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आजादी से घूमना ही मेरा स्टाइल है: हाफिज
Updated Fri, 08 Feb 2013 04:11 PM IST
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अमेरिका के जाने माने अखबार 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' को दिए इंटरव्यू में हाफिज सईद ने कहा है कि वो एक आम आदमी की तरह घूमते फिरते हैं और उनकी किस्मत ऊपर वाले के हाथ में है, न कि अमेरिका के हाथों में।
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हाफिज मुहम्मद सईद प्रतिबंधित लश्कर-ए-तैबा के संस्थापक हैं और जमात उद दावा के मुखिया भी। इंटरव्यू में हाफिज सईद ने ये भी कहा कि पाकिस्तानी अदालतों ने उन्हें दोषी नहीं पाया है तो ऐसे में अमेरिका क्यों पाकिस्तान की न्यायिक प्रणाली की इज्जत नहीं करता है।
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द न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपने लेख में हाफिज सईद के पाकिस्तान में खुला घूमने पर कड़ा सवाल उठाया है। अखबार ने लिखा है कि लाहौर में हाफिज सईद पूरी आजादी के साथ जीवन जी रहा है।
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अखबार ने 'पाकिस्तानी चरमपंथी, सर पर बोली, लेकिन आजादी का जीवन' के शीर्षक से प्रमुखता से छपे लेख में टिपण्णी की है, "शायद लाहौर में एक करोड़ डॉलर ले ज्यादा कुछ खरीदा नहीं जा सकता है। ये वहीं रकम है जो अमेरिका ने हफीज सईद को सजा दिलवाने के लिए पेशकश की है।
दोराहे पर लश्कर
साल 2008 में मुंबई में हमलों के लिए भारत लशकरे तैबा को जिम्मेदार ठहराता रहा है जिसमें मारे गए थे। इनमें छह अमरीकी भी थे।
'द न्यूयॉर्क टाइम्स अखबार में डेक्लन वॉल्श ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, "सईद का आजादी से घूमना उन पर रखे अमेरिकी नाम का अपमान भर नहीं है। दरअसल लश्कर एक दोराहे पर खड़ा है जहा उसे फैसला करना है कि अफग़ानिस्तान से अमेरिकी फौज के जाने के बाद उसे क्या करना है- पश्चिम से लड़ाई जारी रखना है, राजनीतिक प्रक्रिया में शामिल होना है या फिर कश्मीर में बंदूक उठाना है और ये सब हाफिज़ सईद पर निर्भर करता है।"
संयुक्त राष्ट्र ने भी हाफिज सईद को आतंकवादियों की सूची में रखा है और उनकी संस्था पर प्रतिबंध लगाया है। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक लाहौर में हाफिज सईद की रक्षा सिर्फ उनके निजी गार्ड ही नहीं बल्कि पुलिस भी कर रही है। अखबार लिखता है कि सईद से मिलने के लिए लोगों को पुलिस चेक कर रही थी और उनके घर के बाहर भी पुलिस का पहरा था।
न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा कि पश्चिमी खुफिया अधिकारी कहते हैं कि उत्तरी पाकिस्तान में लश्कर के प्रशिक्षण शिविर अभी भी चल रहे हैं। इन्हीं शिविरों में डेविड हेडली को ट्रेनिंग मिली थी जिसे मुंबई हमलों में उनकी भूमिका के लिए अमेरिकी अदालत ने कड़ी सजा सुनाई है।