये कि विरोध के नाम पर सड़क ब्लॉक करने का तरीका पाकिस्तान में अब रोजमर्रा की बात हो गई है। लेकिन शनिवार को हालात जिस तेजी से बिगड़े, उससे चीजें बदल गईं।


सरकार और सेना पर दबाव

सरकार और सेना दोनों पर ही दबाव बढ़ने लगा और ये तय करना मुश्किल हो गया कि हालात किस करवट लेंगे। ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पाबंदी लगा दी गई, टेलीविजन चैनलों का प्रसारण बंद कर दिया गया और किसी तरह का सीधा प्रसारण करने पर रोक लगा दी गई। इस बीच पाकिस्तान के पंजाब सूबे में स्कूलों को सोमवार और मंगलवार के लिए बंद रखने का आदेश दिया गया है। यहां मुल्क की 50 फीसदी आबादी बसती है। पंजाब सूबा नवाज शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) का गढ़ माना जाता है। अगले साल के चुनावों में नवाज शरीफ का भविष्य पंजाब ही तय करने वाला है।
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