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पाकिस्तान : सत्ता बचाने की बड़ी परीक्षा में पास हुई इमरान सरकार, पक्ष में पड़े 178 वोट

Sat, 06 Mar 2021 01:52 PM IST
Jeet Kumar एजेंसी, इस्लामाबाद।
एजेंसी, इस्लामाबाद। Published by: Jeet Kumar Updated Sat, 06 Mar 2021 01:52 PM IST
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pakistan pm imran khan will face confidence vote today
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान (फाइल फोटो) - फोटो : Twitter

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने शनिवार को संसद में सत्ता बचाने की बड़ी परीक्षा में कामयाबी हासिल कर ली है। लगभग एक घंटे तक चले विश्वास मत की प्रक्रिया में इमरान खान के समर्थन में वोट 178 वोट पड़े। जबकि प्रधानमंत्री इमरान खान को अपनी कुर्सी बचाने के लिए नेशनल असेंबली में 172 वोटों की जरूरत थी। नेशनल असेंबली के स्पीकर ने घोषणा कर बताया कि इमरान खान की कुर्सी सुरक्षित है।

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पाकिस्तान की संसद में शनिवार को इमरान खान सरकार के पक्ष में विश्वास मत का सामना करने पहुंचे। सीनेट चुनाव में मिली हार से किरकिरी होने के बाद उन्होंने विश्वास मत का एलान कर दिया था। हालांकि, विपक्षी पार्टियों ने इसका बहिष्कार किया। संसद के अंदर जब इमरान वोटिंग के लिए तैयार हो रहे थे, तब बाहर विपक्षी दलों की प्रेस ब्रीफिंग चल रही थी, जिसे इमरान की तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के समर्थकों ने निशाना बना डाला। इमरान समर्थकों ने संसद के बाहर इकट्ठक हुए विपक्षी नेताओं के खिलाफ नारेबाजी की। इतना ही नहीं पूर्व प्रधानमंत्री शाहिद खकान अब्बासी और पीएमएल-एन के दूसरे नेताओं के साथ बदसलूकी भी की।
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इमरान स्वेच्छा से विश्वास मत का सामना करने वाले दूसरे पीएम 
इमरान खान पाकिस्तान के इतिहास में दूसरे ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जो नेशनल एसेंबली में अपनी इच्छा से विश्वास मत का सामना किया। इससे पहले नवाज शरीफ ने सन् 1993 में स्वेच्छा से विश्वास मत का सामना किया था। इससे पहले संविधान के आठवें संशोधन के तहत, 1985 से 2008 तक, पाकिस्तान के सभी प्रधानमंत्रियों ने नेशनल असेंबली में विश्वास मत का सामना किया है। इनमें स्वर्गीय बेनजीर भुट्टो, नवाज शरीफ, मीर जफरुल्लाह जमाली, चौधरी शुजात, शौकत अजीज और यूसुफ रजा गिलानी शामिल है। नजवा के बाद इमरान खान अपनी मर्जी से विश्वास मत का सामना करने वाले दूसरे प्रधानमंत्री हैं। 

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क्या था मामला

सीनेट के चुनाव में सत्तारूढ़ पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के प्रत्याशी अब्दुल हफीज शेख को पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट के उम्मीदवार और पूर्व प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने करारी शिकस्त दी। यह इमरान सरकार के लिए बड़ा झटका साबित हुआ। इमरान खान ने खुद शेख के लिए प्रचार किया था। गिलानी की जीत से उत्साहित विपक्षी दलों ने इमरान का इस्तीफा मांगना शुरू कर दिया है। यही कारण है कि इमरान खान ने नेशनल असेंबली में विश्वास मत हासिल करने की घोषणा कर दी।

व्हिप जारी कर दी चेतावनी
इमरान खान ने अविश्वास मत का सामना करने से पहले व्हिप जारी किया। व्हिप जारी करने से पहले भावुक इमरान ने कहा था कि वोटिंग में जो फैसला निकलकर आएगा, वह उसका सम्मान करेंगे और इमरान का साथ नहीं देने वाले जीते तो वह विपक्ष में बैठेंगे। अब पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में तहरीक-ए-इंसाफ के सभी सदस्यों को लिखे खत में इमरान ने लिखा, ''आपको प्रधानमंत्री पर अविश्वास प्रस्ताव पर होने जा रही वोटिंग में पार्टी के निर्देशों के मुताबिक वोट डालने हैं। अगर कोई नेता वोटिंग में शामिल नहीं हुआ या पार्टी के निर्देश के मुताबिक मतदान नहीं किया गया, तो पार्टी प्रमुख किसी भी सदस्य को देशद्रोही करार दे सकता है और इसकी सूचना चुनाव आयोग को दे दी जाएगी।'

मैंने पाक को धीरे-धीरे नीचे आते देखा : इमरान

पाकिस्तान की पीएम इमरान खान ने अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों पर हमला करते हुए पाक की तुलना भारत से की। उन्होंने कहा, आज से 50-55 साल पहले दुनिया में पाक की मिसाल दी जाती थी क्योंकि उसका रुतबा था। तब अमेरिका जाने पर हमारे राष्ट्रपति से मिलने अमेरिकी राष्ट्रपति आया करते थे, लेकिन आहिस्ता-आहिस्ता मैंने अपने मुल्क को नीचे आते देखा है। देश के नीचे आने का बड़ा कारण 1985 के बाद देश में शुरू हुआ भ्रष्टाचार रहा। राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों पर हमला बोलते हुए राष्ट्र को संबोधित एक लाइव प्रसारण में पाक पीएम ने कहा कि पहले जब मैं क्रिकेट खेलकर भारत से पाकिस्तान आता था तो लगता था जैसे किसी गरीब देश से अमीर मुल्क में आ गया हूं लेकिन अब ऐसा नहीं है।

इमरान ने सहानुभूति बटोरने की पुरजोर कोशिश की 
राजनीतिक विश्लेषकों को मुताबिक, विपक्ष उन पर इस्तीफे का दबाव बना रहा है, ऐसे में खान ने इस संबोधन में लोगों की सहानुभूति बटोरने की कोशिश की है। इमरान ने कहा, 1985 के बाद हमने देखा कि लोग फैक्ट्रियां लगाने और व्यापार करने के लिए राजनीति में आना शुरू हुए। ये लोग पीएम बन रहे थे और उनके मंत्री भी पैसा बना रहे थे, और तभी से हमारा मुल्क नीचे जाना शुरू हुआ।

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