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Pakistan: दुनिया के 88 देशों की जेल में कैद हैं पाकिस्तानी, भारत के करीबी इन दो मुल्कों में सबसे ज्यादा, जानें

Thu, 05 Sep 2024 08:55 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: पवन पांडेय Updated Thu, 05 Sep 2024 08:55 PM IST
सार

पाकिस्तान की हालत जितनी दयनीय है, उससे ज्यादा खराब स्थिति पाकिस्तानियों की दुनिया के अन्य देशों में हैं। ये हम नहीं खुद पाकिस्तानी की शहबाज शरीफ सरकार का कहना है। दरअसल सरकार के मुताबिक दुनिया के 88 देशों में कुल 20 हजार से ज्यादा पाकिस्तानी जेल की सजा काट रहे हैं।

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Over 20,000 Pakistanis imprisoned in 88 countries, says govt
इन देशों में करीब 20 हजार पाकिस्तानी काट रहे सजा - फोटो : ANI

विस्तार

भुखमरी और तंगी की स्थिति से जूझ रहे पाकिस्तान की हालत जग जाहिर है, लेकिन दुनिया के अन्य देशों में पाकिस्तानियों की स्थिति इससे भी ज्यादा बदतर है। पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार की तरफ से जारी किए गए एक आंकड़े के अनुसार दुनिया के 88 देशों में 20 हजार के करीब पाकिस्तानी जेल की सजा काट रहे हैं। ये सभी कई अपराधों के तहत जेल में कैद हैं। 
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सऊदी अरब और यूएई में सबसे ज्यादा पाकिस्तानी कैद
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में कम से कम 20,000 पाकिस्तानी 88 देशों में कैद हैं, जिनमें से अधिकतर सऊदी अरब और यूएई में हैं। एक अखबार ने गुरुवार को सरकारी रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि कैद किए गए लोगों में से 68 पाकिस्तानी नागरिक आतंकवाद, हत्या और मादक पदार्थों की तस्करी जैसे अपराधों के लिए मौत की सजा का सामना कर रहे हैं।
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मलयेशिया, ब्रिटेन, ओमान में भी बंद हैं सैकड़ों पाकिस्तानी
संयुक्त अरब अमीरात में 5 हजार 292 और सऊदी अरब में 10 हजार 432 पाकिस्तानी तमाम अपराधों के लिए बंद हैं, जो कुल कैदियों का 74 प्रतिशत है। इसके अलावा, रिपोर्ट में कहा गया है कि 463 पाकिस्तानी मलयेशियाई जेलों में, 321 ब्रिटेन में और 578 ओमान में बंद हैं।
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पाकिस्तानी दूतावास से नहीं मिलती बेहतर सहायता
वहीं बाकी के अन्य तुर्की, बहरीन, ग्रीस, चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका और जर्मनी की जेलों में भी बंद हैं। इस रिपोर्ट में कहा गया है, एक बार जेल जाने के बाद, इन व्यक्तियों को स्थानीय कानूनी प्रणालियों की दया पर छोड़ दिया जाता है, अक्सर उन्हें उचित कानूनी प्रतिनिधित्व, निष्पक्ष अनुवादक या पाकिस्तानी दूतावासों से पर्याप्त सहायता नहीं मिल पाती है।


 
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