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पाकिस्तान की कृष्णा कोहलीः एक हिंदू मजदूर की बेटी जो बनी सीनेट की उम्मीदवार

Thu, 08 Feb 2018 01:09 PM IST
बीबीसी, हिन्दी
बीबीसी, हिन्दी Updated Thu, 08 Feb 2018 01:09 PM IST
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hindu labour daughter krishna kohli became senate candidate at pakistan
कृष्णा कोहली

पाकिस्तान में बड़े पदों पर हिंदू चेहरे कम ही दिखाई देते हैं, खासकर महिलाओं की मौजूदगी तो न के बराबर ही है। लेकिन शायद अब इस लिस्ट में कृष्णा कोहली का नाम जुड़ जाए। वे अल्पसंख्यक समुदाय की तरफ से सीनेट की मेंबरशिप के लिए दावा कर रही हैं।

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पाकिस्तान के थरपारकर से संबंध रखने वालीं कृष्णा कोहली ने बुधवार को सीनेट चुनावों के लिए पाकिस्तानी चुनाव आयोग में अपनी उम्मीदवारी का पर्चा भर दिया है। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी ने कृष्णा कोहली को सिंध क्षेत्र से सामान्य श्रेणी में उम्मीदवार नामजद किया है।
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कृष्णा जब अपने दस्तावेज जमा कराने चुनाव आयोग के दफ्तर में दाखिल हुईं तो वो अलग सी नज़र आ रहीं थीं। कृष्णा कोहली ने बीबीसी को बताया कि पाकिस्तान के इतिहास में वो थरपारकर इलाके की पहली महिला हैं जिन्हें संसद तक पहुंचने का मौका मिल रहा है। वो कहती हैं, "मैं इस समय बिलावल भुट्टों का जितना शुक्रिया अदा करूं कम है।"
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कृष्णा कोहली थरपारकर इलाके के एक गांव से हैं। उनके दादा रूपलो कोहली ने 1857 में अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ होने वाली आज़ादी की जंग में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया था। आज़ादी की इस लड़ाई के ख़त्म होने के कुछ महीने बाद ही उन्हें फांसी पर लटका दिया गया था।

बीबीसी से बात करते हुए उन्होंने बताया कि थरपारकर में ज़िंदगी बहुत मुश्किल से गुज़रती है क्योंकि वहां साल दर साल सूखा पड़ता रहता है जो बहुत कुछ सुखा देता है। कृष्णा कोहली का संबंध एक ग़रीब परिवार से है। उन के पिता जुगनू कोहली एक जमींदार के यहां मजदूरी करते थे और काम न होने की वजह से अकसर अलग-अलग इलाक़ों में काम की तलाश में जाया करते थे।

"मेरे पिता को उमरकोट के जमींदार ने कैद कर लिया और हम तीन साल तक उनकी कैद में रहे। मैं उस वक़्त तीसरी क्लास में पढ़ती थी।" "हम किसी रिश्तेदार के पास नहीं जा सकते थे न किसी से बात कर सकते थे। बस उनके कहने पर काम करते थे और उनके कहने पर वापस क़ैद में चले जाते थे।"

कृष्णा कोहली केशूबाई के नाम से भी जानी जाती हैं। उनकी शादी सोलह साल की उम्र में कर दी गई थी लेकिन वो बताती हैं कि उनके शौहर उनकी पढ़ाई में मददगार साबित हुए। कृष्णा ने सिंध यूनिवर्सिटी से समाजशास्त्र में मास्टर्स की डिग्री हासिल की और पिछले बीस साल से थर में लड़कियों की तालीम और सेहत के लिए जद्दोजहद कर रही हैं।

"थर में गर्भवती महिलाओं की जिंदगी बहुत मुश्किल है और मैं संसद में आने के बाद उनके लिए जरूर काम करना चाहूंगी।" उम्मीदवारी के दस्तावेज जमा करने के बारे में उन्होंने बताया कि उनको पीपीपी के नेता सरदार शाह ने मशविरा दिया कि वो दस्तावेज जरूर जमा करें।


"मैंने इससे पहले भी पीपीपी के साथ काम किया है। 2010 के यौन उत्पीड़न के खिलाफ बिल से लेकर 18वें संशोधन की बहाली तक हमने एक साथ काफी जगहों पर काम किया है। मैं औरतों की सेहत और तालीम के लिए जो प्लेटफॉर्म चाहती थी वो मुझे आखिरकार मिल गया है। मेरी ख्वाहिश है कि मैं उम्मीदें पूरी कर पाऊं।"

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