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उन्हें तकलीफ है 'मैं मुल्ला क्यों नहीं'
Updated Thu, 18 Apr 2013 07:56 PM IST
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पाकिस्तान में चुनाव प्रचार के दौरान चरमपंथियों के हमलों का सबसे ज्यादा निशाना बनी है अवामी नेशनल पार्टी।
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बीबीसी उर्दू सेवा से बात करते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम अहमद बलोर ने कहा है कि पाकिस्तान में कुछ ताकते ऐसी हैं जो सत्ता में आना चाहती हैं। और वे तालिबान के साथ मिलकर उन्हें रास्ते से हटाना चाहते हैं।
बीबीसी संवाददाता अजीजुल्लाह ख़ान के मुताबिक़ उन्होंने कहा कि अवामी नेशनल पार्टी पाकिस्तान की अखंडता और स्थिरता की बात करती है।
उन्होंने कहा, “हम 1973 के संविधान की बात करते हैं और हम मुसलमान हैं और मुसलमान की बात करते हैं। लेकिन हम मुल्ला नहीं हैं और उन्हें तकलीफ यह है कि वो मुल्ला क्यों नहीं हैं।”
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पाकिस्तान में कार्यवाहक प्रधानमंत्री के सत्ता संभालने के बाद से ही और चुनाव की घोषणा के बाद से एएनपी के नेताओं और सभाओं में सात हमले हो चुके हैं जिनमें कई लोग मारे गए और घायल हुए हैं।
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चेतावनी
प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान ने कुछ समय पहले लोगों को चेतावनी दी थी कि वह एएनपी, पीपीपी और संयुक्त राष्ट्रीय मूवमेंट की सभाओं से दूर रहें।
एएनपी को इन हमलों के कारण अपने चुनाव अभियान सीमित करने पड़े हैं। पार्टी ने चुनावी सभाओं की संख्या में कमी कर दी है और मतदाता तक पहुंचने के लिए दूसरी रणनीतियाँ बनाई जा रही हैं।
मंगलवार रात गुलाम अहमद बलोर पर भी पेशावर में आत्मघाती हमला किया गया था जिसमें सत्रह लोग मारे गए और वह खुद घायल हो गए थे।
बुधवार को चारसदा में एएनपी के एक स्थानीय नेता पर रिमोट कंट्रोल बम से हमला किया गया जिसमें दो लोगों के घायल होने की ख़बर है।
गुलाम अहमद बलोर ने कहा कि वह और उनकी पार्टी ऐसे हमलों से डर नहीं रही है। वे क्षेत्र में रहेंगे और लड़ेंगे।
निर्देश
कार्यवाहक संघीय गृहमंत्री हबीब खान ने बुधवार को ख़ैबर पख्तून के आईजी पुलिस को निर्देश दिया है कि वह एएनपी नेताओं की सुरक्षा बहाल करे।
उधर पेशावर में सुरक्षा की स्थिति पर निगरानी के लिए सरकार की ओर से बुलाए जाने वाले सर्वदलीय सम्मेलन में बातचीत की जाएगी।
सरकार सभी उम्मीदवारों को पांच सशस्त्र अंगरक्षक प्रदान करेगी और राजनीतिक दल चारदीवारी के अंदर सभाएं आयोजित करेंगे।
राजनीतिक विश्लेषक शकील यूसुफज़ई के अनुसार अफ़ग़ानिस्तान में 2014 में अमरीकी सेनाओं की वापसी के बाद से कुछ शक्तियां चाहती हैं कि पेशावर में ऐसी सरकार हो जिससे कि अफगानिस्तान के तालिबान के साथ अच्छे संबंध रख सके।
उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान से अमरीकी सेना की वापसी हो रही है। पाकिस्तान में कुछ संगठन ऐसे हैं जो चाहते हैं कि अमरीकी सेनाओं की वापसी के बाद अगर उनकी कोई भूमिका बने तो पेशावर में एएनपी या पीपुल्स पार्टी जैसी राजनीतिक दल सत्ता में न रहें।
पर्यवेक्षकों का कहना है कि कार्यवाहक सरकार और चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि वह सभी दलों और प्रत्याशियों को सुरक्षा का वातावरण प्रदान करे ताकि पारदर्शी चुनाव कराए जा सकें।