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मलाला के बहाने बच्चों को स्कूल पहुंचाने की कोशिश

Sun, 11 Nov 2012 11:47 AM IST
Updated Sun, 11 Nov 2012 11:47 AM IST
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pak is trying to take children to school
पाकिस्तान ने घोषणा की है कि देश के 30 लाख गरीब परिवारों के बच्चे यदि स्कूल जाते हैं तो नगद राशि देकर उनकी मदद की जाएगी।
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पाकिस्तान ये घोषणा तब की है जब संयुक्त राष्ट्र ने पाकिस्तान में तालिबान की गोली का निशाना बनीं 15 वर्षीय किशोरी मलाला यूसुफजई के नाम पर 'मलाला दिवस' मनाया है।


विश्व बैंक और ब्रिटेन से आर्थिक सहायता प्राप्त इस योजना के तहत कहा गया है कि पाकिस्तान के ऐसे गरीब परिवारों को स्कूल जाने वाले प्रति बच्चे के हिसाब से हर महीने दो डॉलर दिए जाएंगे।
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मलाला यूसुफजई फिलहाल ब्रिटेन के एक अस्पताल में स्वास्थ्य लाभ ले रही हैं। उन्हें इस वर्ष दो अक्तूबर को गोली मारी गई थी और चंद रोज बाद इलाज के लिए ब्रिटेन लाया गया था।
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साल 2009 में मलाला ने बीबीसी उर्दू के नाम एक गुमनाम डायरी लिखी थी जिसमें उन्होंने अपने इलाके की तमाम लड़कियों के स्कूल जाने पर लगी तालिबान की पाबंदी और दूसरे हालात का वर्णन किया था।


मलाला दिवस

संयुक्त राष्ट्र ने 10 नवंबर को मलाला दिवस के तौर पर मनाया है।

इसका कदम का मकसद दुनियाभर में 3।2 करोड़ ऐसी लड़कियों को स्कूल जाने में मदद मुहैया कराना है जो किसी वजह से स्कूल नहीं जा पाती हैं।

पाकिस्तान ने इस अवसर पर जिस कार्यक्रम की घोषणा की है, उसे वसीला-ए-तालीम नाम दिया गया है।

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और वैश्विक शिक्षा के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत गॉर्डन ब्राउन ने राजधानी इस्लामाबाद में इसकी घोषणा की।

इस मौके पर गॉर्डन ब्राउन ने कहा, ''मलाला का ख्वाब पाकिस्तान की बेहतरी का प्रतिनिधित्व करता है।''

मलाला ने पाकिस्तान में लड़कियों की शिक्षा के लिए पुरजोर आवाज़ उठाई थी जो तालिबान को रास नहीं आई और इसी वजह से तालिबान ने उनके सिर में गोली मारी थी।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, अगले चार वर्षों में देश के लाखों गरीब बच्चों का स्कूल में दाखिला कराना इस कार्यक्रम का मकसद है और प्राथमिक स्कूल जाने वाले ऐसे हर बच्चे के परिवार को हर महीने दो डॉलर नगद राशि दी जाएगी।

ये राशि सरकार के 'बेनजीर इनकम सपोर्ट प्रोग्राम' के तहत बांटी जाएगी जिसे जरूरतमंद परिवारों की छोटी-मोटी आर्थिक मदद के इरादे से बनाया गया था।

इसबीच दुनियाभर में लाखों लोगों ने उस 'ऑनलाइन-पेटीशन' पर दस्तखत किए हैं जिसमें मलाला यूसुफजई को शांति के लिए नोबेल पुरस्कार देने की मांग की गई है।

"मलाला का ख्वाब पाकिस्तान की बेहतरी का प्रतिनिधित्व करता है"
गॉर्डन ब्राउन
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