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इमरान खान के 100 दिनों में पांच वादों का क्या हुआ

Mon, 19 Nov 2018 08:12 PM IST
बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Updated Mon, 19 Nov 2018 08:12 PM IST
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100 days of prime ministership of imran khan and his promises to pakistan
Pakistan PM Imran Khan - फोटो : File Photo
कप्तान इमरान खान को प्रधानमंत्री पद की शपथ लिए आज 101 दिन हो गए। शपथ लेने से पहले उन्होंने पहले सौ दिनों में नए पाकिस्तान के लिए पांच चीजों का वादा किया था।
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सरकार के काम करने का अंदाज बदल देंगे, सो बदल दिया। पहले नौकरशाह खुद से भी कुछ काम कर लेते थे लेकिन इस वक्त उन्हें नहीं मालूम कि कब कौन हुक्म देगा और किसका आदेश उन्हें पहले बजा लाना है।
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इसलिए सरकार हर दूसरे-तीसरे दिन यह कहने को मजबूर है कि नौकरशाह आदेश का पालन नहीं कर रहे। दूसरा वादा था कि फ़ेडरेशन को मजबूत करेंगे। इसका क्या मतलब है 100 दिन बाद भी पल्ले नहीं पड़ सका। तीसरा वादा था कि अर्थव्यवस्था का पहिया तेज करेंगे।
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फिलहाल तो सऊदी अरब, चीन, यूएई और आईएमएफ से लगभग 18 बिलियन डॉलर जमा किए जा रहे हैं ताकि 95 बिलियन डॉलर के विदेशी कर्जों का सूद चुकाया जा सके। बाकी पैसे बाहर से काला धन देश में लाने का सपना साकार करके पूरे किए जाएंगे। पिछले वर्ष पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था 5.5 प्रतिशत बढ़ी थी। इस बार आंकड़ा 4.5 प्रतिशत बढ़ोतरी का है।

चौथा वादा था कि पहले 100 दिन में पानी बचाव योजना शुरू होगी। इस बार गेहूं के लिए पिछले साल के मुकाबले में आधा पानी मिलने की भविष्यवाणी है। बारिशें हो गईं तो बचत हो जाएगी।

पांचवा वादा था कि सामाजिक सेवा के तरीके मे इंकलाबी तब्दीली लाई जाएगी। इसका क्या मतलब है ये हमें समझ में नहीं आया। वैसे खान साहब ने गरीबों के लिए 50 लाख घरों के नक्शे बनाने का काम तो शुरू कर दिया है जिससे एक करोड़ नौकरियां देने का वादा भी पूरा हो जाएगा, ऐसा बताते हैं।

छठा वादा था कि राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत किया जाएगा। कितना मजबूत किया जाएगा ये हम नहीं जानते।

'रौनक मेला लगा हुआ है'

इन 100 दिनों में संसद सिवाय बजट की मंजूरी के कोई नया कानून नहीं बना सकी मगर हंगामा रोज होता है।

मंत्री विपक्ष को चोरों और डाकुओं का टोला कहते हैं और विपक्ष ये जवाबी वार करती है कि खान साहब और उनके मंत्रिमंडल को अब तक पता नहीं चला कि वो विपक्ष में नहीं शासन में हैं और और शासन में भाषण से ज्यादा काम करने की जरूरत होती है।


पर कुछ भी कहें रौनक मेला लगा हुआ है। हर कोई अपना काम भूलकर दूसरे का काम उतराने के चक्कर में है। अगले 100 दिन भी क्या यही रिएलिटी शो चलेगा कोई नहीं जानता। एक महान कवि जॉन एलिया के बकौल: बेदिली क्या यूं ही दिन गुजर जाएंगे, सिर्फ़ जिंदा रहे हम तो मर जाएंगे।
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