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कोरोना : अस्पताल से निकलने के बाद भी तीन में से एक मरीज लंबी अवधि की समस्या से पीड़ित
Tue, 23 Mar 2021 08:15 AM IST
Tanuja Yadav
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: Tanuja Yadav
Updated Tue, 23 Mar 2021 08:15 AM IST
सार
- अस्पताल से निकलने के बाद दूसरी समस्याओं से जूझ रहे हैं कोरोना मरीज
- तीन में से एक कोरोना का मरीज लंबी अवधि की समस्याओं से पीड़ित
- मरीज के शरीर के अंगों पर कोरोना वायरस का पड़ रहा असर
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कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : iStock
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विस्तार
दुनिया में कोरोना को पैर पसारे एक साल से भी ज्यादा का समय हो गया है और वैज्ञानिक इस खतरनाक बीमारी के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर की समीक्षा कर रहे हैं। एक समीक्षा रिपोर्ट के मुताबिक, अस्पताल में भर्ती होने वाले तीन में से एक मरीज लंबी अवधि की स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित है, जिसमें अंग संबंधी समस्याएं भी शामिल हैं।
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इसके अलावा इस बीमारी का मरीजों की मानसिक स्थिति पर भी गहरा असर पड़ा है। नेचर मेडिसिन जर्नल में छपी रिपोर्ट में कोरोना वायरस के लक्षणों की समीक्षा की गई, जिसमें सबसे ज्यादा सामान्य लक्षण थकान, सांस की तकलीफ, चिंता और अवसाद को बताया गया है।
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इस शोध के मुख्य लेखर कार्तिक सहगल का कहना है कि दुनिया में कोरोना से संक्रमित लाखों मरीजों को देखते हुए, स्वास्थ्य के भौतिक, संज्ञानात्मक और मानसिक पहलुओं पर दीर्घकालिक प्रभाव अभी भी देखा जा सकता है। ये खतरनाक बीमारी शरीर के कई अंगों को खराब कर सकती है। ऐसा कई मामलों में देखा गया है।
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सहगल और उनके साथियों ने यूरोप, अमेरिका और चीन के कई मामलों की समीक्षा की और जाना कि अस्पताल से डिस्चार्ज होने के महीनों बाद मरीजों में उनके शरीर के अंगों से संबंधित समस्याएं देखने को मिली हैं। इटली के 143 मरीजों की समीक्षा रिपोर्ट में पाया गया कि कम से कम 90 फीसदी लोगों में अस्पताल से निकलने के 60 दिन बाद सुस्त लक्षण देखे गए।
53.1 फीसदी लोगों में थकान, 43.4 फीसदी लोगों में सांस की तकलीफ, 27.3 फीसदी लोगों में जोड़ों का दर्द, 21.7 फीसदी लोगों में सीने में दर्द जैसे लक्षण दिखाई दिए। आधे से ज्यादा मरीजों में अस्पताल छोड़ने के महीनों बाद कई लक्षण देखे गए।
फ्रांस, चीन और ब्रिटेन की तीन शोध बताते हैं कि करीब 25-30 फीसदी लोगों में कोरोना से ठीक होने के हफ्तों बाद नींद संबंधी समस्याएं देखी गई और 20 फीसदी लोगों में बाल झड़ने की समस्या देखी गई। शोधकर्ता कार्तिक सहगल का कहना है कि ये भूलना नहीं चाहिए कि कोरोना का मानसिक स्थिति पर गहरा असर पड़ता है।