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जिन्ना जयंती के बहाने पाकिस्तानी पीएम बोले, भारत में अल्पसंख्यकों को बराबरी का हक नहीं

Wed, 26 Dec 2018 02:56 AM IST
अनिल पांडेय वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला
वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला Published by: अनिल पांडेय Updated Wed, 26 Dec 2018 02:56 AM IST
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New Pakistan will make the minorities of other religions equal: Imaran Khan
इमरान खान

अल्पसंख्यकों के बदहाल हालात को लेकर पाकिस्तान की बदनामी जगजाहिर है। इसके बावजूद बॉलीवुड अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के बयान के बहाने भारत में अल्पसंख्यक हितों पर टिप्पणी करने वाले पाकिस्तान प्रधानमंत्री इमरान ने अब नया शिगूफा छेड़ा है।

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क्रिकेटर से प्रधानमंत्री बने इमरान ने कायदे आजम मोहम्मद अली जिन्ना की जयंती पर मंगलवार को अपने देश के अल्पसंख्यकों को भारत के विपरीत नए पाकिस्तान में समान नागरिक अधिकार देने की घोषणा की है।
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इमरान खान ने मंगलवार को ट्वीट करते हुए कहा, नया पाकिस्तान कायदे आजम का पाकिस्तान होगा और सुनिश्चित करेगा कि हमारे अल्पसंख्यकों से  समान नागरिक की तरह व्यवहार किया जाए, जैसा कि भारत में नहीं होता है। इमरान ने साथ ही जोड़ा कि जिन्ना ने पाकिस्तान की परिकल्पना एक लोकतांत्रिक, दयालु और न्यायपूर्ण देश के रूप में की थी। सबसे महत्वपूर्ण है कि वह हमारे अल्पसंख्यकों को समान नागरिक के तौर पर देखना चाहते थे।
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याद रखना चाहिए कि उनके (जिन्ना) राजनीतिक करियर का शुरुआती दौर हिंदू-मुस्लिम एकता के राजदूत सरीखा था। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने ट्वीट में कहा, जिन्ना ने मुस्लिमों के लिए अलग देश का संघर्ष तब शुरू किया था, जब उन्हें यह अहसास हुआ था कि अधिकतर हिंदू मुस्लिमों से समान नागरिक की तरह व्यवहार नहीं करेंगे।

नसीरुद्दीन शाह के बयान पर टिप्पणी के बाद यह एक सप्ताह में दूसरा मौका है, जब पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने भारत में अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित दिखाने की कोशिश की है। शनिवार को नसीर के बयान पर टिप्पणी में इमरान ने जोर देते हुए कहा था कि पाकिस्तान सभी अल्पसंख्यकों के लिए समान अधिकार सुनिश्चित करेगा और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को दिखाएगा कि भारत में अल्पसंख्यकों के दर्जे के विपरीत हम पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों से कैसा व्यवहार करते हैं।

बंटवारे के बाद पाक में 20% अल्पसंख्यक थे, अब 2% बचे 

इमरान खान के बयान पर पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद कैफ ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कैफ ने ट्वीट में कहा कि बंटवारे के समय पाकिस्तान में 20 % अल्पसंख्यक थे। अब वहां केवल 2% अल्पसंख्यक ही बचे हैं। वहीं भारत में आजादी के बाद अल्पसंख्यकों की संख्या बढ़ी है। अल्पसंख्यकों से कैसा व्यवहार किया जाए, इस पर लेक्चर देने वाला पाकिस्तान आखिरी देश होना चाहिए। कैफ ने प्रतिक्रिया में इमरान का ट्वीट भी शेयर किया।

70 साल में पाक में 17 फीसदी अल्पसंख्यक घट गए

'स्टेट ऑफ ह्यूमन राइट्स इन 2017' रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान की आजादी के वक्त यहां अल्पसंख्यकों की आबादी 20 % थी। साल 1998 की जनगणना के मुताबिक यह घटकर 3 फीसदी हो गई है। पाकिस्तान में आतंकी हमलों में मौतें भले कम हुई हों, लेकिन अल्पसंख्यक भीड़ की हिंसा का सबसे ज्यादा शिकार हो रहे हैं। अल्पसंख्यकों के हित की बात करने वाले पत्रकारों पर हमले हो रहे हैं। उनका अपहरण हो रहा है।

खुद नसीर दिखा चुके हैं इमरान को आइना

इससे पहले अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने रविवार को कहा था कि इमरान उन मुद्दों पर टिप्पणी नहीं करें, जिनसे उनका संबंध नहीं है। वह अपने देश के बारे में सोचें। भारत में 70 साल से लोकतंत्र है। हम जानते हैं कि हमें अपनी देखभाल कैसे करनी है। एआईएमआईएम के अध्यक्ष और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने ट्वीट में कहा था कि पाकिस्तानी संविधान के मुताबिक केवल मुस्लिम राष्ट्रपति बन सकता है। भारत ने शोषित समुदायों के राष्ट्रपति देखे हैं। पाक हमसे सीखे।

ईसाइयों पर हमले : नौ साल में 400 लोगों की मौत, 500 घायल

पाकिस्तान में ईशनिंदा के बहाने नौ साल में 400 ईसाई मारे गए। 500 घायल हुए। दिसंबर 2017 में क्वेटा के चर्च पर हुए हमले में नौ लोग मारे गए। 57 घायल हुए। मार्च 2016 में लाहौर में ईस्टर मना रहे ईसाइयों पर हमला हुआ। 70 लोग मारे गए। 340 घायल हुए। 2015 में लाहौर के चर्चों में धमाकों में 14 लोग मारे गए। 70 घायल हुए। 2013 में पेशावर के चर्च में हमले में 80, पंजाब के गोजरा में भीड़ के हमले में नौ लोग मारे गए।

सिंध के हिंदू पाकिस्तान छोड़कर भारत जा सकते हैं

पाकिस्तान में मानवाधिकार आयोग स्वतंत्र निगरानी संस्था है। आयोग ने इसी साल कहा था कि पाकिस्तान में ईश-निंदा कानून ने लोगों को चुप रहने पर मजबूर कर दिया है। ईसाई, अहमदिया, हजारा, हिंदू और सिख लोगों पर हमले हो रहे हैं। सिंध में हिंदू असहज हालात में हैं। सिंध के हिंदुओं की सबसे बड़ी चिंता उनकी महिलाओं के अपहरण और जबरन धर्मांतरण की है। यहां हिंदुओं से भेदभाव जारी रहा तो वे भारत जा सकते हैं।


 
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