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पत्रकारों को सुरक्षा देने में नाकाम रहा पाकिस्तान-एमनेस्टी

Wed, 30 Apr 2014 03:46 PM IST
Updated Wed, 30 Apr 2014 03:46 PM IST
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journalist is not safe in pakistan-amnesty

मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अपनी एक ताज़ा रिपोर्ट में कहा है कि पाकिस्तान सरकार पत्रकारों की सुरक्षा करने में पूरी तरह से नाकाम रही है।

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संगठन की रिपोर्ट में पाकिस्तान में साल 2008 में सैन्य शासन ख़त्म होने के बाद से 34 पत्रकारों की हत्या की घटनाओं का जिक्र है। इनमें से 13 घटनाएं आतंकवाद प्रभावित बलूचिस्तान इलाक़े की हैं। वहीं तालिबान के प्रभाव वाले उत्तर-पश्चिम इलाक़े में पत्रकारों की हत्या की नौ घटनाएं हुईं।
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पत्रकारों की हत्या के मामले में 2002 से अब तक केवल एक मामले ही मामले में दोषियों के सज़ा हुई है। यह मामला है 2011 में मारे गए वली ख़ान बाबर का।

हालांकि एमनेस्टी का कहना है कि इस मामले में गंभीर चिंता का विषय यह है कि निष्पक्ष सुनवाई हुई या नहीं। कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट के मुताबिक़ पाकिस्तान पत्रकारों के लिए दुनिया के सबसे ख़रनाक़ देशों में से एक है। इस समिति ने पाकिस्तान में पत्रकारों पर हुए हमलों का दस्तावेज़ीकरण किया है।

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हामिद मीर पर हमले के बाद आई रिपोर्ट

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एमनेस्टी की यह रिपोर्ट पाकिस्तान में मशहूर पत्रकार हामिद मीर पर हुए हमले के बाद जारी की गई है। हामिद मीर पर मोटरसाइकिल पर सवार लोगों ने 19 अप्रैल को उस समय हमला किया, जब वो कराची हवाई अड्डे से निकल रहे थे, उनके पेट और पैरों में छह गोलियां लगी।

पाकिस्तान के एक और टीवी एंकर राज़ा रूमी पर इस साल मार्च में लाहौर में उस समय हमला किया गया था, जब वो अपनी कार में थे। इस हमले में उनके चालक की मौत हो गई थी।

रिपोर्ट तैयार करने के लिए एमनेस्टी ने जिन पत्रकारों से बातचीत की उनमें से अधिकांश ने शिकायत की कि हमले या उत्पीड़न के लिए पाकिस्तान के सैन्य ख़ुफ़िया इकाई डायरेक्टरेट फ़ॉर इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस से जुड़े लोग ज़िम्मेदार हैं।

सुरक्षा में चूक या सेना और तालिबान के बीच कथित संबंधों जैसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील विषयों की लगातार रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों को निशाना बनाया जाता है।

आरोपों का खंडन

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एमनेस्टी ने कहा है कि पत्रकारों पर हमले का एक सुव्यवस्थित तरीक़ा है, इसमें टेलीफ़ोन पर धमकी देने और प्रत्यक्ष रूप से लेकर उत्पीड़न, अपहरण, अत्याचार और यहां तक की हत्या कर देना शामिल है।

अधिकारियों ने पहले लगाए गए इस तरह के आरोपों का खंडन किया है। एमनेस्टी का कहना है कि ख़ुफ़िया एजेंसियों के अलावा शक्तिशाली राजनीतिक संगठन, तालिबान और अन्य जातीय समूह भी पत्रकारों को निशाना बनाते हैं।

प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने मार्च में पत्रकारों की रक्षा के लिए ठोस पहल करने का वादा किया था। एमनेस्टी इंटरनेशनल के एशिया-प्रशांत क्षेत्र के निदेशक डेविड ग्रिफिथ्स का कहना है कि पत्रकारों की सुरक्षा के लिए अभी और काम करने की ज़रूरत है।

वो कहते हैं, ''एक महत्वपूर्ण क़दम यह होगा कि पाकिस्तान अपनी सेना और ख़ुफ़िया एजेंसियों की जाँच करे और पत्रकारों के मानवाधिकार उल्लंघन के लिए ज़िम्मेदार लोगों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई करे। इससे कड़ा संदेश जाएगा।''

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