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'शरीफ' के जीवन का सियासी रोलरकोस्टर, शुरू से अंत तक..

Sat, 14 Jul 2018 12:48 AM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Sat, 14 Jul 2018 12:48 AM IST
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Highs and lows of Nawaz Sharif’s political career in Pakistan
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और उनकी बेटी मरियम को शुक्रवार रात 9.50 बजे (भारतीय समयानुसार) लंदन से लाहौर हवाईअड्डे पहुंचते ही गिरफ्तार कर लिया गया। इस दौरान भ्रष्टाचार रोधी संस्था नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो (नैब) का 16 सदस्यीय दल भी मौजूद रहा। इसके बाद उन्हें रावलपिंडी की अदियाला जेल ले जाया गया। 6 जुलाई को भ्रष्टाचार के एक मामले में शरीफ को 10 साल, जबकि मरियम को 7 साल की सजा सुनाई गई थी। सजा सुनाए जाने के दौरान दोनों लंदन में थे। 
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गिरफ्तारी से पहले पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के प्रमुख शरीफ ने अपने समर्थकों पर हुई कठोर कार्रवाई को लेकर चुनावों की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाया। लंदन से लौटने के दौरान 68 वर्षीय नवाज और मरियम अबू धाबी में करीब ढाई घंटे रुके। 25 जुलाई को होने जा रहे आम चुनाव से ऐन पहले शरीफ और मरियम के लंदन से पाकिस्तान पहुंचकर गिरफ्तारी देने को चुनावी स्टंट माना जा रहा है। हालांकि उन्होंने इसे जनता के लिए कुर्बानी करार दिया है। उनकी पार्टी मान रही है कि इस गिरफ्तारी से चुनाव में बड़ा फायदा मिलेगा। वहीं तहरीक ए इंसाफ के इमरान खान का दावा है कि चुनाव में इससे उनकी पार्टी को लाभ मिलेगा। 
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पहले पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने नवाज शरीफ को तगड़ा झटका दिया। कोर्ट के एक फैसले के बाद अब पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ आजीवन किसी भी सार्वजनिक पद पर आसीन नहीं हो पाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर किसी शख्स को संविधान की धारा 62 (1)(एफ) के तहत अयोग्य करार दिया गया है तो वह शख्स आजीवन अयोग्य रहेगा।
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मियां मोहम्मद नवाज शरीफ पाकिस्तान के पहले ऐसे नेता बने थे जिन्होंने 5 जून 2013 को तीसरी बार 27वें प्रधानमंत्री का पद संभाला। 2016 में पानमा पेपर लीक में नाम आने के बाद 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री के पद के लिए उन्हें अयोग करार दिया। 28 जुलाई 2017 में नवाज शरीफ को प्रधानमंत्री के पद से हटाना पड़ा, नवाज शरीफ को वर्ष 2000 में तत्कालीन सैन्य शासक मुशर्रफ ने देश निकाला (निर्वासित) कर दिया था। 

2013 में बहुमत प्राप्त करने के बाद पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) पार्टी वर्तमान में सत्ता में है, पार्टी पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में भी शासन करती है। नवाज शरीफ के बाद अब उनके भाई शाहबाज पार्टी के अध्यक्ष हैं। लेकिन शरीफ को आखिर किन परिस्थियों के चलते पार्टी की बागडोर छोड़नी पड़ी ये जान लीजिए। नवाज की पार्टी बनने से लेकर उन पर आफत का पहाड़ टूटने की ये पूरी कहानी पढ़िए..

इसके पहले उनकी निर्वाचित सरकार को भी बर्खास्त कर दिया गया था। इस तख्तापलट के बाद पाकिस्तान की आतंक-विरोधी अदालत ने नवाज शरीफ को भ्रष्टाचार के अपराध में दोषी करार दिया था। सऊदी अरब की मध्यस्तता से शरीफ को जेल से बचाकर सऊदी अरब के जेद्दा नगर में निर्वासित किया गया।

अगस्त 23, 2007 में सुप्रीम कोर्ट ने शरीफ को पाकिस्तान वापस आने की इजाजत दी। सितंबर 10, 2007 को शरीफ सात सालों के निर्वासन के बाद इस्लामाबाद वापस लौटे, पर उन्हें हवाई-अड्डे से ही तुरंत जेद्दा वापस भेज दिया गया।

