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भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर नवाज शरीफ से इस्तीफे की मांग

Tue, 18 Jul 2017 12:36 PM IST
BBC
BBC Updated Tue, 18 Jul 2017 12:36 PM IST
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 Nawaz Sharif demands resignation over corruption charges
नवाज शरीफ - फोटो : BBC

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और उनके परिवार के खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर बढ़ते दबाव के बीच सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। शरीफ खानदान पर लगे आरोपों की जांच कर रही एजेंसी ने कोर्ट को बताया कि उनका परिवार अपनी संपत्ति और जायदाद का हिसाब-किताब देने में नाकाम रहा है। जांच की शुरुआत उस समय हुई थी जब पनामा पेपर्स लीक्स में ये बात सामने आई कि लंदन में फ्लैट खरीदने के लिए नवाज शरीफ के बेटों की विदेशी कंपनियों का इस्तेमाल किया गया था। इसके बाद इस बात को लेकर संदेह बढ़ गया कि गलत तरीके से हासिल की गई संपत्ति को ठिकाने लगाने के लिए इन कंपनियों का इस्तेमाल किया गया था।

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हालांकि नवाज शरीफ इन आरोपों से जोरदार तरीके से खंडन करते हैं। उनका कहना है कि लंदन में खरीदी गई जायदाद जायज तरीके से खरीदी गई है और ये प्रॉपर्टी उनके नाम से नहीं है। लेकिन ये मुद्दा उनके लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। विपक्षी पार्टियां उन पर राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल करके गलत जरिए से अकूत दौलत इकट्ठा करने का आरोप लगा रही हैं।
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इतना ही नहीं उनसे इस्तीफे की मांग भी की जा रही है। अभी तक नवाज शरीफ इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं और जांचकर्ताओं की रिपोर्ट सिर्फ आरोप और अनुमान हैं। सत्ता में बने रहने के उनके फैसले पर पिछले हफ्ते कैबिनेट की भी मुहर लग गई है। हालात का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि सुप्रीम कोर्ट के बाहर सैंकड़ों सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं और कोर्ट परिसर के कुछ हिस्सों की घेराबंदी भी की गई है।

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 Nawaz Sharif demands resignation over corruption charges
मरियम शरीफ - फोटो : BBC

अप्रैल में गठित की गई जांच कमिटी का कहना है कि शरीफ खानदान के जायदाद और आमदनी के घोषित और ज्ञात स्रोतों के बीच बड़ा फासला पाया गया है। रिपोर्ट में नवाज शरीफ पर अपनी जायदाद के बारे में तथ्य छुपाने, पिता की संपत्ति बढ़ा-चढ़ाकर बताने का भी आरोप लगाया है ताकि परिवार की प्रॉपर्टी को वाजिब ठहराया जा सके। नवाज शरीफ के पहले कार्यकाल (1985-93) में उनकी संपत्ति में हुए बेहिसाब इजाफे पर भी सवाल उठाए गए हैं। नवाज शरीफ की बेटी मरियम शरीफ को पाकिस्तान से बाहर मौजूद खानदान की कंपनियों का मालिक बताया गया है।

इन्हीं कंपनियों के जरिए लंदन की प्रॉपर्टी खरीदी गई थी। मरियम पर दस्तावेजों के साथ छेड़खानी करने के भी आरोप हैं। मरियम पर आरोप है कि अपनी कंपनी को उन्होंने अपने भाई की कंपनी के रूप में पेश किया। हालांकि मरियम का दावा है कि कंपनी उनके भाई की ही है, वो इस कंपनी की ट्रस्टी भर हैं। ये आरोप फरवरी, 2006 के एक ट्रस्ट डीड के आधार पर लगाए गए हैं जिन पर मरियम के दस्तखत हैं। जेआईटी का कहना है कि ये दस्तावेज कैलिबरी फॉन्ट में हैं जो जनवरी, 2007 तक व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए उपलब्ध ही नहीं थे।



