फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Pakistan Chief Justice Isa Zulfikar Bhutto hanging case opportunity to restore reputation for judiciary Army

Zulfikar Bhutto Hanging: चीफ जस्टिस ईसा बोले- पाकिस्तानी सेना और सुप्रीम कोर्ट के पास गलती सुधारने का अवसर

Wed, 21 Feb 2024 04:04 AM IST
यशोधन शर्मा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: यशोधन शर्मा Updated Wed, 21 Feb 2024 04:04 AM IST
सार

कई लोगों का मानना है कि यह तत्कालीन सैन्य तानाशाह जनरल जियाउल हक के दबाव में किया गया था, जिन्होंने 1977 में भुट्टो की सरकार को गिरा दिया था। भुट्टो के समर्थकों ने बाद में उनकी फांसी को न्यायिक हत्या करार दिया था। उन्होंने शीर्ष अदालत से भुट्टो के साथ हुए अन्यायपूर्ण व्यवहार को वापस लेने की मांग की थी।

विज्ञापन
Pakistan Chief Justice Isa Zulfikar Bhutto hanging case opportunity to restore reputation for judiciary Army
Justice Qazi Faez Isa - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश काजी फैज ईसा ने मंगलवार को कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फीकार अली भुट्टो की विवादास्पद फांसी का मामला सुप्रीम कोर्ट और देश की सेना के लिए अपनी पिछली गलतियों को सुधारने का एक अवसर हो सकता है।

विज्ञापन


मुख्य न्यायाधीश ईसा की यह टिप्पणी उनकी अध्यक्षता वाली शीर्ष अदालत की नौ सदस्यीय बड़ी पीठ की ओर से मामले की सुनवाई के दौरान की गई। यह मामला 2011 में तत्कालीन राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को अपने ससुर भुट्टो को हत्या के मामले में उकसाने के लिए दोषी ठहराए जाने और 1979 में उनकी फांसी की सजा पर फिर से विचार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में भेजे गए एक विशेष मामले पर आधारित है।
विज्ञापन


गौरतलब है, कि 51 वर्षीय भुट्टो को सात सदस्यीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद फांसी दी गई थी। कई लोगों का मानना है कि यह तत्कालीन सैन्य तानाशाह जनरल जियाउल हक के दबाव में किया गया था, जिन्होंने 1977 में भुट्टो की सरकार को गिरा दिया था। भुट्टो के समर्थकों ने बाद में उनकी फांसी को न्यायिक हत्या करार दिया था। उन्होंने शीर्ष अदालत से भुट्टो के साथ हुए अन्यायपूर्ण व्यवहार को वापस लेने की मांग की थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


बता दें कि दो अप्रैल, 2011 को, जरदारी ने संविधान के अनुच्छेद 186 के तहत राष्ट्रपति संदर्भ के माध्यम से पीपीपी पार्टी के संस्थापक के मुकदमे की फिर से समीक्षा करने पर उसकी राय लेने के लिए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed