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ऑक्सफोर्ड पर छात्रों ने लगाया भेदभाव का आरोप, बदली 100 साल पुरानी परंपरा
Mon, 14 Jan 2019 10:26 AM IST
Shilpa Thakur
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: Shilpa Thakur
Updated Mon, 14 Jan 2019 10:26 AM IST
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ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में बीते 100 साल से चली आ रही एक परंपरा को अब खत्म कर दिया गया है। ये परंपरा है फेलोशिप की। जो केवल महिलाओं को ही दी जा रही थी। छात्रों ने लिंगभेद का आरोप लगाया था कि फाइन आर्ट्स के क्षेत्र में उन्हें स्कॉलरशिप नहीं दी जा रही है।
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इन क्षेत्रों में महिलाओं को मिल रही थी स्कॉलरशिप
विश्वविद्यालय में महिलाओं को फाइन आर्ट्स, म्यूजिक और साहित्य में बीते 100 सालों से स्कॉलरशिप मिल रही थी। ये स्कॉलरशिप छात्रों को नहीं मिल रही थी। छात्रों के आरोप के बाद उनकी मांग को मान लिया गया है। यानी अब वो भी स्कॉलरशिप पाने के हकदार होंगे।
इस एक्ट का हो रहा था उल्लंघन
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है छात्रों को स्कॉलरशिप न देने से रोजगार समानता एक्ट का उल्लंघन हो रहा था। स्कॉलरशिप की शर्तों को 10 जनवरी से लागू किया गया है। इस जुनियर फेलोशिप की घोषणा ब्रिटिश पुरातत्वविद और ऑक्सफोर्ड ग्रेजुएट डेविड रांडेल मैकाइवर ने पत्नी जोआना रांडेल की याद में की गई थी। जिसमें फाइन आर्ट्स, म्यूजिक और साहित्य के पाठ्यक्रमों में स्कॉलरशिप दी जा रही थी।
प्रोफेसर ने उठाए सवाल
जहां विश्वविद्यालय के प्रवक्ता ने इस नए फैसले का स्वागत किया है। वहीं यहां की प्रोफेसर एलिजाबेथ कुलिंगफोर्ड ने इसपर सवाल खड़े किए हैं। खुद भी फेलोशिप से पढ़ाई करने वाली एलिजाबेथ का कहना है कि एक या दो फैसले से संस्था को खतरा तो नहीं है और समानता भी मिलनी चाहिए लेकिन ये कोई महान फैसला नहीं है। उन्होंने कहा कि समाज हमेशा से ही पुरुष प्रधान रहा है। महिलाएं आसानी से कॉलेज तक नहीं आ पाती हैं, उनके लिए बहुत कुछ किया जाना बाकी है।
समानता को बढ़ावा देने की हर कोशिश हो रही है
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में समानता को बढ़ावा देने के लिए कई कोशिशें की जा रही हैं। जैसे महिला शिक्षकों की भर्ती और उनके कल्याण के लिए नए कार्यक्रमों की शुरुआत। इसके अलावा यहां ही और शी की बजाय झी का संबोधन की पहल भी की गई है। ऐसा लड़के और लड़कियों के बीच भेदभाव को खत्म करने के लिए किया गया।