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हाफिज सईद का नया पैंतरा, भारत-अमेरिका समझौते को बताया मुस्लिमों के लिए खतरा
टीम डिजिटल / अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 07 Sep 2016 11:41 PM IST
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फाइल फोटोः हाफिज सईद लगातार कश्मीर मुद्दे पर बयानबाजी कर रहा है।
- फोटो : Getty Images
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मुंबई आतंकी हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद ने भारत और अमेरिका के बीच हुए हालिया रक्षा समझौते को पाकिस्तान और मुस्लिम जगत के खिलाफ बताया है।
जमात-उद-दावा के मुखिया हाफिज सईद बुधवार को दिए एक बयान में कहा कि “अमेरिका को चीन से परेशानी है और भारत को पाकिस्तान से, ऐसे में चीन, पाकिस्तान आर्थिक गलियारे को लेकर दोनों देशों के हित एक हो गए हैं।
हाफिज यहीं नहीं रुका उसने आगे कहा कि भारत-अमेरिका के बीच हुआ हालिया समझौता पाकिस्तानी हितों, चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे या कहें पूरे मुस्लिम जगत के लिए खतरा है।
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जमात-उद-दावा के मुखिया हाफिज सईद बुधवार को दिए एक बयान में कहा कि “अमेरिका को चीन से परेशानी है और भारत को पाकिस्तान से, ऐसे में चीन, पाकिस्तान आर्थिक गलियारे को लेकर दोनों देशों के हित एक हो गए हैं।
हाफिज यहीं नहीं रुका उसने आगे कहा कि भारत-अमेरिका के बीच हुआ हालिया समझौता पाकिस्तानी हितों, चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे या कहें पूरे मुस्लिम जगत के लिए खतरा है।
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समझौते के बाद दोनों देशों की सेनाएं कर सकेंगी एक-दूसरे का सहयोग
मनोहर पर्रिकर
- फोटो : अमर उजाला
भारत और अमेरिका के बीच अगस्त के आखिरी सप्ताह एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ। जिसके अंतर्गत दोनों देशों के बीच रक्षा से जुड़े माल ढुलाई गठजोड़ को मजबूती मिलेगी। इस समझौते से दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे की संपत्तियों और जमीन का इस्तेमाल रक्षा मजबूती के लिए कर सकेंगी।
द्विपक्षीय लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (एलईएमओए) पर हस्ताक्षर का स्वागत करते हुए रक्षा मंत्री मनोहर परिकर और अमेरिकी रक्षा मंत्री एश्टन कार्टर ने कहा था कि यह समझौता दोनों देशों को व्यावहारिक अभ्यास और परस्पर आदान-प्रदान का अवसर प्रदान करेगा। लिमोआ (एलईएमओए) समझौते के अंतर्गत अमेरिकी और भारतीय सेनाओं के बीच प्रतिपूर्ति आधार पर लॉजिस्टिक सहयोग होगा। दोनों देश एक दूसरे को सप्लाई और सेवा की सुविधा प्रदान करेंगे और इनके संचालन की रूपरेखा तय करेगा।
समझौते पर हस्ताक्षर के बाद जारी एक साझा बयान में कहा गया, ‘दोनों देश इस बात से सहमत थे कि इस महत्वपूर्ण समझौते से दोनों सेनाओं को रक्षा प्रौद्योगिकी के अभिनव और उन्नत अवसर मिलेंगे। अमेरिका ने भारत के साथ रक्षा व्यापार एवं प्रौद्योगिकी की साझेदारी बढ़ाने पर भी सहमति जताई क्योंकि भारत उसका सबसे करीबी भागीदार बन चुका है।’
द्विपक्षीय लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (एलईएमओए) पर हस्ताक्षर का स्वागत करते हुए रक्षा मंत्री मनोहर परिकर और अमेरिकी रक्षा मंत्री एश्टन कार्टर ने कहा था कि यह समझौता दोनों देशों को व्यावहारिक अभ्यास और परस्पर आदान-प्रदान का अवसर प्रदान करेगा। लिमोआ (एलईएमओए) समझौते के अंतर्गत अमेरिकी और भारतीय सेनाओं के बीच प्रतिपूर्ति आधार पर लॉजिस्टिक सहयोग होगा। दोनों देश एक दूसरे को सप्लाई और सेवा की सुविधा प्रदान करेंगे और इनके संचालन की रूपरेखा तय करेगा।
समझौते पर हस्ताक्षर के बाद जारी एक साझा बयान में कहा गया, ‘दोनों देश इस बात से सहमत थे कि इस महत्वपूर्ण समझौते से दोनों सेनाओं को रक्षा प्रौद्योगिकी के अभिनव और उन्नत अवसर मिलेंगे। अमेरिका ने भारत के साथ रक्षा व्यापार एवं प्रौद्योगिकी की साझेदारी बढ़ाने पर भी सहमति जताई क्योंकि भारत उसका सबसे करीबी भागीदार बन चुका है।’