इन फ्लैट्स और ऑफ-शोर कंपनियों के बारे में पनामा लीक्स के जरिए जानकारी सामने आई। शरीफ खानदान का कहना है कि फ्लैट्स और ब्रिटेन और खाड़ी क्षेत्र में बिजनेस करने के लिए पैसा गल्फ स्टील मिल्स की बिक्री से आया था। गल्फ स्टील मिल्स संयुक्त अरब अमीरात में है और इसकी स्थापना नवाज शरीफ के मरहूम अब्बा मियां मोहम्मद शरीफ ने सत्तर के दशक की शुरुआत में की थी। उन्होंने बाद में कतर में दूसरे कारोबार में भी पैसा लगाया।

 Nawaz Sharif demands resignation over corruption charges
रिपोर्ट - फोटो : BBC

पैसे का हिसाब-किताब देने के लिए शरीफ खानदान ने जेआईटी के पास कतर के प्रधानमंत्री प्रिंस हम्माद बिन जासिम अल-थानी की एक चिट्ठी सफाई के तौर पर पेश की, जिसमें मनी-ट्रेल यानी पैसे के लेन-देन का हिसाब दिया गया था। लेकिन जेआईटी कतर के प्रधानमंत्री से कोई सवाल-जवाब नहीं कर पाई। जेआईटी का कहना है कि पाकिस्तान से दुबई और वहां से कतर के रास्ते लंदन फ्लैट्स के लिए पैसा पहुंचने का कोई सबूत नहीं मिला है।

जेआईटी की रिपोर्ट से मुल्क बंटा हुआ दिख रहा है। ये बात मुल्क के मीडिया कवरेज से जाहिर भी होती है। सरकार समर्थक टीवी चैनल जेआईटी की रिपोर्ट को झूठ का पुलिंदा बता रहे हैं लेकिन विपक्ष के लिए सहानुभूति रखने वाले न्यूज चैनल लोगों के मन में ये बात बिठाने के लिए पुरजोर कोशिश कर रहे हैं कि शरीफ खानदान के तार करप्शन से जुड़े हुए हैं।

इस बात पर भी सवाल उठे हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने जेआईटी में सेना की आईएसआई समेत दो खुफिया एजेंसियों के एक-एक प्रतिनिधि को छह सदस्यीय जेआईटी में बतौर मेंबर नियुक्त किया है। कायदे से इसमें केवल वित्तीय मामलों के विशेषज्ञ होने चाहिए थे।

 Nawaz Sharif demands resignation over corruption charges
Supreme Court of Pakistan

अब केवल तीन विकल्प दिखाई देते हैं। पहला ये कि सुप्रीम कोर्ट सबूतों के अभाव में नवाज शरीफ को इस मामले से बरी कर दे। दूसरा ये कि कोर्ट पर्याप्त सबूतों के आधार पर नवाज शरीफ को भ्रष्ट करार देकर उन्हें प्रधानमंत्री पद पर बने रहने से अयोग्य करार दे दे। तीसरा ये कोर्ट कहे कि इस मामले पर आगे की कार्रवाई के लिए पर्याप्त सबूत हैं और मामले को ट्रायल कोर्ट के हवाले कर दिया जाए।

अयोग्य करार दिए जाने का मतलब ये होगा कि नवाज शरीफ का सियासी करियर खत्म हो जाएगा क्योंकि संविधान के मुताबिक प्रधानमंत्री का ईमानदार होना जरूरी है। उनकी बेटी और सियासी वारिस का भी यही हाल होगा। ये तय नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले को कैसे हैंडल करेगा, उस पर खुद भी बहुत दबाव है। प्रधानमंत्री के प्रॉपर्टी की जांच के लिए जेआईटी के गठन का आदेश देना अपने आप में एक बड़ा फैसला था। जेआईटी संविधान या सरकार के तहत नहीं है बल्कि सुप्रीम कोर्ट के तहत है।

बहुत कम लोगों को लगता है कि सुप्रीम कोर्ट जेआईटी की रिपोर्ट को पूरी तरह से खारिज कर देगा। अयोग्य करार दिए जाने की सूरत में नवाज शरीफ शाहबाज शरीफ को प्रधानमंत्री नियुक्त कर देंगे ताकि सरकार अपना कार्यकाल पूरा कर सके। शाहबाज शरीफ फिलहाल पंजाब के मुख्यमंत्री हैं। सियासी पंडितों को उम्मीद है कि नवाज शरीफ इतनी जल्दी मैदान नहीं छोड़ने वाले हैं।

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