जेल में लश्कर प्रमुख का आलीशान 'ऑफिस'
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पाकिस्तान सरकार के चरमपंथियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के दावों के बीच देश के सबसे चर्चित कैदियों में से एक जकी-उर-रहमान लखवी, तमाम ऐशो आराम के साथ जेल मे रह रहे हैं।
भारत सरकार लखवी को 2008 के मुंबई हमलों के प्रमुख साजिशकर्ताओं में मानती है। रावल पिंडी की विशाल जेल 'अद्याला' में जेलर के कार्यालय के एकदम बाद लखवी और उनके छह साथियों के कई कमरे हैं।
जेलर ने उन्हें टेलीविजन, मोबाइल फोन, इंटरनेट और दिन भर में कई लोगों से मुलाकात की इजाजत दे रखी है। एक जेल अधिकारी के मुताबिक लखवी किसी भी समय, रात-दिन और हफ्ते के सातों दिन कितने भी मेहमानों से मिल सकते हैं।
विश्व के किसी भी हिस्से में इसकी कल्पना तक नहीं की जा सकती, लेकिन पाकिस्तानी शासन में कुछ तत्व जेलों में रह रहे ऐसे चरमपंथी कमांडरों को खास सुविधाएं देते हैं, जिनके बारे में उन्हें लगता है कि भविष्य में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों पर उनकी जरूरत पड़ सकती है।
26/11 में गिरफ्तार हुआ था लखवी
दिसंबर 2008 में भारत ने लखवी को मुंबई (नवंबर 2008 के) हमलों में मुख्य अभियुक्त घोषित किया था, जिसके चार दिन बाद सात दिसंबर, 2008 को पाकिस्तान में लखवी को गिरफ्तार किया गया।
मुंबई में 10 बंदूकधारियों ने दो भव्य होटलों, एक ट्रेन स्टेशन, एक अस्पताल, एक यहूदी सांस्कृतिक केंद्र और कुछ अन्य जगहों पर हमला कर 160 से ज्यादा लोगों को मार दिया था।
माना जाता है कि लखवी को पाकिस्तान स्थित चरमपंथी गुट लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के प्रशिक्षण शिविर से गिरफ्तार किया गया। लश्कर पर आरोप है कि उसने भारत प्रशासित कश्मीर में भारतीय सुरक्षाबलों के खिलाफ जंग छेड़ रखी है।
इसके करीब छह साल बाद लखवी एक बार फिर सुर्खियों में आए जब मुंबई हत्याकांड की जांच कर रही एक आतंकवाद निरोधी अदालत ने उन्हें जमानत पर छोड़ने के आदेश दिए।
पाकिस्तान के पेशावर में एक स्कूल पर (16 दिसंबर 2014 को) आतंकवादी हमले और उसके बाद पाकिस्तान की सरकार और सेना के हर प्रकार के आतंकवाद के खात्मे के लिए संयुक्त अभियान चलाने की मांग किए जाने के बमुश्किल एक दिन बाद ही लखवी की रिहाई का फैसला आया था। ऐसा लगा कि लखवी की जमानत ने उस घोषणा पर सवाल उठा दिए हैं।
पाकिस्तान पर हमेशा से भारत और अफगानिस्तान में अपने भू-सामरिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए ऐसे धार्मिक और चरमपंथी समूहों को बनाने और उन्हें पनाह देने का आरोप लगता रहा है।
हालांकि ऐसे कई संगठनों पर पाकिस्तान के ही खिलाफ भी जंग छेड़े जाने की बातें होती रही हैं। लश्कर भी ऐसा ही एक समूह है।
लखवी कैसे बने लश्कर के सदस्य
55 वर्षीय लखवी का जन्म पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के ओकारा जिले में हुआ था। यही मुंबई हमले में जीवित पकड़े गए एकमात्र हमलावर अजमल कसाब का भी जिला है।
साल 1990 में वह मध्य-पूर्व के पैसे से चलने वाले एक सलाफी अभियान, जमात अह्ल-ए-हदीथ (जेएएच) में शामिल हुए थे। बाद में वह जमात की हथियारबंद चरमपंथी शाखा एलईटी के सदस्य बन गए। जानकारों के अनुसार वे एलईटी के संस्थापक हाफिज मोहम्मद सईद के नजदीकी रिश्तेदार हैं।
साल 2001 में भारतीय संसद पर हमले के बाद पाकिस्तान सरकार ने एलईटी पर प्रतिबंध लगाया तो सईद ने जमात उद दावा (जेयूडी) का गठन किया, जिसे एक इस्लामिक चैरिटी बताया जाता है।
कई लोगों को लगता है कि जेयूडी, एलईटी का नागरिक चेहरा मात्र है। 1990 के दशक में लखवी ने पंजाब के मुरिद्के के नज़दीक एलईटी के मुख्यालय में काम किया जहां जेयूडी का भी मुख्यालय था।
इस दौरान वह लगातार जंग में शामिल रहे। भारतीय सुरक्षा बलों के अनुसार बाद में भारत प्रशासित कश्मीर में युद्ध अभियानों की योजना बनाने लगे।
लखवी ने की थी हमलावरों की मदद
90 के दशक के आखिर तक वह एलईटी के ऑपरेशन हेड बन गए थे। लखवी और अन्य छह पर मामला मुंबई हमलों के सिलसिले में भारत सरकार द्वारा उपलब्ध करवाए गए सबूतों के आधार पर दर्ज किया गया।
इन सबूतों में अजमल कसाब के कबूलनामे के साथ ही सैटेलाइट फोन का डाटा भी था जिसे भारतीय जांच एजेंसियों ने उस नाव से बरामद किया था जिसे हमलावरों ने कराची से मुंबई के रास्ते में अगवा किया था।
भारतीय अधिकारियों के अनुसार लखवी ने हमलावरों से यात्रा के दौरान बात की थी और संभवतः हमले के दौरान भी उनके संपर्क में थे। उन्होंने कहा कि कसाब ने लखवी को पहचान लिया था और कहा था कि उन्होंने 'हमलों के बारे में बताने में मदद की थी।'
लेकिन इसके बाद दो ऐसी बातें बताई गईं जिनके आधार पर लखवी को जमानत मिल गई।
जेल से ही सक्रिय
अधिकारियों का कहना है कि इससे अमरीका और चीन में भी कुछ धड़े नाराज हो गए थे क्योंकि लखवी की रिहाई से एक बड़ा बवाल होने की आशंका थी।
पाकिस्तान सरकार ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के कानून (एमपीओ) के तहत लखवी को हिरासत में रखकर और उनकी जमानत को ऊपरी अदालत में चुनौती देकर मामले को ठंडा करने की कोशिश की है।
लेकिन लखवी तक लोगों की बेरोकटोक आवाजाही, मोबाइल फोन का इस्तेमाल और इंटरनेट पहुंच के चलते वह एलईटी में अपनी भूमिका सक्रियता से निभा रहे हैं।
एक जेल अधिकारी ने कहा कि लखवी की गिरफ़्तारी के बाद से एलईटी के रोज़मर्रा के काम एक कामचलाऊ अध्यक्ष अहमद देख रहे हैं और लखवी अब भी इस गुट के ऑपरेशन चीफ हैं।
उन्होंने कहा, "औसतन रोज़ उनसे 100 लोग मिलने आते हैं। उन्हें उनके निजी कक्ष तक ले जाया जाता है जहां वह गार्ड्स की देखरेख के बिना आपस में बात कर सकते हैं और जब तक चाहें वहां रह सकते हैं।"