फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Pakistan ›   crisis over film releases in pakistan

नई फ़िल्मों को तरसता पाकिस्तान

Wed, 31 Oct 2012 12:37 PM IST
Updated Wed, 31 Oct 2012 12:37 PM IST
विज्ञापन
crisis over film releases in pakistan
सिनेमा घरों को ईद पर पुरानी फ़िल्में दिखानी पड़ीं। इस बार ईद पर सिर्फ एक
विज्ञापन
नई फ़िल्म 'शेर दिल' रिलीज की गई और ये फ़िल्म भी क्षेत्रीय भाषा पंजाबी में बनी है।

पाकिस्तान में ईद के मौके पर नई फ़िल्में रिलीज करने का चलन दम तोड़ रहा है। नई फ़िल्मों की किल्लत के कारण इस बार सिनेमा घरों को ईद पर पुरानी फ़िल्में दिखानी पड़ीं। इस बार ईद पर सिर्फ एक नई फ़िल्म 'शेर दिल' रिलीज की गई और ये फ़िल्म भी क्षेत्रीय भाषा पंजाबी में बनी है।

ईद पर सिनेमा के शौकीनों को हमेशा नई फ़िल्मों का इंतजार रहता है और इस मौके पर आम तौर पर चार से छह नई फ़िल्में आती हैं। लेकिन इस बार ईद के दिन सिनेमा घरों को पुरानी फ़िल्मों से ही काम चलाना पड़ा। सिनेमा मालिकों के मुताबिक वो चार से पांच नई फ़िल्मों की उम्मीद कर थे लेकिन उन्हें मायूसी ही हाथ लगी।
विज्ञापन


फ़िल्मों का सूखा

ईद का त्योहार सिनेमा मालिकों के लिए भी मुनाफा कमाने का समय होता है, इसलिए उनकी कोशिश होती है कि ईद पर उन्हें अच्छी फ़िल्में मिल जाएं। पाकिस्तान एग्जीबिटर संघ के प्रमुख जौजीर लाशारी कहते हैं, “ईद जैसे त्योहार पर फ़िल्मों की किल्लत की वजह से कुछ सिनेमा मालिक ज्यादा पैसे देकर फ़िल्म हासिल कर लेते हैं और जिन्हें फ़िल्म नहीं मिलती, उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है।”
विज्ञापन
विज्ञापन


पिछली ईद यानी ईद उल फितर पर रिलीज हुई पंजाबी फ़िल्में ‘शरीका’ और ‘गुज्जर दा खड़ाक’ से ही बहुत से सिनेमा घरों को ईद उल अजहा पर काम चलाना पड़ा। ईद पर पुरानी फ़िल्म दिखाने वाले एक सिनेमा घर के सहायक मैनेजर गोशी बट का कहना है कि उनके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं है और मजबूरी में पुरानी फ़िल्म चला रहे हैं।

बट के अनुसार नई फ़िल्म न मिलने से उन्हें बहुत नुकसान हुआ क्योंकि ज्यादातर लोग नई फ़िल्म ही देखना चाहते हैं जबकि पुरानी फ़िल्म इस तरह का कारोबार नहीं करती है। लाहौर के पॉश इलाकों में स्थित दो सिनेमा घरों में ईद पर दो भारतीय फ़िल्में ‘चक्रव्यूह’ और ‘रश’ दिखाई गईं। कई और सिनेमा घरों में भी इन फ़िल्मों को दिखाया गया।

भारतीय फ़िल्मों पर तनातनी

फ़िल्मकार अयाज कामरान चौधरी का कहना है कि जब से भारतीय फ़िल्में पाकिस्तानी सिनेमा घरों में दिखाई जाने लगी हैं, तब से पाकिस्तानी फ़िल्मों के लिए अच्छे सिनेमा घर नहीं मिल पाते हैं। ऐसी सूरत में एक नई फ़िल्म आना भी गनीमत है। वैसे सिनेमा घर मालिक इस राय से सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि अगर देश में अनाज की कमी होती है तो उसे पूरा करने के लिए विदेश से अनाज मंगाया जाता है। इसलिए पाकिस्तान में फ़िल्में न बन पाने की वजह से भारतीय फ़िल्में आ रही हैं।


लाहौर के एक पुराने और मशहूर सिनेमा घर के मालिक मिर्जा जहानजीब बेग का कहना है कि सिनेमा घरों को कुछ न कुछ तो चलाना है। पाकिस्तानी फ़िल्में न होने की वजह से भारतीय फ़िल्में दिखाई जा रही हैं। फ़िल्म आलोचक और पत्रकार सैफुल्लाह सपरा का कहना है कि ईद ऐसा त्योहार है जब लोग मनोरंजन के लिए पुरानी फ़िल्में देखने भी सिनेमा घर चले जाते हैं। लेकिन वो मानते हैं कि ईद पर पुरानी फ़िल्में दिखाने का नुस्खा ज्यादा दिन चलने वाला नहीं है। सिनेमा मालिकों का कहना है कि नई फ़िल्में बनाई जानी चाहिए वरना देश में जो सिनेमा घर बचे हैं, वो भी अतीत का हिस्सा बन जाएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news, Crime all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed