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'इमरान ख़ान से बेहतर है नवाज़ शरीफ़'
Updated Sun, 12 May 2013 05:06 PM IST
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अंग्रेज़ी में एक कहावत है, 'थर्ड टाइम लकी', यह कहावत पाकिस्तान मुस्लिम लीग (पीएमएल) के नेता नवाज़ शरीफ़ पर सही बैठती हैं।
अब यह तय है कि नवाज़ शरीफ़ तीसरी बार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बनेंगे। ऐसे में दोनों देशों के लिए मेरी दुआ है कि तीसरी बार वे लकी साबित हो।
प्रोफ़ाइल: ख़ाक से उठे फिर नवाज़
वैसे अगर इमरान ख़ान प्रधानंत्री बनते तो वे भारत के साथ संबंधों को तवज्जो तो जरूर देते। लेकिन इमरान ख़ान अभी इंपल्सिव हैं। एक राजनेता के रूप में उनकी परीक्षा अभी नहीं हुई है।
वहीं नवाज़ शरीफ़ एक मंझे-मंझाए राजनेता है। वे जेल भी जा चुके हैं और सैन्य शासन के साथ टकरा चुके हैं। अगर नवाज़ शरीफ़ बदलें न तो वे इमरान ख़ान से बहुत अलग और बेहतर साबित होंगे।
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नवाज़ शरीफ़ का सेना से हर बार कुछ न कुछ मनमुटाव हुआ है। उन्होंने पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) की सरकार को पांच साल तक चलने दिया है, हालांकि वे चाहते तो सरकार गिरा भी सकते थे।
पीपीपी के पूरे कार्यकाल के दौरान उन्होंने अपनी राजनीतिक परिपक्वता का परिचय दिया और ज़रदारी सरकार को कभी भी गिराने की कोशिश नहीं की। उन्हें लगा कि अगर देश में लोकतंत्र को मजबूत करना है तो उन्हें इस तरह से सहयोग देना होगा।
नवाज़ शरीफ़: सेना ने हटाया, जनता ने पीएम बनाया
सेना के साथ उनका हमेशा से मनमुटाव रहा है। यह उनकी राजनीति का एक पक्ष है। मुमकिन है कि वैसा एक बार फिर हो जाए। लेकिन यह इस बात पर निर्भर करेगा कि अगला सेना प्रमुख कौन होता है। हमें देखना होगा कि आगे क्या होता है।
मैं एक ख़ास चीज को ओर ध्यान दिलाना चाहूंगा कि तहरीके़ तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) ने शुरू में ही कहा था कि उसका लोकतंत्र में भरोसा नहीं है। वह चुनाव नहीं होने देगी। उन्होंने अंत तक बम बरसाए और तीन पार्टियों को निशाने पर भी रखा।
यह चुनाव वहाँ एक तरह से लोकतंत्र का इम्तिहान था। इसमें वे खरे उतरे हैं। इस माहौल में भी वहाँ 50 फ़ीसदी से अधिक मतदान हुआ। इसके लिए मैं पाकिस्तान की जनता को बधाई देना चाहूंगा।
बदलती बिसात: शरीफ़ अर्श पर मुशर्रफ़ फ़र्श पर
(बीबीसी संवाददाता रेहान फ़जल के साथ हुई बातचीत पर आधारित)
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अब यह तय है कि नवाज़ शरीफ़ तीसरी बार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बनेंगे। ऐसे में दोनों देशों के लिए मेरी दुआ है कि तीसरी बार वे लकी साबित हो।
प्रोफ़ाइल: ख़ाक से उठे फिर नवाज़
वैसे अगर इमरान ख़ान प्रधानंत्री बनते तो वे भारत के साथ संबंधों को तवज्जो तो जरूर देते। लेकिन इमरान ख़ान अभी इंपल्सिव हैं। एक राजनेता के रूप में उनकी परीक्षा अभी नहीं हुई है।
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वहीं नवाज़ शरीफ़ एक मंझे-मंझाए राजनेता है। वे जेल भी जा चुके हैं और सैन्य शासन के साथ टकरा चुके हैं। अगर नवाज़ शरीफ़ बदलें न तो वे इमरान ख़ान से बहुत अलग और बेहतर साबित होंगे।
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नवाज़ शरीफ़ का सेना से हर बार कुछ न कुछ मनमुटाव हुआ है। उन्होंने पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) की सरकार को पांच साल तक चलने दिया है, हालांकि वे चाहते तो सरकार गिरा भी सकते थे।
पीपीपी के पूरे कार्यकाल के दौरान उन्होंने अपनी राजनीतिक परिपक्वता का परिचय दिया और ज़रदारी सरकार को कभी भी गिराने की कोशिश नहीं की। उन्हें लगा कि अगर देश में लोकतंत्र को मजबूत करना है तो उन्हें इस तरह से सहयोग देना होगा।
नवाज़ शरीफ़: सेना ने हटाया, जनता ने पीएम बनाया
सेना के साथ उनका हमेशा से मनमुटाव रहा है। यह उनकी राजनीति का एक पक्ष है। मुमकिन है कि वैसा एक बार फिर हो जाए। लेकिन यह इस बात पर निर्भर करेगा कि अगला सेना प्रमुख कौन होता है। हमें देखना होगा कि आगे क्या होता है।
मैं एक ख़ास चीज को ओर ध्यान दिलाना चाहूंगा कि तहरीके़ तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) ने शुरू में ही कहा था कि उसका लोकतंत्र में भरोसा नहीं है। वह चुनाव नहीं होने देगी। उन्होंने अंत तक बम बरसाए और तीन पार्टियों को निशाने पर भी रखा।
यह चुनाव वहाँ एक तरह से लोकतंत्र का इम्तिहान था। इसमें वे खरे उतरे हैं। इस माहौल में भी वहाँ 50 फ़ीसदी से अधिक मतदान हुआ। इसके लिए मैं पाकिस्तान की जनता को बधाई देना चाहूंगा।
बदलती बिसात: शरीफ़ अर्श पर मुशर्रफ़ फ़र्श पर
(बीबीसी संवाददाता रेहान फ़जल के साथ हुई बातचीत पर आधारित)