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पाकिस्तान: सांसदों ने उठाई गिलगित बाल्टिस्तान को प्रांतीय दर्जा देने की मांग, संसद में पेश किया विधेयक
Tue, 01 Mar 2022 05:57 PM IST
गौरव पाण्डेय
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Tue, 01 Mar 2022 05:57 PM IST
सार
गिलगित बाल्टिस्तान पर अवैध रूप से कब्जा करके बैठे पाकिस्तान के कुछ सांसदों ने इस क्षेत्र को प्रांतीय दर्जा देने के लिए संविधान में संशोधन करने की मांग की है।
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पाकिस्तान का ध्वज
- फोटो : पिक्साबे
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विस्तार
पाकिस्तान के सांसदों के एक समूह ने संसद के उच्च सदन में एक विधेयक पेश किया है। इसमें गिलगित बाल्टिस्तान को प्रांतीय दर्जा देने की मांग की गई है। बता दें कि भारत लगातार इस क्षेत्र को अपना अभिन्न अंग बताता रहा है।
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बलूचिस्ताान अवामी पार्टी (बीएपी) के सांसद कौडा बाबर, अहमद खान, नसीबुल्लाह बजई और प्रिंस उमर ने सोमवार को एक नए अंतरिम प्रांत के गठन के लिए संविधान के अनुच्छेद एक में संशोधन के लिए प्रस्ताव पेश किया था।
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गिलगित बाल्टिस्तान का प्रशासन पाकिस्तान की संघीय सरकार संभालती है जिसे भारत अवैध बताता है। भारत ने पाकिस्तान को साफ शब्दों में कहा है गिलगित बाल्टिस्तान समेत पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हमारे अभिन्न अंग हैं।
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भारत का कहना है कि पाकिस्तान की सरकार या इसकी न्यायपालिका को इन क्षेत्रों में दखल देने का अधिकार नहीं है जिन पर अवैध और जबरन कब्जा किया गया है।
'समान नागरिकता के अधिकार की मांग कर रहे गिलगित बाल्टिस्तान के लोग'
बीएपी के इस विधेयक में कहा गया है कि गिलगित बाल्टिस्तान के लोग लंबे समय से समान नागरिकता के अधिकार की मांग कर रहे हैं। इसे मामले पर गिलगित बाल्टिस्तान विधानसभा एकमत से एक प्रस्ताव भी पारित कर चुकी है।
संविधान संशोधन विधेयक में गिलगित बाल्टिस्तान के लिए राष्ट्रीय असेंबली में तीन और सीनेट में चार सीटों का प्रावधान करने की मांग की गई है। सीनेट की चार में से एक-एक सीट टेक्नोक्रेट और महिलाओं के लिए रखने को कहा गया है।