पाकिस्तान: इमरान के पीएम बनने की राह में कई रोड़े, सरकार बनने में लग सकते हैं 2-3 हफ्ते
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पाकिस्तान के आम चुनाव में इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) नेशनल असेंबली की 270 में से 115 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी है। इमरान खान एक समय पाकिस्तान क्रिकेट टीम के कप्तान थे और अब वो पाकिस्तान की राजनीति के 'कप्तान' बनने की ओर अग्रसर हैं। लेकिन उनकी ये राह इतनी आसान नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो इसके लिए उन्हें अभी 2-3 हफ्तों का इंतजार करना पड़ सकता है।
इसमें इमरान खान की सबसे बड़ी परीक्षा समर्थन टेस्ट (फ्लोर टेस्ट) की होगी। अगर वो उसमें पास हो गए तभी उन्हें प्रधानमंत्री का पद हासिल होगा। इसके लिए उन्हें पाकिस्तान की नेशनल असेंबली की 342 सीटों में से 172 सीटों पर समर्थन हासिल करना होगा। फिलहाल उनकी पार्टी ने 157 सांसदों के समर्थन का दावा किया है, जिसमें पीटीआई के 115, महिला रिजर्व सीट की 25, मुताहिदा मजलिस-ए-अमल (एमएमए) के 14 और 3 अल्पसंख्यक सांसद शामिल हैं। अगर इमरान खान सदन में समर्थन हासिल नहीं कर पाए तो उनके प्रधानमंत्री की दावेदारी रद्द भी हो सकती है।
'सहयोगी पार्टी' ने की दोबारा चुनाव की मांग
इमरान खान ने दावा किया है कि मुताहिदा मजलिस-ए-अमल (एमएमए) उनकी सहयोगी पार्टी है और उसके सांसद उनके समर्थन में हैं। लेकिन खबर है कि एमएमए के अध्यक्ष फजलुर रहमान ने चुनाव के नतीजों का बहिष्कार करने का फैसला किया है। एमएमए ने चुनाव में धांधली का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष तरीके से दोबारा चुनाव कराने की मांग की है। बता दें कि एमएमए ने 12 सीटें जीती हैं और उसे रिजर्व महिला कोटे की दो सीटें भी मिलेंगी।
272 में से अब तक 270 सीटों के नतीजे घोषित
पाकिस्तान चुनाव की मतगणना में 272 सीटों में से अब तक 270 सीटों के नतीजे आए हैं। इनमें पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने 115 सीटें जीती हैं, नवाज शरीफ की पाकिस्तान मुस्लिम लीग ने 64 जबकि पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) 43 सीटें जीतकर तीसरे स्थान पर है। इसके अलावा मुताहिदा मजलिस-ए-अमल (एमएमए) ने 12 सीटें, मुताहिदा कौमी मूवमेंट-पाकिस्तान ने 6 सीटें, पाकिस्तान मुस्लिम लीग और बलूचिस्तान अवाम पार्टी (बीएपी) ने 4-4 सीटें, सिंध की ग्रैंड जनतांत्रिक गठबंधन ने 2 सीटें, अन्य और निर्दलीय उम्मीदवारों ने 20 सीटें जीती हैं।
इमरान को करना पड़ेगा 2-3 हफ्तों का इंतजार
दरअसल, पाकिस्तान के चुनाव आयोग के मुताबिक, नेशनल असेंबली की सीटों पर जीत दर्ज करने वाले उम्मीदवारों को चुनाव में हुए खर्च की जानकारी देनी होती है। इसके लिए उन्हें 10 दिन का समय दिया जाता है। निर्धारित तिथि से पहले उन्हें चुनावी खर्च का ब्यौरा चुनाव आयोग के पास भेजना होता, लेकिन अगर वो इसमें देरी करते हैं तो उन पर जुर्माना भी लग सकता है। माना जा रहा है कि ये पूरी प्रक्रिया 15 अगस्त तक समाप्त हो जाएगी। इसके बाद चुनाव आयोग उम्मीदवारों के जीतने की अधिसूचना जारी करेगा। साथ ही सदन की प्रक्रिया शुरू होने में भी थोड़ी देरी होती है।
इसके अलावा, पाकिस्तान में एक नियम है कि निर्दलीय जीतने वाले उम्मीदवारों को किसी न किसी राजनीतिक दल का हाथ थामना ही पड़ता है, अन्यथा वे संसद की बैठकों में हिस्सा नहीं ले पाएंगे। इसके लिए उन्हें तीन दिन का समय दिया जाता है।
आरक्षित सीटों में किसको-कितना मिलेगा
पाकिस्तान चुनाव आयोग के नियम के मुताबिक, वहां की 70 सीटें महिलाएं और अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित होती हैं। इनमें 60 सीटें महिलाओं के लिए जबकि 10 सीटें अल्पसंख्यकों के लिए होती हैं। नियम के मुताबिक, विजेता पार्टियों को उनकी जीती हुई हर साढ़े चार सीटों के बदले एक महिला सीट दी जाती है।
ऐसे में अगर अनुमान लगाया जाए तो पीटीआई को 25 महिला सीटें मिल सकती हैं, जबकि पीएमएल-एन को 14 सीटें, पीपीपी को 9 सीटें, एमएमए को 2 सीटें और अन्य के खाते में 8 महिला सीटें आएंगी।
अगर इन सभी सीटों को जोड़ा जाए तो पीटीआई के खाते में 140 सीटें और 3 अल्पसंख्यक सीटों को मिलाकर कुल 143 सीटें होती हैं। अगर इनमें एमएमए की 14 सीटें भी जोड़ दी जाएं, फिर भी 157 सीटें ही होती हैं। अब ये तो वक्त ही बताएगा कि इमरान खान को कौन सी पार्टी समर्थन देती है और कौन से निर्दलीय उम्मीदवार उनका साथ देते हैं।