भूकंप के बाद क्या है पाकिस्तान, अफगानिस्तान का हाल?
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सोमवार को आए भूकंप में पाकिस्तान और अफगानिस्तान में 260 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। इस्लामाबाद में मौजूद बीबीसी संवाददाता आसिफ फारूकी ने बताया है कि इस भूकंप से सबसे ज्यादा नुकसान की खबर उत्तरी पाकिस्तान से आ रही है।
शुरू में ऐसा लग रहा था कि यह छोटा झटका है लेकिन फिर यह तेज हो गया। ऐसा लग रहा था पैरों के नीचे से जमीन सरक रही है और आसपास की गाड़ियां तेजी से हिलने लगीं। लोग काफी घबराए हुए थे।
उत्तरी पाकिस्तान में 214 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। यहां के खैबर पख्तुन्ख्वा प्रांत में ही 179 लोगों की मौत की खबर है जबकि 1800 से ज्यादा लोग घायल हैं।
अफगानिस्तान में नुकसान का अंदाजा नहीं लग पाया
पाकिस्तान के सूचना मंत्री परवेज राशिद ने कहा है कि फिलहाल लोगों को बचाना उनकी प्राथमिकता है और इसके लिए बिना रुके राहत का काम जारी है। पाकिस्तानी सेना और कई सरकारी विभागों के अलावे कुछ एनजीओ भी राहत के काम में लगे हुए हैं।
दूसरी तरफ अफगानिस्तान में हुए वास्तविक नुकसान का कोई अंदाजा नहीं लग पाया है।
अफगानिस्तान के दूर दराज के पहाड़ी इलाकों में राहत दल को भेजा जा रहा है। अफगानिस्तान में एक स्कूली इमारत में भूकंप के बाद भगदड़ मचने से कम से कम 12 स्कूली छात्राओं की मौत हो गई है। कुछ छात्राओं की स्थिति गंभीर बताई जा रही है।
भूकंप का केन्द्र हिन्दूकुश की पहाड़ियों में
बीबीसी पश्तो सेवा के सईद अनवर ने बताया, "भूकंप के समय मैं दफ्तर में ही मौजूद था। जब मैं बाहर की तरफ भागा तो देखा कि सारे लोग सड़कों पर आ गए हैं। ऐसा लग रहा था कि सारी इमारतें गिर जाएंगीं। कई इमारतों में दरार आ गई है और लोग अपने घरों में जाने से डर रहे हैं।"
उनके मुताबिक अफगानिस्तान के मुख्य कार्यकारी अबदुल्लाह अबदुल्लाह ने तुरंत ही एक आपातकालीन बैठक बुलाई और मारे गए और घायलों के लिए तुरंत ही राहत कार्य शुरू करने का आदेश दिया। इसके अलावे सभी प्रभावित इलाकों के गवर्नर को अलर्ट कर दिया गया है।
भूकंप का केन्द्र अफगानिस्तान के फैजाबाद इलाके में हिन्दूकुश की पहाड़ियों में था। अफगानिस्तान के अलावे पाकिस्तान के उत्तरी पहाड़ी इलाकों चितराल, मालाकंड और फाटा में इस भूकंप का सबसे ज्यादा असर देखा जा रहा है।
यह काफी दुर्गम पहाड़ी इलाका है और यहां पहुंचना बहुत मुश्किल है। कई इलाकों में सड़कें टूट चुकी हैं इसलिए वास्तविक नुकसान का अंदाजा लगा पाना मुश्किल है। दूसरी तरफ यहां तालिबान के कब्जे वाले इलाकों में राहत कार्य शुरू करने में भी काफी परेशानी हो रही है।
भारत, ईरान, अमेरिका ने की मदद की पेशकश
न्यूयॉर्क में कोलंबिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर लियोनार्डो सिवर ने बीबीसी को बताया कि पाकिस्तान के उत्तरी पहाड़ी इलाकों में पहुंचना काफी मुश्किल है। यहां लगातार चट्टान खिसक कर गिरते रहते हैं और इलाके में एक-दूसरे से संपर्क करने के लिए टेलीफोन भी मुश्किल से मिल पाता है।
भारत, ईरान और अफगानिस्तान में मौजूद अमरीकी सेना ने अफगान सरकार को मदद देने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि स्थानीय अधिकारियों ने अभी तक इस तरह का कोई अनुरोध नहीं किया है।
बीबीसी के विज्ञान संवाददाता के जोनाथन वेब के मुताबिक इस भूकंप की तीव्रता 7.5 थी और यह काफी शक्तिशाली भूकंप था। लेकिन इसका केन्द्र धरती की सतह से काफी गहराई में था इसलिए उस तरह का नुकसान नहीं हुआ है, जैसा कि अप्रैल में नेपाल में आए 7.8 तीव्रता के भूकंप में हुआ था। नेपाल के भूकंप का केन्द्र धरती की सतह से केवल 8 किलोमीटर नीचे था।
..इसलिए आ रहा है हिमालयी इलाके में लगातार भूकंप
अमरीकी भू विज्ञान केन्द्र के मुताबिक अफगानिस्तान के इस भूकंप का केन्द्र सतह से 76 किलोमीटर की गहराई में था। इस इलाके में महाद्विपीय विस्थापन की वजह से बार-बार भूकंप आता है।
यहां भारतीय पठार उत्तर की तरफ खिसककर यूरेशियन पठार से टकराता है. दोनों पठार हर साल एक-दूसरे की तरफ चार से पांच सेंटीमीटर तक खिसक रहे हैं, जिससे दोनों के बीच टक्टर होती है। इसलिए इस इलाके में बडे़ भूकंपों का पुराना इतिहास रहा है।
यहां 2005 में पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में भूकंप से 75000 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। जबकि इसी साल अप्रैल में आए एक भूकंप में नेपाल में 9000 लोगों की मौत हुई थी और करोडों की संपत्ति का नुकसान हुआ था।