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संक्रमण खत्म होने के बाद सक्रिय इम्यूनिटी बच्चों के लिए घातक
Thu, 11 Jun 2020 12:16 PM IST
Amit Mandal
अमर उजाला रिसर्च टीम
अमर उजाला रिसर्च टीम
Published by: Amit Mandal
Updated Thu, 11 Jun 2020 12:16 PM IST
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- फोटो : Pixabay
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कोरोना से बच्चों की स्थिति गंभीर होने का कारण इन उनकी इम्यूनिटी का अत्यधिक सक्रिय होना है। वायरस के खत्म होने के बाद वैज्ञानिकों ने शुरुआती दिनों में इसके कावासाकी सिंड्रोम से जोड़ा। बच्चों को बुखार, लाल चकत्ते और रक्त वाहिकाओं में सूजन के चलते स्थिति बिगड़ रही थी तो चेतावनी जारी की गई थी।
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अब माउंट सिनाईइकान स्कूल ऑफ मेडिसिन के वैज्ञानिकों ने खुलासा किया है कि साइटोकिनिन स्टार्म के अत्यधिक सक्रिय होने से बच्चों की स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान पहुंचता था जिससे उनकी मौत भी हुई। डॉक्टरों ने इसे पीडियाट्रिक मल्टीसिस्टम इन्फ्लेमेटरी सिंड्रोम का नाम दिया था। अब वे यह पता करने में लग गए हैं कि कोरोना की वजह से ऐसा क्यों होता है और इसका इलाज कैसे संभव है।
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लक्षण पर रिपोर्ट नेगेटिव
वैज्ञानिकों का कहना है कि माउंटसिनाई अस्पताल की इमरजेंसी में 15, 12, 10 और पांच साल के चार बच्चों में पीएमआईएस के लक्षण थे। सभी को कुछ दिनों से बुखार की शिकायत थी। पेट में दर्द डायरिया और पाचन की तकलीफ के साथ हृदय गति में असंतुलन भी था। सभी की कोरोनावायरस तो तीन की रिपोर्ट निगेटिव आई और एक में वायरस की पुष्टि हुई लेकिन सभी के शरीर में एंटीबॉडीज बनी थी।
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सभी में संक्रमण, पर तीन में लक्षण नहीं
वैज्ञानिकों का दावा है कि जिन तीन बच्चों में वायरस की पुष्टि नहीं हुई थी उनमें भी संक्रमण था लेकिन उनमें लक्षण नहीं थे। यही कारण था कि वह गंभीर रूप से बीमार हुए और आईसीयू में भर्ती होना पड़ा। वैज्ञानिकों का कहना है कि वायरस फेफड़ों रक्त वाहिकाओं और दूसरी कोशिकाओं पर रहता है लेकिन इन अंगों पर एस-2 रिसेप्टर पूरी तरह विकसित नहीं हो पाता। इस कारण बच्चों में सामान्य लक्षण दिखते हैं या लक्षण नहीं दिखते हैं।
24 वर्ष के 16 हजार युवा संक्रमित
अमेरिका में 24 वर्ष की उम्र के 16 हजार युवा संक्रमित हुए अधिकतम में संक्रमण का स्तर सामान्य था। जबकि कुछ में लक्षण नहीं थे 19 बच्चों जो 14 वर्ष से कम उम्र के थे। उनके संक्रमण के कारण मौत भी हुई है। जबकि 15 से 24 वर्ष की उम्र के 93 युवकों की जान कोरोना वायरस से गई है। अमेरिका में 100 से अधिक बच्चों में कावासाकी सिंड्रोम और कोरोना के लक्षण मिले थे यूरोप और ब्रिटेन में भी ऐसे मामले सामने आए थे।
फेफड़ों को चलाने के लिए दी ऑक्सीजन
अमेरिकन जर्नल ऑफ इनफेक्सियस डिजीज में प्रकाशित शोध में डॉक्टर ने बताया कि बच्चे स्वस्थ लेकिन अचानक वे आईसीयू में चले गए और फेफड़ों को चलाने के लिए ऑक्सीजन और रक्त में प्रोटीन की मात्रा संतुलित रखने के लिए कुछ दवाई देनी पड़ी। इन बच्चों को पीएमआईएस और टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम था। इसके कारण उन्हें तकलीफ हुई। ऐसे में बच्चों को वायरस के कारण दूसरी तरह की तकलीफ होने का खतरा अधिक है। इसलिए सतर्क रहना होगा।