पाकिस्तान के अखबारों में छाए रहे, नवाज शरीफ के बगावती तेवर
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पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अखबारों में इस हफ्ते सबसे ज्यादा जो खबर चर्चा में रही वो थी सीनेट चेयरमैन का चुनाव। इसके अलावा भारत प्रशासित कश्मीर और भारत से जुड़ी खबरें
भी सुर्खियों में रहीं।
लेकिन सबसे पहले बात करते हैं, पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ के एक बयान की। आसिफ का कहना है कि अमरीका चाहता है कि पाकिस्तान उसकी प्रॉक्सी बने लेकिन ऐसा कभी नहीं होगा।अखबार नवा-ए-वक्त के मुताबिक ख्वाजा आसिफ ने संसद में अपने भाषण में अमरीका की जमकर आलोचना की। अखबार ने पाकिस्तानी विदेश मंत्री के पूरे भाषण को छापा है।
अखबार के मुताबिक ख्वाजा आसिफ का कहना था कि समंदर के पार से आकर दुश्मन इस्लामी देशों में खून की होली खेल रहा है और मुसलमान देशों के मुखिया दुश्मन के हाथों का खिलौना बने हुए हैं। अमरीका पर सख्त हमला करते हुए ख्वाजा आसिफ ने कहा, "हमने मेड इन अमरीका जिहाद लड़ा और जिहादी बनाए। हमने अपना क्या हाल किया है हमें अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। मरवाता कोई और है, कत्ल करने का हथियार हमारे हाथों में होता है। मुसलमान देशों को दुश्मनों की जरूरत नहीं, क्योंकि मुसलमान देश किसी एक भी मुद्दे पर एकमत नहीं हुए हैं।''
ख्वाजा आसिफ ने अफगानिस्तान में अमरीका की भूमिका पर भी उंगली उठाई। ख्वाजा आसिफ का कहना था, "अफगानिस्तान में दुनिया की 16 बेहतरीन सेनाएं मौजूद हैं लेकिन फिर भी 43 फीसदी इलाके पर तालिबान का कब्जा है और अमरीकी प्रशासन इसके लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराता है।''
चरमपंथी संगठन हक्कानी नेटवर्क को पाकिस्तानी समर्थन के आरोप को नकारते हुए ख्वाजा आसिफ ने कहा कि अमरीका की अफगानिस्तान में शांति बहाल करने की कोई मंशा नहीं है। अमरीका पर हमला जारी रखते हुए उन्होंने कहा, "इस्लामिक स्टेट अफगानिस्तान में सक्रिय है और हम सब जानते हैं कि इसे अफगानिस्तान कौन लाया है।''
इस भाषण के दौरान उन्होंने भारत और भारत प्रशासित कश्मीर का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि भारतीय सेना ने अंतरराष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा पर 400 से ज्यादा बार युद्धविराम का उल्लंघन किया है। उनके अनुसार इस साल अब तक भारतीय फायरिंग के कारण 18 पाकिस्तानी नागरिक मारे जा चुके हैं और पिछले साल भी 54 पाकिस्तानी नागरिक मारे गए थे। उन्होंने कहा कि सीमा पर तनाव कम करने के लिए पाकिस्तान लगातार कोशिश कर रहा है लेकिन इस मामले में भारत ने अभी तक कोई सकारात्मक रुख नहीं दिखाया है।
अब बात पाकिस्तान के ऊपरी सदन सीनेट के चेयरमैन के चुनाव की।
अखबार एक्सप्रेस लिखता है कि सीनेट के चेयरमैन के लिए जोड़-तोड़ जारी है। अखबार के मुताबिक पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के प्रमुख इमरान खान ने कहा है कि इस पद के लिए उनकी पार्टी ना तो मुस्लिम लीग (एन) का समर्थन करेगी और ना ही पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी का। अखबार के अनुसार इमरान खान ने मांग की है कि चेयरमैन बलूचिस्तान और वाइस चेयरमैन फाटा से होना चाहिए।वहीं, अखबार जंग लिखता है कि सीनेट चेयरमैन के पद के लिए हर तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं।
पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने सीनेट के चेयरमैन रजा रब्बानी को सर्वसम्मित से दोबारा चेयरमैन बनाए जाने की सिफारिश की लेकिन पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी ने उनकी इस सलाह को ठुकरा दिया।सोमवार को सीनेट के चेयरमैन और वाइस चेयरमैन का चुनाव होना है। शुक्रवार को 52 सदस्यों का कार्यकाल पूरा हो गया। सोमवार को 52 नए सीनेटर शपथ लेंगे।
नवाज बदलना चाहते हैं इतिहास
नवाज शरीफ ने कहा है कि पाकिस्तान में पिछले 70 सालों से जुल्म हो रहा है और वो उसको रोकना चाहते हैं और उसके खिलाफ बगावत करना चाहते हैं। अखबार नवा-ए-वक्त के अनुसार पंजाब प्रांत के बहावलपुर शहर में एक रैली को संबोधित करते हुए नवाज शरीफ ने कहा कि पिछले 70 सालों में पाकिस्तान की नस्लों के साथ बहुत जुल्म हुए हैं। उनका कहना था, "पाकिस्तान उस वक्त तक तरक्की नहीं कर सकता जब तक हम 70 साल के इतिहास को नहीं बदलेंगे। पाकिस्तान में 70 सालों से जो हो रहा है मैं उसके खिलाफ बगावत करता हूं। हमारे अगले 70 साल पिछले 70 सालों से बेहतर होने चाहिए। ये तभी मुमकिन है जब हमें अपने वोट पर किसी को भी डाका नहीं डालने देंगे।''