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पाकिस्तान: क्या चुनावी वादे होंगे पूरे?

Tue, 21 May 2013 08:50 AM IST
Updated Tue, 21 May 2013 08:50 AM IST
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nawaz sharif govt in pakistan

आम चुनाव के बाद पाकिस्तान को इंतज़ार है अपनी नई सरकार के गठन का जिसका चेहरा बनेंगे नवाज़ शरीफ़। वो इससे पहले भी दो बार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रह चुके हैं और ये तीसरा मौका होगा जब पाकिस्तान की क्लिक करें आवाम ने उनपर भरोसा दिखाया है।

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शरीफ के करीबियों का कहना है कि नवाज़ नए जोश के साथ और पुरानी गलतियों से सीख लेकर आएंगे।

शरीफ ने कहा है कि उनकी प्राथमिकता अर्थव्यवस्था में सुधार करना है और वो इस काम में इमरान खान की नेतृत्व वाली विपक्षी पार्टी पाकिस्तान तहरीके इंसाफ़ का साथ चाहेंगे।
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पाकिस्तान के ज्यादातर इलाकों और बाज़ारों से अब चुनावी रंग गायब हो चला है। झेलम के इस प्रमुख बाज़ार से भी पोस्टर और बैनर हट चुके हैं।

तापमान चरम पर है लेकिन लोगों के बीच क्लिक करें चुनावी पारा अब सिमटने की ओर है। लोगों को तो चाहिए की उनकी चुनी हुई सरकार उनकी जरूरतों को जल्द से जल्द पूरा कर दें।
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बिजली कटौती बड़ी समस्या

अहमद सलीम मीर इसी इलाके में एक आटा चक्की मील चलाते है जिसे रोज़ सामना करना पड़ता है पाकिस्तान के सबसे बड़े संकट से, जो है बिजली कटौती।

उन्होंने कहा, "बारह दिन पहले तक यहां ना क्लिक करें बिजली थी ना कोई काम, तो मैं अपना बिज़नेस कैसे ठीक से चलाता? यहां मैने 32 मजदूरों को काम पर रखा है और इन्हे मैने बिना काम कराए पैसे दिए हैं। ऐसे में काम कैसे चलेगा। हम बिल कैसे भरेंगे। मुझे लगता है कि नवाज शरीफ को यहां की समस्याओं के बारे में पता है और वो कुछ करना चाहते हैं।"

दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी सड़क, जीटी रोड के पास पाकिस्तान में स्थित झेलम देश के सबसे प्रमुख व्यवसायिक इलाकों में से एक है।

ये वो इलाका है जहां झेलम के आर पार जाने के लिए पुल बना है। दूर दूर तक खेती की जमीन है। यहां चुनाव सभी दलों के लिए एक कड़ी परीक्षा थी।

इमरान के लिए 'सबक'


इलाके में चुनाव जीते नवाज़ शरीफ की पार्टी के स्थानीय नेता इक़बाल मेहदी खान का मानना है कि ये इमरान खान के लिए एक सबक है।

इक़बाल मेहदी खान ने कहा, "इमरान खान को जो वोट मिले हैं वो अपर क्लास के हैं। हमारे इलाके में 90 फीसदी वोट लोवर मिडल क्लास के हैं। उनको शहरों में अपर क्लास के वोट मिले जबकि हमे मिडल क्लास और गरीब लोगों ने वोट दिया। लिहाज़ा जो वोट इमरान खान को मिले वो कोई खास मायने नहीं रखते।"


इस जगह से कुछ ही दूर वो इलाका है जहां पूर्व क्रिकेटर इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीके इंसाफ के लिए प्रचार का गढ़ बनाया गया था।

चुनाव खत्म हो गया लिहाज़ा यहां इंसानों के साथ रहने वाले कुछ जानवर अब चैन से अपनी ज़िंदगी जी सकते हैं।

स्थानीय कॉलेज के कैंपस में जो छात्र इमरान खान का साथ देते थे उन्हें ग्रामीण इलाकों में इमरान खान का दबदबा बढ़ता दिख रहा है।

इनके पास नवाज़ शरीफ के लिए एक मांगों की सूची भी है। तो क्या चुनावी दावों और वादों का जिन्न एक बार फिर वापस बोतल में चला जाएगा।

इसी कॉलेज में लेकचरर गुलशन असलम ने कहा, "शायद नवाज शरीफ पिछली गल्तियों से सबक ले चुके होंगे और दस साल तक बाहर रहने के बाद कुछ नया करेंगे लेकिन जो भी हो ये उनके लिए आखिरी मौका होगा"

चुनाव के बाद एक बात तो साफ हो गई है कि पाकिस्तान में बिजली आपूर्ती व्यवस्था दुरुस्त करना पुराने ढर्रे पर चलने वाली किसी नई सरकार के बस की बात नहीं।

बाकी स्थितियां भी बदलनी मुश्किल है। ये बात पाकिस्तान में सत्ता संभालने जा रहे उनके नए प्रधानमंत्री से बेहतर और किसे पता होगी।


माइक वूल्डरिज

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