कुलभूषण मामले पर अड़ी पाक सेना, नहीं मिलेगी कोई कानूनी मदद
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भारत की ओर से कुलभूषण जाधव को मौत की सजा को मजबूत मामला बनाए जाने के बाद सोमवार को पाकिस्तानी सेना ने जाधव को कानूनी मदद देने से इनकार कर दिया। जाधव (46) को पिछले हफ्ते फील्ड जनरल कोर्ट मार्शल ने मृत्युदंड की सजा सुनाई थी, इस पर भारत ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी और पाकिस्तान को इसके अंजाम भुगतने की बात कही थी। अगर जाधव को सजा दी गई तो यह एक पूर्व नियोजित हत्या होगी जोकि द्विपक्षीय समझौतों के खिलाफ होगा।
पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर ने कहा कि कानूनन हम कुलभूषण को कानूनी मदद मुहैया नहीं करा सकते क्योंकि व जासूसी में शामिल रहे हैं। हालांकि भारत की ओर से कहा गया है कि पिछले एक साल में दर्जन भर से अधिक बार कानूनी मदद की मांग की गई, जिसे पाक ने ठुकरा दिया है।
शुक्रवार को इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायुक्त गौतम बंबावाले ने पाकिस्तान की विदेश सचिव तहमीना जंजुआ से मुलाकात की थी और जाधव केस में चार्जशीट व सेना के ऑर्डर की प्रति मांगी थी। इसके अलावा जाधव को कानूनी सहायता मुहैया कराने की बात कही थी।
जाधव देशविरोधी गतिविधियों में शामिल थे: गफूर
सोमवार को रावलपिंडी में मीडिया को संबोधित करते हुए मेजर जनरल गफूर ने कहा कि जाधव देशविरोधी गतिविधियों में शामिल थे, इसलिए उन्होंने कोर्ट मार्शल का सामना किया। यह सेना की ड्यूटी थी कि उसे सजा दे। उनहोंने कहा कि हमने किसी तरह का समझौता न करके जाधव को सजा दी है। हम भविष्य में भी इस मुद्दे पर समझौता नहीं करेंगे।
उन्होंने कहा कि जाधव की सुनवाई में पूरी तरह से कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया है और उसके बाद ही सजा सुनाई गई है। कोर्ट मार्शल इस तरह के सबूत पर आधारित है जिसे किसी भी मंच पर खारिज नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि भारतीय इस फैसले के खिलाफ आर्मी अपीलीय अदालत में अपील कर सकता है। प्रवक्ता ने बताया कि दोषी सुप्रीम कोर्ट में और फिर पाकिस्तान के राष्ट्रपति के पास भी अपील कर सकता है। उन्होंने कहा कि हम हर मंच पर सजा के पक्ष में खड़े रहेंगे।
पाकिस्तान का दावा है कि उसके सुरक्षा बलों ने जाधव को पिछले साल 3 मार्च को ईरान से प्रवेश के बाद बलूचिस्तान क्षेत्र से गिरफ्तार किया था। पाकिस्तानी सेना ने जाधव की गिरफ्तारी के बाद उसके कबूलनामे का एक वीडियो भी जारी किया था। हालांकि भारत ने इससे साफ इनकार किया था और कहा कि पाकिस्तान के अधिकारियों ने उसका अपहरण कर लिया था।