फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Pakistan ›   many children like malala in Pakistan

पाकिस्तान में मलाला जैसे दूसरे बच्चे भी

Wed, 24 Oct 2012 11:55 PM IST
इस्लामाबाद/बीबीसी
इस्लामाबाद/बीबीसी Updated Wed, 24 Oct 2012 11:55 PM IST
विज्ञापन
many children like malala in Pakistan
पाकिस्तान में तालिबान द्वारा इस महीने के शुरू में मलाला यूसुफ़ज़ई की हत्या का प्रयास बताता है कि देश में चल रहा संघर्ष, देश के स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए कितना खतरनाक हो सकता है। अफ़गान सीमा से लगे पाकिस्तान के कबायली इलाके में हजारों स्कूल छात्रों को अपने परिवार वालों के साथ विस्थापित होना पड़ा है। इस इलाके को तालिबान ने अपनी शरणस्थली बना रखा है।
विज्ञापन


साल 2006 के बाद से चरमपंथियो द्वारा धर्मनिरपेक्ष शिक्षा के खिलाफ चलाए गए अनवरत अभियान के बाद से हज़ारों बच्चों को शिक्षा से वंचित होना पड़ा है। इस इलाके में सालों से चल रहे सैनिक अभियानों से भी काफी बरबादी हुई है। हांलाकि कुछ इलाकों से लड़ाकों को हटा दिया गया है, लेकिन नागरिक प्रशासन अभी तक उन इलाकों को पूरा तरह से सुरक्षित नहीं कर पाया है जहाँ पहले तालिबान का नियंत्रण हुआ करता था।
विज्ञापन



उत्तरी वज़ीरस्तान, दक्षिण वज़ीरिस्तान और ओरकज़ई क्षेत्र के कई इलाकों में अभी भी तालिबान काफी संख्या में रह रहे हैं। इन इलाकों से ही तालिबान, देश के अंदर कई नागरिक और सैनिक ठिकानों को अपना निशाना बनाते रहे हैं। मलाला तालिबान के बालिका शिक्षा विरोध की मुखर आलोचक थी लेकिन वह सिर्फ स्कूल जाने वाली लड़की थी और उसने ये सोचा भी नहीं था कि तालिबान उसे एक गंभीर विरोधी समझेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन


बस को निशाना
एक साल पहले तालिबान ने पेशावर शहर के दक्षिण में एक स्कूल बस पर हमला किया था जिसमें कम से कम चार लड़के मारे गए थे और 12 से अधिक घायल हुए थे जिसमें दो सात वर्षीय लड़कियाँ भी थीं। करीब के ख़ैबर कबायली इलाके में तालिबान के प्रवक्ता ने बाद में कहा था कि ऐसा स्थानीय कबाएलियों को जवाब देने के लिए किया गया था जिन्होंने पेशावर के दक्षिणी इलाके में तालिबान की उपस्थति का विरोध करने के लिए सशस्त्र स्वयंसेवक बल बनाया था।

पाकिस्तानी अधिकारियों का दावा है कि 2001 के बाद से आतंक के खिलाफ लड़ाई में 30000 से अधिक नागरिक और 3000 से अधिक सैनिक मारे जा चुके हैं। यह पता नहीं है कि इनमें से कितने बच्चे थे। इस मुद्दे पर जारी की गई संयुक्त राष्ट्र संघ की ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान में सिर्फ 2011 में ही कम से कम 57 बच्चे मारे गए हैं। यह मुख्यत: बारूदी सुरंगों के फटने, सड़क किनारे रखे बमों, गोलाबारी और निशाना लगा कर किए गए हमलों का शिकार हुए हैं।

ड्रोन हमले
इस तरह की भी खबरे हैं कि पाकिस्तान के कबायली इलाके में किए गए ड्रोन हमलों में भी कई बच्चे मारे गए हैं। इस इलाके में मीडिया को जहाँ चाहें वहाँ जाने की अनुमति नहीं है। लेकिन नवंबर 2011 में एक ब्रिटानी धर्मार्थ संस्था ने कई कबाएलियों के इस्लामाबाद जाने की व्यवस्था की थी ताकि वह ड्रोन हमलों का विरोध कर सकें। इस प्रतिनिधिमंडल में कई बच्चे भी थे जो इन ड्रोन हमलों में घायल हो गए थे।

इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि तालिबान किशोर बच्चों की आत्मघाती हमलावर के रूप में भर्ती करते रहे हैं ताकि पाकिस्तान में हमले किए जा सकें। फ़रवरी 2011 में उन्होंने उत्तरी पश्चिमी नगर मरदान में एक सैनिक क्षेत्र मे नए रंगरूटों को निशाना बनाने के लिए 12 साल के बच्चे का सहारा लिया था।

सैनिक क्षेत्र में स्थित स्कूल की वर्दी पहन कर एक लड़का कई सुरक्षा चौकियों को चकमा देता हुआ निकल गया था। फिर उसने परेड मैदान में जहाँ रंगरूट शारीरिक प्रशिक्षण ले रहे थे, विस्फोटकों से भरी अपना बंडी को उड़ा दिया था। इस हमले में 30 लोग मारे गए थे। इस घटना के तीन महीने बाद बीबीसी ने पुलिस द्वारा पकड़े गए एक भावी आत्मघाती हमलावर से बात की थी।

सीधे स्वर्ग
14 वर्षीय ओमर फ़िदाई ने बताया था कि वह डेरा गाज़ी खाँ शहर में एक सूफ़ी दरगाह पर किए जाने वाले दोहरे हमले का हिस्सा था। उसे अपने किशोर साथी के अपने आप को उड़ाने के बाद, राहत कर्मियों के पास विस्फोट करना था। लेकिन उसकी बंडी में सही तरीके से विस्फोट नहीं हो पाया था। वह घायल हो गया था लेकिन उसकी जान बच गई थी।


उसने बताया था कि उसको उत्तरी वज़ीरिस्तान के कबायली इलाके में आत्मघाती हमलावरों के शिविर में प्रशिक्षण दिया गया था। उसको यह विश्वास दिलाया गया था कि अगर वह काफ़िरों को मार देगा तो सीधे स्वर्ग जाएगा। संयुक्त राष्ट्र संघ की 2012 की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2011 के दौरान ऐसी 11 घटनांएं हुई थीं जहां आत्मघाती हमलों के लिए किशोर बालकों को इस्तेमाल किया गया था
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news, Crime all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed