26/11 हमला: पाकिस्तान की कोर्ट ने भारत के सबूतों को नकारा
26/11 आतंकी हमले को लेकर भारत की तरफ से पाकिस्तान को सौंपे गए सुबूत को पाकिस्तान की इस्लामाबाद कोर्ट ने खारिज कर दिया है। भारत ने मुंबई पर हुए आतंकी हमले को लेकर पाकिस्तान को आतंकवादियों के बीच हुई बातचीत की आवाज के नमूने सौंपे थे।
भारत ने जकीउर रहमान लखनी और छह अन्य आतंकवादियों के खिलाफ मुंबई पर हुए आतंकी हमले की साजिश रचने का आरोप लगाया था। आतंकवादियों के बीच हुई इस बातचीत को भारतीय खुफिया एजेंसियों ने रिकॉर्ड किया था। पर इस्लामाबाद की हाईकोर्ट ने भारतीय सुबूतों को मानने से इंकार कर दिया है।
कोर्ट ने कहा कि आवाज के आधार पर किसी को दोषी ठहराने का प्रावधान कानून में नहीं है। भारत की तरफ से आतंकी जकीउर रहमान लखवी की आवाज के नमूने सौंपे गए थे। भारत की तरफ से वकीलों ने अपना तर्क रखते हुए कहा कि वर्ष 2008 में हुए आतंकी हमले में खुफिया एजेंसियों ने जकीउर रहमान लखवी और आतंकियों के बीच हो रही बातचीत को रिकॉर्ड किया है।
लश्कर-ए-तोएबा के सात सदस्यों को गिरफ्तार किया
इस बातचीत में साफ पता चल रहा था कि लखवी आतंकियों को फोन पर निर्देष दे रहा था। वकीलों ने कहा कि इस बड़े मामले में आवाज के नमूनों को सुबूत के तौर पर माना जाना चाहिए। यह एक अहम सुबूत हैं।
पाकिस्तान सरकार ने भारत पर हुए आतंकी हमले को लेकर लश्कर-ए-तोएबा के सात सदस्यों को गिरफ्तार किया था। पाकिस्तान सरकार की तरफ से पकड़े गए लोगों में इस हमले का मास्टर माइंड जकीउर रहमान लखवी भी शामिल था।
इस मामले में अब्दुल वाजिद, मजहर इकबाल, हमाद अमीन, अमीन सादिक, शाहिद जमील रियाज, जमील अहमद और युनूस अंजुम को मुंबई हमलों की साजिश रचने और इनकी हमले को अंजाम देने के मामले में छह साल की सजा दी गई है। सभी आतंकी पाकिस्तान की अदीला जेल में बंद हैं। इस आतंकी हमले में 166 लोगों की जान चली गई थी। जकीउर रहमान लखवी को दिसंबर, 2014 और 10 अप्रैल, 2015 को दो बार जमानत मिल चुकी है।