पाक अखबार ने शरीफ सरकार पर उठाए सवाल, सईद और अजहर पर कार्रवाई क्यों नहीं?
दुनिया में अलग-थलग पड़ने के बाद अब पाकिस्तान के अंदर से ही आतंकियों और उनके आकाओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठने लगी है। पाकिस्तान के प्रमुख अखबार ‘द नेशन’ ने बुधवार को पाक सरकार और सेना पर सवाल दागा है कि आखिरकार जैश-ए-मोहम्मद सरगना मसूद अजहर और जमात-उद-दावा सरगना हाफिज सईद के खिलाफ कार्रवाई करने से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा क्यों हैं?
डॉन के वरिष्ठ पत्रकार सिरिल अल्मीडा पर मुल्क छोड़ने पर प्रतिबंध लगाने के बाद ‘द नेशन’ की ओर से इस बाबत सख्त सवाल पूछा गया है। खास बात यह है कि यह अखबार पाक सरकार और सेना का बेहद करीबी माना जाता है। द नेशन ने संपादकीय में सख्त लहजे में पूछा कि आखिर एक पत्रकार के साथ अपराधी जैसा बर्ताव करने की सरकार की हिम्मत कैसे हुई? वे पाक के राष्ट्रीय हित को तय करने वाले कौन होते हैं?
सीरिल ने हक्कानी नेटवर्क, तालिबान और लश्कर-ए-ताइबा को पनाह देने को लेकर पाक सरकार और सेना के बीच टकराव को उजागर किया था। इसमें उन्होंने भारत की ओर से की गई सर्जिकल स्ट्राइक और पाकिस्तान के अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग पड़ने का जिक्र किया था। अखबार ने लिखा, ‘पाक सरकार और सेना का शीर्ष नेतृत्व अजहर और सईद के खिलाफ कार्रवाई करने की बजाय मीडिया में बयानबाजी कर रहा है। पाक सरकार और सेना के लोग मीडिया को बता रहे हैं कि उसको किस तरह अपना काम करना चाहिए।’
अखबार ने कहा, ‘हम अल्मीडा के साथ मजबूती से खड़े हैं, ताकि उनकी कलम को ताकत मिले।’ मालूम हो कि पठानकोट आतंकी हमले का मास्टरमाइंड अजहर और 2008 मुंबई हमले का मास्टरमाइंड हाफिज सईद पाक में खुलेआम घूम रहे हैं। पाक सेना इन आतंकियों को मदद भी दे रही है। वहीं, सीरिल की विदेश यात्रा पर प्रतिबंध लगाने को लेकर दुनिया भर में पाक की आलोचना हो रही है। पाक पत्रकारों के अलावा वहां के बुद्धिजीवी भी नवाज शरीफ सरकार की आलोचना कर रहे हैं। इसके अलावा कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट और कराची प्रेस क्लब ने अल्मीडा पर लगे प्रतिबंध को तत्काल हटाने की मांग की है।
मूल रूप से गोवा के रहने वाले हैं पाक पत्रकार अल्मीडा
दिसंबर 2015 में तीसरी बार गोवा आए सीरिल एक सवाल के जवाब में कहा था, ‘मुझे पाकिस्तानी पत्रकारिता में अच्छा भविष्य नहीं दिखता है।’ इस बयान के बाद एक साल का भी वक्त नहीं गुजरा और पाक के सबसे लोकप्रिय अखबार डॉन के पत्रकार अल्मीडा की बात सच साबित हुई।
पाक सरकार और सेना के बीच टकराव की पोल खोलने पर उन पर मुल्क छोड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया गया। सिरिल ने अपनी खबर में भारत की ओर से की गई सर्जिकल स्ट्राइक और पाकिस्तान के अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग पड़ने का जिक्र किया था। सिरिल के बाप-दादा गोवा के रहने वाले थे। वह गोवा के अल्पसंख्यक कैथोलिक हैं, जो कराची में रह रहे हैं।
मेरे खिलाफ नवाज सरकार कर सकती है द्वेषपूर्ण कार्रवाई: सिरिल
पाकिस्तानी अखबार डॉन के सहायक संपादक सिरिल ने बुधवार को कहा कि नवाज सरकार उनके खिलाफ द्वेषपूर्ण कार्रवाई कर सकती है। उसने इसकी योजना बना ली है। सिरिल के मुताबिक उनको इस बात की जानकारी दी गई है कि नवाज सरकार उनके खिलाफ द्वेषपूर्ण कार्रवाई करेगी।
पाकिस्तान छोड़ने पर प्रतिबंध लगाने के 24 घंटे बाद सिरिल ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है। सूत्रों ने बताया कि सिरिल की खबर से पाक सेना बेहद परेशान है। लिहाजा नवाज शरीफ सरकार को सेना के दबाव में आकर डॉन में प्रकाशित सरकार और सेना के बीच टकराव की खबर को खारिज करना पड़ा है।
पाकिस्तान ने पत्रकारों पर कार्रवाई
1. साल 1992 में एक व्यंग्यात्मक कविता के प्रकाशन के बाद द न्यूज अखबार पर मुकदमा दर्ज किया गया। कविता में प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की हंसी उड़ाई गई थी। पत्रकारों और मानवाधिकार संस्थाओं के विरोध के बाद संपादक मलीहा लोधी पर दर्ज शांति भंग का मुकदमा वापिस लिया गया।
2. मई 1999 में नवाज शरीफ के शासन में संपादक नजम सेठी को गिरफ्तार करके शांति भंग कानून लगाया गया था। एक महीने बाद पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें रिहा किया।
3. सन 2014 में जियो न्यूज ने अपने पत्रकार हामिद मीर पर जानलेवा हमले का दोषी आईएसआई प्रमुख को ठहराया तो हामिद मीर के भाई आमिर मीर और जियो न्यूज पर मुकदमा कर दिया गया था। इसके बाद जियो का लाइसेंस 15 दिन के लिए रद्द कर दिया और चैनल पर एक करोड़ का जुर्माना भी लगाया था।
4. वर्ष 2001 में ब्रिटिश पत्रकार क्रिस्टीना लैंब को पाकिस्तान से निकाल दिया गया था, लैंब के अनुसार, उनके पास पाकिस्तानी सेना के कुछ अधिकारियों के तालिबान कमांडरों के साथ मिलकर काम करने की जानकारियां थीं।
5. वर्ष 2003 में दो फ्रांसीसी पत्रकारों मार्क, जॉन और उनकी मदद करने वाले खावर महदी रिजवी को कराची में गिरफ्तार कर लिया गया था। अधिकारियों का कहना था कि दोनों फ्रेंच पत्रकार बिना अनुमति के बलूचिस्तान गए थे।
6. 2014 में पाकिस्तान सरकार ने भारतीय अखबार द हिंदू की संवाददाता मीना मेमन और प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया के प्रतिनिधि सनीश फिलिप्स को बिना कोई वजह बताए पाकिस्तान से बाहर कर दिया था।