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पाक सुप्रीम कोर्ट ने लौटाई मुशर्रफ की अपील, पहले आत्मसमर्पण करें

Sun, 19 Jan 2020 01:59 AM IST
आसिम खान वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: आसिम खान Updated Sun, 19 Jan 2020 01:59 AM IST
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Pakistan Supreme Court returns General Pervez Musharraf petition
जनरल परवेज मुशर्रफ (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई

पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व राष्ट्रपति और तानाशाह जनरल परवेज मुशर्रफ की उस याचिका को लौटा दिया है जिसमें उन्होंने विशेष अदालत द्वारा देशद्रोह के आरोप में दी गई सजा-ए-मौत को चुनौती दी थी। शीर्ष अदालत के रजिस्ट्रार कार्यालय यह कहते हुए अपील वापस कर दी कि यह कानून का सिद्धांत है कि दोषी को अपील दायर करने से पहले आत्मसमर्पण करना चाहिए।

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74 वर्षीय सेवानिवृत्त जनरल फिलहाल दुबई में हैं और विशेष ट्रिब्यूनल के फैसले को चुनौती देने के लिए वह अदालत तक पहुंचे हैं। डॉन न्यूज के मुताबिक, मुशर्रफ के वकील बैरिस्टर सलमान सफदर ने सुप्रीम कोर्ट में 90 पन्नों की याचिका पेश कर पूर्व राष्ट्रपति के खिलाफ विशेष अदालत द्वारा राजद्रोह के मामले में दिए मृत्युदंड के फैसले को निरर्थक और शून्य घोषित करने का अनुरोध किया। लेकिन शीर्ष अदालत के रजिस्ट्रार कार्यालय ने मुशर्रफ को पहले आत्मसमर्पण करने के लिए कहा। 
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मुशर्रफ के वकील अब जल्द ही याचिका लौटाने के रजिस्ट्रार कार्यालय के फैसले के खिलाफ अपील कर सकते हैं। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अदालत ने आपत्ति को हटाने के लिए एक महीने का समय दिया। इसका अर्थ है कि मुशर्रफ को एक माह में आत्मसमर्पण करना चाहिए अन्यथा वह अपील का अधिकार खो देंगे।
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बयान दर्ज नहीं किया
पाक सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित विशेष अदालत ने 17 दिसंबर के अपने फैसले में मुशर्रफ को दोषी पाया और हाई-प्रोफाइल राजद्रोह मामले में मौत की सजा सुनाई। यह फैसला तीन सदस्यीय पीठ ने किया। मुशर्रफ ने कहा कि उनका बयान दर्ज किए बिना ही उन्हें दंडित किया गया है। मुशर्रफ ने विशेष अदालत को अपनी बीमारी का हवाला दिया जिसे स्वीकार किया गया लेकिन उन्हें अनुपस्थिति में दोषी ठहरा दिया गया।


याचिका का आधार
बैरिस्टर सलमान सफदर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका में कहा कि विशेष अदालत में मामले की सुनवाई संविधान का उल्लंघन करते हुए हुई, इसलिए यह फैसला रद्द किया जाना चाहिए। अपील में सुनवाई के दौरान अनुपस्थित रहने की स्थिति में सुप्रीम कोर्ट से मामले की बहस को सुनने का अधिकार मांगा गया है, इसके अलावा न्याय और निष्पक्षता के हित में फैसले पर रोक लगाने की मांग की गई।

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