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पाकिस्तान : हिंदू धार्मिक स्थल पंज तीरथ राष्ट्रीय विरासत घोषित, खैबर पख्तूनख्वा सरकार ने की घोषणा
Fri, 04 Jan 2019 05:22 AM IST
Avdhesh Kumar
एजेंसी, पेशावर
एजेंसी, पेशावर
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Fri, 04 Jan 2019 05:22 AM IST
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इमरान खान
- फोटो : फाइल फोटो
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पाकिस्तान में प्राचीन हिंदू धार्मिक स्थल पंज तीरथ को राष्ट्रीय विरासत घोषित कर दिया गया है। खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की सरकार ने यह फैसला लिया। पंज तीरथ पांच तालाबों की वजह से प्रसिद्ध है। यहां मंदिर और खजूर के पेड़ों वाला बगीचा भी है। अल्पसंख्यकों को बराबरी का दर्जा दिलाने के प्रधानमंत्री इमरान खान के वादे के बीच यह घोषणा की गई है।
अब इस ऐतिहासिक स्थल के पांचों तालाब चचा यूनुस पार्क और खैबर पख्तूनख्वा चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की सीमा में आ गए हैं। प्रांत के डायरेक्टरेट ऑफ आर्कियोलॉजी एंड म्यूजियम ने अधिसूचना जारी कर पंज तीरथ को एक ऐतिहासिक विरासत घोषित किया। इस राष्ट्रीय विरासत को नुकसान पहुंचाने वाले को 20 लाख रुपये जुर्माना और पांच साल जेल का भी प्रावधान है।
महाभारत काल से संबंध
इस जगह का संबंध महाभारत काल के पांडु से है। हिंदू कार्तिक महीने में इन तालाबों में स्नान करने आते थे और दो दिनों तक खजूर के पेड़ों के नीचे पूजा अर्चना करते थे। 1747 में अफगान दुर्रानी वंश के दौरान इस ऐतिहासिक जगह को नुकसान पहुंचा। हालांकि, बाद में 1834 में सिख शासन के दौरान स्थानीय हिंदुओं ने इसे फिर से बनवाया और यहां एक बार फिर पूजा शुरू की गई।
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अब इस ऐतिहासिक स्थल के पांचों तालाब चचा यूनुस पार्क और खैबर पख्तूनख्वा चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की सीमा में आ गए हैं। प्रांत के डायरेक्टरेट ऑफ आर्कियोलॉजी एंड म्यूजियम ने अधिसूचना जारी कर पंज तीरथ को एक ऐतिहासिक विरासत घोषित किया। इस राष्ट्रीय विरासत को नुकसान पहुंचाने वाले को 20 लाख रुपये जुर्माना और पांच साल जेल का भी प्रावधान है।
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महाभारत काल से संबंध
इस जगह का संबंध महाभारत काल के पांडु से है। हिंदू कार्तिक महीने में इन तालाबों में स्नान करने आते थे और दो दिनों तक खजूर के पेड़ों के नीचे पूजा अर्चना करते थे। 1747 में अफगान दुर्रानी वंश के दौरान इस ऐतिहासिक जगह को नुकसान पहुंचा। हालांकि, बाद में 1834 में सिख शासन के दौरान स्थानीय हिंदुओं ने इसे फिर से बनवाया और यहां एक बार फिर पूजा शुरू की गई।
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