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पाकिस्तान में फिर धर्मांतरण, हिंदू महिला ने अपनाया इस्लाम
एजेंसी/ इस्लामाबाद
Updated Sat, 26 Aug 2017 06:02 PM IST
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- फोटो : Reuters
पाकिस्तान में इस्लाम अपनाने वाली 21 वर्षीय हिंदू महिला को पाक अदालत ने उसके मुस्लिम पति के साथ रहने की इजाजत दे दी है। हिंदू युवती ने भले ही नया धर्म अपनाने के बाद परिजनों के साथ जाने से इंकार कर दिया, लेकिन मां द्वारा अदालत से लगातार बेटी को उसे सौंपने की गुहार के बावजूद जज ने बेटी को माता-पिता के पास भेजने से इंकार कर दिया।
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इस्लामाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस शौकत अजीज सिद्दीकी ने मामले की सुनवाई करने के बाद पुलिस को आदेश दिया कि वह पति-पत्नी को पूरी सुरक्षा मुहैया कराए। पूर्व में अनुशी नाम की इस युवती ने धर्म बदलने के बाद अपना नाम मारिया रख लिया, जबकि उसके परिवार वालों ने आरोप लगाया था कि उनकी बेटी का अपहरण करके धर्म परिवर्तन कराया गया है। पाक अखबार ‘एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ के मुताबिक मारिया ने अदालत को बताया कि उसने अपनी इच्छा से धर्म बदला है और माता-पिता के साथ जाने से इंकार कर दिया।
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रिपोर्ट के मुताबिक मारिया ने अदालत में अपने धर्मांतरण को सही ठहराने के लिए अरबी ढंग से इबादत करके भी दिखाई। उसने अपने पति बिलावल अली भुट्टो के साथ रहने के लिए सुरक्षा भी मांगी। अदालत ने जब मारिया को उसके माता-पिता से मिलने को कहा तो उसने इंकार कर दिया। हालांकि अदालत के निर्देश पर जज के निजी सचिव के दफ्तर में उसने माता-पिता से 40 मिनट तक मुलाकात की। मारिया (अनुशी) की मां ने अदालत से कहा था कि उनकी बेटी उन्हें दी जाए ताकि वह उसे समझा सकें।
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मां ने आशंका जताई कि शायद भुट्टो कुछ समय बाद उनकी बेटी को मार डाले। लेकिन जस्टिस शौकत सिद्दीकी ने कहा कि उन्हें लगता है कि मारिया को उसके परिजनों के हवाले इसलिए नहीं किया जा सकता है क्योंकि हो सकता है कि उसका दोबारा धर्मांतरण करा दिया जाए। जज ने कहा कि ऐसा करने से महिला की जिंदगी मुश्किल हो जाएगी।
यह एक नया चलन है, अदालत को ध्यान देना चाहिए
पाकिस्तान में हिंदू लड़कियों का अपहरण कर उनका धर्मांतरण कराना लंबे समय से जारी है। हालांकि इसे रोकने के लिए हिंदू विवाह अधिनियम को मंजूरी दी गई है, लेकिन अब ऐसे मामले अदालत में जाते हैं जहां प्रभावशाली लोग महिला पर परिजनों की हत्या का दबाव डालकर गलत बयानी कराते हैं। पाक हिंदू परिषद के संरक्षक और पीएमएल-एन के सदस्या रमेश कुमार वंकवानी ने कहा कि यह एक नया चलन है, जिस पर कोर्ट को ध्यान देना चाहिए।