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पाकिस्तान में इंसानियत शर्मसार, 'रेप' के बदले दी 'रेप' की सजा

Thu, 27 Jul 2017 12:58 PM IST
BBC
BBC Updated Thu, 27 Jul 2017 12:58 PM IST
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Humiliation in Pakistan, 'Rep' punishment for 'rape'
rape demo pic

पाकिस्तान के मुल्तान में एक लड़की का रेप करने का आदेश देने के आरोप में करीब 20 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। लड़की के भाई पर एक अन्य लड़की का रेप करने का आरोप लगा था, जिसका बदला लेने के लिए ये 'आदेश' दिया गया। पुलिस का कहना है कि पीड़ित लड़कियों के परिवार आपस में रिश्तेदार हैं और दोनों परिवारों के लोगों ने मिलकर ये आदेश दिया।

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समाचार एजेंसी एएफपी के अनुसार पुलिस अधिकारी अल्लाह बख्श ने कहा, "जिरगा (गांव की पंचायत) ने सजा के तौर पर 16 साल की लड़की का बलात्कार करने का आदेश दिया क्योंकि लड़की के भाई ने 12 साल की एक दूसरी लड़की का बलात्कार किया था।" अधिकारी के अनुसार एक व्यक्ति ने इसी महीने ये कहते हुए जिरगा से न्याय की गुहार लगाई थी कि उसकी 12 साल की छोटी बहन का बलात्कार उसके चचेरे भाई ने किया है। इसकी सजा के तौर पर जिरगा ने आदेश दिया कि बदले में शिकायतकर्ता अभियुक्त की बहन के साथ बलात्कार करे। पुलिस का कहना है कि इस आदेश पर उसने बलात्कार किया।
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पाकिस्तान के डॉन अखबार के अनुसार लड़की को लोगों के सामने पेश होने के लिए कहा गया जिसके बाद उनके माता-पिता और सभी लोगों की मौजूदगी में उसका रेप किया गया। दोनों लड़कियों की माओं ने बाद में इसकी शिकायत पुलिस में की। मेडिकल जांच से दोनों लड़कियों के साथ बलात्कार की पुष्टि हो गई है। एक अन्य अधिकारी अहसान यूनुस ने बीबीसी उर्दू को बताया कि पहली लड़की की उम्र 12 से 14 के बीच है जबकि बदले के लिए जिसका रेप हुआ उसकी उम्र 16-17 के बीच है। उन्होंने बताया कि पुलिस ने 25 लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज की है और 12 साल की लड़की के साथ बलात्कार का अभियुक्त फरार है।

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Humiliation in Pakistan, 'Rep' punishment for 'rape'
rape

जहाँ कुछ रिपोर्टों में कहा जा रहा है कि बलात्कार का आदेश जिरगा ने दिया था, वहीं बीबीसी सूत्रों का कहना है कि इन्हीं दो परिवारों के लोगों के समूह ने ये सजा सुनाई थी। पाकिस्तान के ग्रामीण इलाकों में आपसी विवादों का निपटारा करने के लिए गांव के बड़े-बूढ़े पंचायत बनाते हैं। हालांकि ये पंचायतें गैर-कानूनी हैं और बीते सालों में ऑनर किलिंग और बदले के लिए बलात्कार की सजा सुनाने जैसे फरमानों के लिए इनकी आलोचना भी हुई है।

साल 2002 में एक जिरगा ने 28 साल की मुख्तार माई के साथ सामूहिक बलात्कार की सजा सुनाई थी। मुख्तार माई के 12 साल के भाई पर अपने से अधिक उम्र की एक महिला के साथ संबंध बनाने का आरोप लगाया गया था। मुख्तार माई ने बलात्कार करने वालों के खिलाफ कोर्ट में गुहार लगाई। पाकिस्तान में बलात्कार पीड़िता को भेदभाव की नजर से देखा जाता है और इसी कारण मुख्तार माई के इस कदम को साहस का प्रतीक माना गया।

पकिस्तान की कोर्ट ने अभियुक्तों को बरी कर दिया। जिसके बाद कई लोगों ने उन्हें देश से बाहर चले जाने की सलाह दी। लेकिन मुख्तार माई ने अपने गांव में ही रहकर वहां लड़कियों के लिए स्कूल और जहां उनका रेप हुआ था उससे थोड़ी दूरी पर महिलाओं के लिए शरणस्थली बनाने का फैसला किया। मुख्तार माई अब देश की मुख्य महिला अधिकार कार्यकर्ताओं में से एक हैं और उनकी कहानी से प्रेरित हो कर 'थंबप्रिंट' नाम से एक नाटक भी लिखा गया। इसे 2014 में न्यूयॉर्क में दिखाया गया था।

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