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Hindi News ›   World ›   Now China wants to become Power House of Science, more than 16000 scientists return to China

अब विज्ञान में 'पावर हाउस' बनना चीन की चाहत, अमेरिका छोड़ घर लौटे 16 हजार वैज्ञानिक 

Thu, 02 Jan 2020 04:01 PM IST
अमित कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ओहियो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ओहियो Published by: अमित कुमार Updated Thu, 02 Jan 2020 04:01 PM IST
सार

  • ओहियो विश्वविद्यालय के शोध में खुलासा 
  • 16,000 से ज्यादा चीनी वैज्ञानिक स्वदेश लौटे
  • 2017 में यह संख्या महज 4500 थी 

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Now China wants to become Power House of Science, more than 16000 scientists return to China
फाइल फोटो

विस्तार

दुनिया की महाशक्ति बनने की दौड़ में शुमार चीन की निगाहें अब विज्ञान के क्षेत्र में अपना वर्चस्व कायम करने पर है। इसी वजह से विदेशों में रहने वाले हजारों वैज्ञानिक व शोधकर्ता घर वापस लौटने लगे हैं। 

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हाल ही में अमेरिका के ओहियो विश्वविद्यालय के एक शोध में यह खुलासा हुआ है। शोध के मुताबिक 16 हजार से ज्यादा विदेशी प्रशिक्षित चीनी वैज्ञानिक अपने देश लौट चुके हैं। यह संख्या इसलिए भी चौंकाने वाली है क्योंकि 2017 में महज 4500 वैज्ञानिक ही चीन वापस लौटे थे। 
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दरअसल चीन ने अपने वैज्ञानिकों को भरोसा दिलाया है कि वह विज्ञान के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहभागिता करेगा। साथ ही उन्हें वह सभी सुविधाएं दी जाएंगी, जो उन्हें विदेशों में मिलती हैं। हालांकि अमेरिका जाने वाले वैज्ञानिकों व इंजीनियरों में सबसे ज्यादा संख्या भारतीयों की है। एक अनुमान के मुताबिक अमेरिका में करीब 30 लाख एशियाई वैज्ञानिक व इंजीनियर हैं, जिनमें से साढ़े नौ लाख भारतीय हैं। 

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अमेरिका में बढ़ी चिंता : 

चीनी वैज्ञानिकों के इतनी बड़ी संख्या में घर वापस लौटने को लेकर अमेरिकी विशेषज्ञों में चिंता बढ़ गई है। उन्हें आशंका है कि अगर इन्हें नहीं रोका गया तो इससे अमेरिकी वैज्ञानिक प्रणाली पर गंभीर असर पड़ेगा। 

एआई के क्षेत्र में चीन का जवाब नहीं 

विज्ञान के कई क्षेत्रों में चीन काफी आगे है। खासतौर से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानि एआई और मैटेरियल साइंस में। चीन ने शोध का बजट 10 गुना तक बढ़ा दिया है। हालांकि अभी भी यह अमेरिका से कम है। चीन के बजट में बढ़ोतरी वैज्ञानिकों की वापसी का एक बड़ा कारण माना जा रहा है। चीन ने शोध पर 2019 में 3 लाख 75 हजार करोड़ रुपये खर्च किए। हालांकि अमेरिकी बजट 11 लाख 13 हजार 280 करोड़ रुपये था। 

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