पाक को चिंता, भारत के पक्ष में अमेरिकी नीति बदल सकते हैं ट्रंप
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क्षेत्र में इस्लामाबाद और वाशिंगटन की मित्रता ऐतिहासिक रही है, लेकिन अमेरिका द्वारा पाकिस्तान पर आतंकियों को पनाह देने का आरोप लगाए जाने के बाद दोनों के संबंधों में कड़वाहट आ चुकी है। वैसे पाकिस्तान आतंकियों को शरण देने की बात से इनकार करता रहा है। पाकिस्तान और अमेरिका के संबंध मई में उस समय और खराब हो गए जब पाक सीमा में अमेरिकी ड्रोन हमले में तालिबान नेता मारा गया।
इसके बाद सितंबर में कश्मीर घाटी में आर्मी बेस पर पाकिस्तानी आतंकियों के हमले में 19 जवानों के शहीद होने के बाद भारत के साथ भी उसके संबंधों में तनाव आ गया। उधर, अधिकांश पाकिस्तानी ट्रंप को मुस्लिम विरोधी मानते हैं। एक बार ट्रंप ने मुस्लिमों के अमेरिका में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का सुझाव दिया था। ऐसे में पाकिस्तान को लग रहा है कि ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिका भारत के साथ अपने व्यापारिक रिश्तों को और मजबूत करेगा।
अमेरिका पाकिस्तान को पूरी तरह से तो नहीं छोड़ेगा
लाहौर निवासी विदेश नीति के विश्लेषक हसन असकारी रिजवी ने कहा है कि अमेरिका पाकिस्तान को पूरी तरह से तो नहीं छोड़ेगा, लेकिन यह तय है कि ट्रंप पाक के लिए हिलेरी क्लिंटन की तुलना में कठोर साबित होंगे। रिजवी ने कहा कि उनका मानना है कि ट्रंप के साथ पाकिस्तान की तुलना में भारत का तालमेल बेहतर रहेगा।
वैसे ट्रंप ने दक्षिण एशिया के लिए अभी अपनी नीति तैयार नहीं की है। हाल ही में उन्होंने कश्मीर मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता की बात कही थी। पाकिस्तान में तैनात एक अमेरिकी राजनयिक ने भी बुधवार को कहा था कि ट्रंप के राष्ट्रपति चुने जाने का मतलब यह नहीं है कि अमेरिका की नीति में व्यापक बदलाव होगा। कराची में तैनात अमेरिकी महा वाणिज्यदूत ग्रेस शेलटन ने जियो न्यूज से बातचीत में कहा कि अमेरिकी नीति राष्ट्रहित पर आधारित है। ऐसे में सरकार बदलने से नीति नहीं बदलती।