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पाकिस्तानी मरीजों को सिर्फ ट्विटर पर वीजा देती हैं सुषमा स्वराज?

Thu, 11 Jan 2018 03:13 PM IST
शुमाइला जाफरी, बीबीसी
शुमाइला जाफरी, बीबीसी Updated Thu, 11 Jan 2018 03:13 PM IST
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Medical Visa to Pakistani Nationals on Twitter by Minister of External Affairs Sushma Swaraj
पाकिस्तान के लाहौर से कुछ दूरी पर जोहार टाउन की एक सुबह-शहर के लोग अभी नींद में हैं लेकिन डॉक्टर तैमूर उल हसन के घर पर हो रही हलचल बाकी दिनों से अलग है। डॉ तैमूर अच्छे से तैयार होकर नाश्ते की टेबल पर बैठे हैं। उनके चेहरे पर ताजगी है लेकिन उनकी बहन कुछ गंभीर नजर आ रही हैं। आधा घंटा बीतते-बीतते तैमूर जाने के लिए तैयार हैं।
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पूरा परिवार तैमूर को कुरान की छांव तले दुआएं देते हुए विदा करता है। डॉ तैमूर को दी जा रही ये दुआएं उनकी दिल्ली यात्रा के लिए हैं। तैमूर को लिवर कैंसर है और वे अपना इलाज कराने भारत आ रहे हैं। तैमूर इससे पहले 2015 में भी दिल्ली में सर्जरी करा चुके हैं। लेकिन इस बार उन्हें वीजा के लिए छह महीने इंतजार करना पड़ा।
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कैंसर फिर उभरने के बाद तैमूर ने कई बार कोशिश की लेकिन भारत नहीं आ सके। इजाजत मिलने की उम्मीद तकरीबन खो चुके थे जब बीती दिवाली पर उनकी छोटी बहन ने ट्विटर पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से गुहार लगाई। ट्विटर पर सक्रिय सुषमा स्वराज ने तुरंत जवाब दिया और ट्वीट करने के 24 घंटे के भीतर तैमूर को वीजा मिल गया।
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कार में बैठने से पहले तैमूर कहते हैं, ''यहां के मरीजों के लिए दिल्ली घर जैसा है। वहां इलाज सुविधाजनक रहता है। संस्कृति से लेकर भाषा तक सब एक जैसा ही तो है।'' इसी के साथ तैमूर वाघा अटारी बॉर्डर की तरफ बढ़ गए जहां से वे दिल्ली का रुख करेंगे।

वीजा मिलने के मामले में तैमूर भाग्यशाली हैं लेकिन ऐसे भी बहुत से लोग हैं, जिन्हें भारत में इलाज कराने के लिए आसानी से मेडिकल वीजा नहीं मिलता और चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। भारतीय वाणिज्य मंत्रालय के हालिया सर्वे के मुताबिक, साल 2015-16 में भारत ने 1,921 पाकिस्तानी मरीजों को वीजा दिया।

बाकी मुल्कों के मुकाबले ये आंकड़ा काफी कम है। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता डॉ मोहम्मद फैसल ने हाल ही में दावा किया था कि कभी भारत हर महीने 500 पाकिस्तानी मरीजों को वीजा देता था लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा है।

फैसल के मुताबिक, ''भारत ये वीजा मुफ्त में नहीं देता था। इन सेवाओं के लिए अच्छी खासी रकम चुकाई जाती थी। दोनों मुल्कों के बीच जो मानवीय ताल्लुकात हैं, मरीजों का वीजा देना इनमें से एक था। लेकिन अब माननीय सुषमा स्वराज ट्विटर पर लोगों को चुनती हैं।''

क सर्वे के मुताबिक, भारत में इलाज के लिए एक पाकिस्तानी मरीज औसतन एक लाख 85 हजार रुपये खर्च करता है। पाकिस्तानी मरीज लिवर ट्रांसप्लांट, कैंसर और बच्चों के इलाज के लिए अमरीका और दूसरे यूरोपीय देशों के मुकाबले भारत आना पसंद करते हैं।

मई 2017 में ऐसी मीडिया रिपोर्ट आई थीं कि भारत पाकिस्तान को दिए जाने वाले मेडिकल वीजा पर बैन लगा सकता है। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने इस मामले को पाकिस्तान में उस समय भारत के राजदूत रहे गौतम बंबावाले के सामने उठाया।

भारत ने हमेशा ऐसी खबरों को खारिज किया है। भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के बाद से दोनों मुल्कों के रिश्ते कई उतार-चढ़ाव से गुजरे लेकिन भारत ने पाकिस्तानी मरीजों को वीजा देना बंद नहीं किया है।

अब वीजा के आवेदन पहले के मुकाबले बढ़े हैं। अगर आप सुषमा स्वराज के ट्विटर अकाउंट पर नजर डालें तो आपको ऐसे दर्जनों लोग मिल जाएंगे, जो भारतीय विदेश मंत्री से वीजा के लिए संपर्क करते हैं।

ट्विटर पर सुषमा स्वराज की सक्रियता की वजह से पिछले कुछ समय में ट्विटर, वीजा मांग रहे पाकिस्तानी मरीजों के लिए आखिरी उम्मीद बन गया है। पाकिस्तान में भारत के नए राजदूत अजय बिसारिया ने पद संभालते हुए कहा भी था कि वे वीजा के मसले पर काम करना चाहेंगे।

अजय बिसारिया ने बीबीसी को बताया, ''लोगों के हक में सोचना हमारे लिए ज्यादा जरूरी है। मेडिकल वीजा इसका एक पहलू है। लोगों की तकलीफ और इमरजेंसी में मदद के लिए मेडिकल वीजा होता है। यह एक ऐसी चीज है, जिसे हम भी बढ़ावा देना चाहेंगे।''

'हर तीसरे महीने भारत आना होगा'

इस बीच डॉ तैमूर दिल्ली में अपने डॉक्टर सुभाष गुप्ता के पास पहुंच चुके हैं। सुभाष गुप्ता कैंसर के जाने-माने डॉक्टर हैं और बीते 20 साल से दिल्ली में प्रैक्टिस कर रहे हैं। डॉ सुभाष बताते हैं, ''इतने साल की प्रैक्टिस के दौरान पहली बार मेडिकल वीजा पर बैन की खबरें आईं। हमने इसे हटाने के लिए कोशिशें की और अब चीजें बेहतर हो रही हैं।''

तैमूर उल हसन को एक दूसरे डॉक्टर के पास रेडियो थैरेपी के लिए भेजा गया है। डॉ गुप्ता मानते हैं कि इलाज से तैमूर की जिंदगी पूरी तरह तो नहीं बदलेगी लेकिन उसमें कुछ साल और जुड़ जाएंगे। हालांकि यह तभी संभव होगा, जब वे हर तीसरे महीने भारत आएं।
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