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पाकिस्तान से उठी मांग, पीएम मोदी यूएन में सिंध-बलूचिस्तान में अत्याचारों का उठाएं मामला
Tue, 17 Sep 2019 12:03 PM IST
Trainee Trainee
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
Published by: Trainee Trainee
Updated Tue, 17 Sep 2019 12:03 PM IST
सार
- पाक कार्यकर्ताओं ने पीएम मोदी से बलूचिस्तान में हो रहे अत्याचारों को यूएन में उठाने की मांग की है
- सिंधी फाउंडेशन के प्रमुख ने कहा मोदी को सिंध के अत्याचारों के बारे में दुनिया को बताना चाहिए
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विस्तार
पाकिस्तान के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सिंध, बलूचिस्तान और गिलगित-बाल्टिस्तान में होने वाले मानवाधिकार उल्लंघन का मामला संयुक्त राष्ट्र में उठाया जाया। पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) के कार्यकर्ताओं ने भी नरेंद्र मोदी से इसी तरह की मांग रखी है।
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एक कार्यक्रम के दौरान अमेरिका में सिंधी फाउंडेशन के निदेशक सूफी लगहरी ने कहा कि सिंध में परेशानी यह है कि वहां लोगों में डर है और सबसे कठिन चुनौती उस डर को दूर करना है। इसे सिंध के अंदर से दूर नहीं किया जा सकता है, इसलिए एकमात्र आशा बाहर के मुल्कों से है।
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उन्होंने आगे कहा कि मैं सुझाव दूंगा कि जब पीएम मोदी संयुक्त राष्ट्र में आएंगे, तो उन्हें सिंध के बारे में बात करनी चाहिए क्योंकि भारत को इसका नाम सिंध से मिला था और सिंधियों के बहुत से लोग भारत में रह रहे हैं। लगहरी ने कहा कि कम से कम वह मानव अधिकारों के बारे में बात कर सकते हैं, वह सिंध में धार्मिक स्वतंत्रता के बारे में बात कर सकते हैं।
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इस कार्यक्रम में पीओके, बलूचिस्तान और अफगानिस्तान के कार्यकर्ताओं ने भी भाग लिया। बलूचिस्तान के मानवाधिकार आयोग के प्रमुख ताज बलूच ने कहा कि बलूचिस्तान में स्थितियां लगातार खराब हो रहा है, क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय हमारे ऊपर किए जा रहे अत्याचारों पर चुप्पी साधे हुए हैं।
उन्होंने कहा कि पहले प्रांत में सिर्फ किडनैपिंग होती थी। फिर मारो और गायब करो की शुरुआत हुई और अब गांवों को जलाने का काम किया जा रहा है। इसे नरसंहार कहते हैं। आयोग के प्रमुख ने आगे कहा कि यूएन और मानवाधिकार संस्थानों को बलूचिस्तान में आ कर यहां किए जा रहे अत्याचारों की जांच करनी चाहिए। उन्हें पाक सेना द्वारा किए जा रहे अत्याचारों को रोकना होगा।
वही, इस कार्यक्रम में अफगानिस्तान से पत्रकार बिलाल सरवरी भी भाग लेने पहुंचे। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में पाक की भूमिका एक विनाशकारी देश की हैं। 2001 में तालिबान को सरकार से हटाने के बाद हमारे पास नया सफर शुरू करने का मौका था।
लेकिन पाकिस्तान ने अपनी छवि सड़क किनारे बम लागने वाले और आत्मघाती हमलों को अंजाम देने वाले राष्ट्र के रूप में बनाई। सरवरी ने बताया कि अफगानिस्तान में जिहाद के नाम पर सभाएं होती हैं और फंड इकट्ठे किए जाते हैं।