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पाकिस्तान में आंख की किरकिरी बनते जा रहे हैं अहमदी मुसलमान
एजेंसी, इस्लामाबाद
Updated Tue, 17 Oct 2017 02:01 AM IST
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अहमदी मुसलमान
- फोटो : FILE PHOTO
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पाकिस्तान में अयोग्य करार दिए गए प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के दामाद कैप्टन (रिटायर्ड) मुहम्मद सफदर ने अहमदी मुसलमानों को पाक सेना में भर्ती नकरने का सुझाव देकर एक नई बहस को जन्म दे दिया है।
पाकिस्तान में इन दिनों सबसे ज्वलंत मुद्दा अहमदी मुसलमानों के देश में अस्तित्व को लेकर खड़ा बन गया है। सच्चाई यही है कि अहमदी लोग पाकिस्तान की किरकिरी बनते जा रहे हैं, जो अच्छे संकेत नहीं हैं।
पाकिस्तान के प्रसिद्ध द नेशन अखबार ने लिखा है कि चूंकि अहमदी विचारधारा पाक और उसके संविधान के लिए बनती जा रही है, इसलिए इस समुदाय के खिलाफ लोगों में गुस्सा है। मुहम्मद सफदर ने भी इन्हीं कारणों से अहमदी समुदाय की आलोचना की है।
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पाक संसद में उन्होंने अहमदी समुदाय पर पाकिस्तान के खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाया और उन पर सख्त कार्रवाई की मांग की। सफदर ने कहा कि वह नेशनल असेंबली में एक प्रस्ताव लाकर सैन्य सेवाओं में अहमदियों की भर्ती पर प्रतिबंध लगाना चाहते हैं। सफदर ने कहा कि इस मजहब में जिसमें अल्लाह के लिए जिहाद का कोई जिक्र तक नहीं है।
ये भी पढे़ंः 'मलाला युसूफजई' की वायरल फोटो पर छिड़ी बहस, पोर्न स्टार मियां खलीफा से हुई तुलना
पाकिस्तान के उदारपंथियों के मुताबिक सफदर अपने खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोपों से बचने के लिए अहमदियों को ढाल बना रहे हैं। जबकि आलोचक मानते हैं कि सफदर पाकिस्तानी सेना के भीतर मौजूद दक्षिणपंथी ताकतों की खुश करने की कोशिश कर रहे हैं।
कुछ का कहना है कि हाफिज सईद की पार्टी मिल्ली मुस्लिम लीग के बढ़ते समर्थन से नवाज शरीफ की पार्टी घबरा गई है, इसलिए अहमदियों को निशाना बनाया जा रहा है। द नेशन के मुताबिक कारण चाहे कुछ भी हो, लेकिन सफदर की टिप्पणी शरीफ और उनकी पार्टी की छुपी हुई विचारधारा को सामने लाती है।
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पाकिस्तान में इन दिनों सबसे ज्वलंत मुद्दा अहमदी मुसलमानों के देश में अस्तित्व को लेकर खड़ा बन गया है। सच्चाई यही है कि अहमदी लोग पाकिस्तान की किरकिरी बनते जा रहे हैं, जो अच्छे संकेत नहीं हैं।
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पाकिस्तान के प्रसिद्ध द नेशन अखबार ने लिखा है कि चूंकि अहमदी विचारधारा पाक और उसके संविधान के लिए बनती जा रही है, इसलिए इस समुदाय के खिलाफ लोगों में गुस्सा है। मुहम्मद सफदर ने भी इन्हीं कारणों से अहमदी समुदाय की आलोचना की है।
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पाक संसद में उन्होंने अहमदी समुदाय पर पाकिस्तान के खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाया और उन पर सख्त कार्रवाई की मांग की। सफदर ने कहा कि वह नेशनल असेंबली में एक प्रस्ताव लाकर सैन्य सेवाओं में अहमदियों की भर्ती पर प्रतिबंध लगाना चाहते हैं। सफदर ने कहा कि इस मजहब में जिसमें अल्लाह के लिए जिहाद का कोई जिक्र तक नहीं है।
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पाकिस्तान के उदारपंथियों के मुताबिक सफदर अपने खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोपों से बचने के लिए अहमदियों को ढाल बना रहे हैं। जबकि आलोचक मानते हैं कि सफदर पाकिस्तानी सेना के भीतर मौजूद दक्षिणपंथी ताकतों की खुश करने की कोशिश कर रहे हैं।
कुछ का कहना है कि हाफिज सईद की पार्टी मिल्ली मुस्लिम लीग के बढ़ते समर्थन से नवाज शरीफ की पार्टी घबरा गई है, इसलिए अहमदियों को निशाना बनाया जा रहा है। द नेशन के मुताबिक कारण चाहे कुछ भी हो, लेकिन सफदर की टिप्पणी शरीफ और उनकी पार्टी की छुपी हुई विचारधारा को सामने लाती है।
पाक में अहमदियों को अपनाना होगा
अहमदी मुसलमान
- फोटो : FILE PHOTO
पाकिस्तान की मशहूर मानवाधिकार कार्यकर्ता आसमां जहांगीर ने कहा कि पूरी दुनिया में कोई भी अल्पसंख्यक समाज के खिलाफ इस तरह नहीं बोलता। यदि अहमदियों के लिए आवाज नहीं उठाई गई तो इस तरह के लोग बहुसंख्यक हो जाएंगे। जहांगीर के मुताबिक नवाज शरीफ को अपने दामाद के बयान पर गौर करना चाहिए। इसी तरह पाक आंतरिक मामलों के मंत्री और नवाज शरीफ के करीबी अहसन इकबाल को भी कहना पड़ा कि नेशनल असेंबली में अल्पसंख्यकों के खिलाफ घृणा भरा भाषण दुखद है। हम एक संयुक्त पाकिस्तान पर भरोसा करते हैं।
अहमदियों को मुसलमान नहीं मानता पाक
अहमदी समुदाय का मानना है कि इस्लाम के आखिरी पैंगबर मोहम्मद साहब के बाद मसीहा गुलाम अहमद आए। अहमदी खुद को मुसलमान कहते हैं, लेकिन पाकिस्तान उन्हें मुसलमान नहीं मानता।
1974 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो ने अहमदियों को गैर मुस्लिम तक करार दे दिया था। हाल के दशकों में देश भर में अहमदियों और उनकी संपत्तियों पर हमले बढ़े हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ता बशीर नवीद के मुताबिक पाकिस्तान में अब सरकारी तंत्र की मदद से अहमदियों को निशाना बनाया जा रहा है।
अहमदियों को मुसलमान नहीं मानता पाक
अहमदी समुदाय का मानना है कि इस्लाम के आखिरी पैंगबर मोहम्मद साहब के बाद मसीहा गुलाम अहमद आए। अहमदी खुद को मुसलमान कहते हैं, लेकिन पाकिस्तान उन्हें मुसलमान नहीं मानता।
1974 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो ने अहमदियों को गैर मुस्लिम तक करार दे दिया था। हाल के दशकों में देश भर में अहमदियों और उनकी संपत्तियों पर हमले बढ़े हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ता बशीर नवीद के मुताबिक पाकिस्तान में अब सरकारी तंत्र की मदद से अहमदियों को निशाना बनाया जा रहा है।