पाक हमला: आतंकियों ने इस तरह खेला खूनी खेल
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मुख्य शहर पेशावर से 40 किलोमीटर दूर उत्तर में है चारसद्दा स्थित बाचा खान विश्वविद्यालय। यहां सब कुछ सामान्य दिनों की तरह चल रहा था। यहीं सुबह साढ़े दस बजे खान अब्दुल गफ्फार खां की याद में मुशायरे की तैयारी थी।
पांच सुरक्षा चेक थे मगर सुरक्षा घेरा सिर्फ वीआईपी लोगों के लिए था। छात्रों के लिए कोई सुरक्षा नहीं थी। अचानक 9 बजे के आसपास परिसर में अंधाधुंध गोलियों की आवाजें गूंजने लगीं।
खबर फैल गई कि परिसर में कुछ गड़बड़ है। तभी अंदर 10 धमाकों की आवाज सुनी गई और आतंकी हमले की सनसनी फैल गई।
60-70 छात्रों के सिर में मारी गई गोली
घटनाक्रम से पता चलता है कि आतंकी विश्वविद्यालय के छात्रावास में पहले से ही छुपे हुए थे और परिसर की दीवार से चढ़े थे। मुशायरे के लिए बाहर से कई मेहमान भी यहां आए हुए थे। करीब 600 मेहमान अंदर ही फंस गए, जबकि अध्यापक और हजारों छात्र पहले से ही अंदर मौजूद थे।
सुरक्षा बलों ने छात्रों, अध्यापकों और कर्मचारियों के साथ-साथ मेहमानों को भी सुरक्षित बाहर निकालने का अभियान चलाया। सबसे पहले इस हमले में प्रोफेसर हामिद हुसैन की मौत की खबर मिली।
चारसद्दा के एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि जब हमला शुरू हुआ तो वहां अफरा-तफरी मच गई। एक चश्मदीद छात्र के मुताबिक वे तकरीबन एक घंटे तक बाथरूम में छुपे रहे।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि आतंकियों ने 60 से 70 छात्रों के सिर में गोली मारी थी। देर शाम तक यूनिवर्सिटी से शवों को बाहर निकाला जाता रहा।
‘मैं यूरोप जा रहा था। लेकिन जैसे ही खबर मिली, मैं दुबई से पाकिस्तान वापस आ रहा हूं। चंद लोग आ जाते हैं और खुद को मारना चाहते हैं। हर स्कूल और विश्वविद्यालय को अपनी सुरक्षा करनी चाहिए। हमने गन के लिए लाइसेंस देने की बात भी कही है।’
परवेज खटक, मुख्य मंत्री
‘यह प्रांत हमेशा से निशाने पर रहा है। पाकिस्तान में बढ़ रहे आतंक का हम सबसे ज्यादा भुक्तभोगी है। यह अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद है। पाकिस्तानी सेना ने आतंकवादियों के खिलाफ अभियान छेड़ा है। इसी छटपटाहट में वे ऐसे हमले कर रहे हैं।’
-खैबर पख्तूनख्वा के प्रांतीय विधानसभा के सदस्य अरशद अली