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पता नहीं यहाँ कब मौत आ गिरे

Thu, 13 Dec 2012 10:53 AM IST
Updated Thu, 13 Dec 2012 10:53 AM IST
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common people are dying in drone strikes in Pakistan

पाकिस्तान का वज़ीरिस्तान इलाक़ा तालिबान और अल क़ायदा का गढ़ माना जाता है, इस इलाक़े में अमरीका लगातार ड्रोन हमले करता रहता है।

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अमरीका का दावा है कि इन ड्रोन हमलों की वजह से चरमपंथी कमज़ोर पड़े हैं मगर स्थानीय लोगों का ये भी कहना है कि इन हमलों में अक्सर निर्दोष नागरिक मारे जाते हैं।
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अक्तूबर में उत्तरी वज़ीरिस्तान के मीरानशाह में एक ड्रोन हमला हुआ, दस साल की नबीला उर रहमान ने उस हमले को अपनी आँखों से देखा था।

नबीला ने बीबीसी संवाददाता जेन कॉर्बिन को बताया कि उस वक़्त उसकी दादी घर के बाहर सब्ज़ियाँ तोड़ रही थीं। नबीला ने बताया, "मैं अपनी गाय को चारा दे रही थी, मेरी दादी पास ही में थी, मिसाइल हमारे पीछे आकर गिरी, हम घर के अंदर भागे, दादी बाहर थी, एक दूसरी मिसाइल आकर उसे लगी और उसकी मौत हो गई।"
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नबीला के पिता रफ़ीक ने वो जगह दिखाई जहाँ मिसाइलें गिरी थीं, वहीं अब उनकी माँ की कब्र है।

इस कबायली इलाक़े में सच का पता लगाना आसान काम नहीं है। एक स्थानीय अख़बार ने ख़बर छापी थी कि इसी ड्रोन हमले में दो चरमपंथी मारे गए थे मगर रफ़ीक इसे ग़लत बताते हैं।

रफ़ीक ने कहा, "हमारे घर में कोई मिलिटेंट नहीं था, इस इलाक़े में सरकारी लोग रहते हैं, स्कूल के टीचर रहते हैं।"

अमरीकी रवैया
ड्रोन को हज़ारों किलोमीटर दूर, अमरीका से चलाया जाता है, अमरीका इन आरोपों को ग़लत बताता है ड्रोन से अंधाधुंध हमले किए जाते हैं।

अमरीकी मिलिटरी इंटेलिजेंस के पूर्व प्रमुख डेनिस ब्लेयर कहते हैं कि ड्रोन के इस्तेमाल पर कड़ा नियंत्रण है।

ब्लेयर कहते हैं, "अमरीकी ड्रोन के इस्तेमाल के नियम उतने ही सख़्त हैं जितने किसी और घातक हथियार के, बल्कि कई मामलों में तो ड्रोन के इस्तेमाल पर अधिक नियंत्रण है, कई परंपरागत हथियारों की तुलना में ड्रोन ज़्यादा सटीक और बेहतर नियंत्रित है"।


मगर पाकिस्तान की सरकार ड्रोन हमलों को ग़ैर-क़ानूनी बताती है, और उसके ऊपर राजनीतिक दबाव है कि वह इन हमलों को रुकवाए।

बीबीसी से विशेष बातचीत में पाकिस्तान की विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार ने कहा, "हम अमरीका की सरकार से इस मामले में गंभीरता से बात कर रहे हैं ताकि ड्रोन हमले बंद हों, मुझे पूरा विश्वास है कि इस मामले में हम किसी सहमति पर पहुँच सकते हैं"।

डेनिस ब्लेयर सहित कई अमरीकी भी अब मानने लगे हैं कि ड्रोन हमले पाकिस्तान के मामले में कितने कारगर हैं इसका जायज़ा लिया जाना चाहिए।

ब्लेयर कहते हैं, "हम जो कर रहे हैं अगर करते रहेंगे तो हमें वही नतीजे मिलेंगे जो अभी मिल रहे हैं, इस तरह हम अगले दस साल तक यही कर रहे होंगे, हम अल क़ायदा के छोटे-मोटे लोगों को मारते रहेंगे और बदले में लोगों में ग़ुस्सा पैदा करते रहेंगे।"

जो मासूम नागरिक इस लड़ाई में फँसे हुए हैं वो तो सिर्फ़ यही चाहते हैं कि वे बिना डर के अपनी ज़िंदगी गुज़ार सकें।


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