'शरीफ' जीवन-

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1976: शरीफ पाकिस्तान मुस्लिम लीग में शामिल हुए।
1980: पंजाब (पाकिस्तान) के वित्त मंत्री बन गए शरीफ।
1981: पंजाब सलाहकार बोर्ड में शामिल हो गए और जनरल जिया-उल-हक से नजदीकी बढ़ी।
1985: पंजाब के मुख्यमंत्री बना दिए गए शरीफ।
1988: दो मुस्लिम लीग में पाकिस्तान मुस्लिम लीग का विभाजन - फीदा और जुनेजा गुट। फीदा को नवाज ने लीड किया। 
1990: नवाज शरीफ 1 नवंबर को पाकिस्तान के 12वें प्रधानमंत्री बने।
1992: कराची में ऑपरेशन 'क्लीन-अप' चलाया
1993: शरीफ ने पद से इस्तीफा दिया और आम चुनाव में अपनी हार स्वीकार की। 
1994-1995: प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो के खिलाफ मुर्तजा भुट्टो के साथ साझेदारी में "ट्रेन मार्च" निकाला।
1997: पीएमएल-एन ने आम चुनावों में भारी जीत हासिल की, नवाज दूसरी बार प्रधान मंत्री बने।
1998: नवाज शरीफ सरकार ने भारत के खिलाफ चघाई में परमाणु परीक्षण का आदेश दिया।
1999: सेना के जनरल ऑफिसर जनरल जहांगीर करमट को बर्खास्त कर दिया गया और उनके स्थान पर जनरल परवेज मुशर्रफ को नियुक्त किया गया।

शरीफ ने कारगिल में सेना की योजना के बारे में कोई जानकारी नहीं दी थी। 
 

जन्म 

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25 दिसंबर, 1949 में लाहौर के एक व्यवसायी परिवार में पैदा हुए। 1947 उनके पिता मुहम्मद शरीफ अमृतसर से पाकिस्तान चले गये थे। उनकी शिक्षा लाहौर के सेंट एंथनी स्कूल व गवर्नमेंट कॉलेज यूनिवर्सिटी लाहौर से हुई।

राजनीति में एंट्री

1976 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो ने उनके स्टील के व्यवसाय का राष्ट्रीयकरण कर दिया। इसके बाद वे सक्रिय राजनीति में आए और जियाउल हक के काफी करीब रहे। जिया उल हक ने उन्हें 1981 में पंजाब का वित्त मंत्री बनाया फिर 1985 में वे पंजाब के मुख्यमंत्री बनाए गए।

राष्ट्रीय राजनीति में जमाए पैर

अगस्त 1988 में जियाउल हक की मौत के बाद जिया समर्थकों का नेतृत्व शरीफ ने किया। नवंबर 1988 में हुए चुनाव में बेनजीर भुट्टो ने जीत हासिल की, और शरीफ नेता प्रतिपक्ष बने।
 

पहली बार बने प्रधानमंत्री

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एक नवंबर, 1990 में पहली बार देश के प्रधानमंत्री बने। लेकिन सेना के हस्तक्षेप के बाद शरीफ ने जुलाई 1993 में अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसी वर्ष हुए चुनाव में बेनजीर दूसरी बार सत्ता में आई शरीफ नेता विपक्ष बने।

दोबारा मिला मौका

1997 का आम चुनाव जीतकर दूसरी बार प्रधानमंत्री बने। शरीफ ने 28 व 30 मई 1998 में दो परमाणु विस्फोट कर पाकिस्तान को इस ताकत से लैस देशों की सूची में शामिल किया।

तख्तापलट 

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सेना प्रमुख परवेज मुशर्रफ और इनके बीच बढ़ती तनातनी के चलते एक नाटकीय घटनाक्रम के तहत सेना ने इनका तख्तापलट कर दिया।

देश निकाला

मिलिट्री शासन में शरीफ पर मुकदमा चला और उन्हें मौत की सजा देने की तैयारी कर ली गई। इसकी भनक मिलते ही सउदी किंग फहद और बिल क्लिंटन ने सेना पर दबाब डाला, और उन्हें दस साल के लिए देश से निर्वासित कर दिया गया। 2007 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद वे देश वापस लौटे।
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