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Shahbaz Sharif Funny Statement: पीएम शहबाज ने खुद को बताया मजनू, कोर्ट से कहा- पंजाब का मुख्यमंत्री रहने के दौरान सैलरी नहीं ली
Sat, 28 May 2022 10:45 PM IST
अभिषेक दीक्षित
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Sat, 28 May 2022 10:45 PM IST
सार
एफआईए ने अपनी जांच में शहबाज परिवार के कथित 28 बेनामी खातों का पता लगाया है जिनके जरिए 2008 से 2018 तक 14 अरब रुपये का धनशोधन किया गया।
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शहबाज शरीफ
- फोटो : facebook/ShehbazSharif
विस्तार
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अपने खिलाफ दर्ज 16 अरब पाकिस्तानी रुपये के धनशोधन मामले में शनिवार को एक विशेष अदालत में बयान दिया। उन्होंने कहा कि पंजाब का मुख्यमंत्री रहने के दौरान उन्होंने वेतन तक नहीं लिया और उन्होंने ऐसा मजनू होने के कारण किया। शहबाज और उनके बेटों- हमजा तथा सुलेमान के खिलाफ संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) ने नवंबर 2020 में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और धनशोधन रोकथाम अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।
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हमजा फिलहाल पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री हैं, जबकि सुलेमान फरार है और ब्रिटेन में रह रहा है। एफआईए ने अपनी जांच में शहबाज परिवार के कथित 28 बेनामी खातों का पता लगाया है जिनके जरिए 2008 से 2018 तक 14 अरब रुपये का धनशोधन किया गया। शहबाज ने सुनवाई के दौरान कहा कि मैंने 12.5 साल में सरकार से कुछ नहीं लिया और इस मामले में मुझ पर 25 लाख रुपये के धनशोधन का आरोप है।
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डॉन अखबार ने उनके हवाले से कहा कि अल्लाह ने मुझे इस देश का प्रधानमंत्री बनाया है। मैं एक मजनू यानी नासमझ हूं और मैंने अपना कानूनी अधिकार, अपना वेतन तथा लाभ नहीं लिया था। शहबाज पहली बार 1997 में पंजाब के मुख्यमंत्री बने थे। उस वक्त उनके भाई नवाज शरीफ देश के प्रधानमंत्री थे।
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वर्ष 1999 में जनरल परवेज मुशर्रफ द्वारा नवाज शरीफ सरकार को अपदस्थ किए जाने के बाद शहबाज ने परिवार के साथ 2007 में पाकिस्तान लौटने से पहले सऊदी अरब में आठ साल निर्वासन में बिताए थे। वह 2008 में दूसरी बार पंजाब के मुख्यमंत्री बने और 2013 में तीसरी बार सत्ता में आए।
शहबाज ने अदालत से कहा कि मेरे परिवार को मेरे फैसले के कारण दो अरब रुपये का नुकसान हुआ। मैं आपको हकीकत बता रहा हूं। जब मेरे बेटे का इथेनॉल उत्पादन संयंत्र स्थापित किया जा रहा था, तब भी मैंने इथेनॉल पर शुल्क लगाने का फैसला किया। उस फैसले के कारण मेरे परिवार को सालाना 80 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।