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बचपन में शर्मीला था किम जोंग उन, नाम बदलकर की थी विदेश में पढ़ाई
amarujal.com, Presented By: आसिफ़ इक़बाल
Updated Mon, 28 Aug 2017 05:31 PM IST
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किम जोंग उन
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उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन की तानाशाही के बारे में सब जानते हैं, लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि किम ने नाम बदलकर अपनी पढ़ाई स्विटजरलैंड से की थी। वजह थी कि कहीं किम की हत्या न कर दी जाए। वैसे तो किम की शुरुआती जिंदगी के बारे में कोई नहीं जानता, यहां तक की उसकी जन्मतिथि पर भी रहस्य कायम है।
उत्तर कोरिया के रिकॉर्ड में उसकी उम्र 8 जनवरी 1982 दर्ज है, जबकि साउथ कोरिया के रिकॉर्ड 1983 में उसका जन्म बताते हैं। वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक किम ने स्विटजरलैंड की राजधानी बर्न में इंग्लिश लैंग्वेज इंटरनैशनल स्कूल में दाखिला लिया था और उसकी अमेरिकी राजदूतों के बच्चों से गहरी दोस्ती थी।
उसने फ्रैंच और जर्मन भाषा भी सीखी और एक झूठे नाम 'पैक चोल' से स्कूल में अपनी पहचान बनाई। स्कूल और छात्रों को लगता था कि किम कोरियाई दूतावास के एक ड्राइवर का बेटा है। उसके दोस्तों ने एल हेब्दो पत्रिका को बताया कि किम जोंग काफी शर्मिला था और वैन डैम व जीन क्लॉड की फिल्मों का शौकीन था।
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उत्तर कोरिया के रिकॉर्ड में उसकी उम्र 8 जनवरी 1982 दर्ज है, जबकि साउथ कोरिया के रिकॉर्ड 1983 में उसका जन्म बताते हैं। वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक किम ने स्विटजरलैंड की राजधानी बर्न में इंग्लिश लैंग्वेज इंटरनैशनल स्कूल में दाखिला लिया था और उसकी अमेरिकी राजदूतों के बच्चों से गहरी दोस्ती थी।
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उसने फ्रैंच और जर्मन भाषा भी सीखी और एक झूठे नाम 'पैक चोल' से स्कूल में अपनी पहचान बनाई। स्कूल और छात्रों को लगता था कि किम कोरियाई दूतावास के एक ड्राइवर का बेटा है। उसके दोस्तों ने एल हेब्दो पत्रिका को बताया कि किम जोंग काफी शर्मिला था और वैन डैम व जीन क्लॉड की फिल्मों का शौकीन था।
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नाम बदलकर शिक्षा ग्रहण करने के पीछे भी एक कारण
किम जोंग उन की ग्रुप फोटो
इसके बाद किम ने एक दूसरे स्कूल लीबेफील्ड स्टीनहोज्ली में फिर नाम बदलकर दाखिला लिया और यहां उसका नाम पैक उन था। जब स्कूल के टीचर से किम के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि उन्होंने कभी भी किम के माता-पिता को नहीं देखा था।
किम हमेशा बहाना बनाता था कि उसके माता-पिता को जर्मन नहीं आती, इसलिए वो स्कूल नहीं आ सकते। 2001 में किम स्विटजरलैंड से उत्तर कोरिया वापस लौट गया। दरअसल नाम बदलकर शिक्षा ग्रहण करने के पीछे भी एक कारण था।
1998-1999 के दौरान उत्तर कोरिया के तत्कालीन तानाशाह किम जोंग इल भी सभी काम गुप्त रूप से करते थे, क्योंकि उनके कारनामों से कई दुश्मन पैदा हो गए थे। उन्हें सूचना मिली कि उनके बच्चों का अपहरण करके हत्या की जा सकती है, इसलिए उन्होंने किम जोंग उन समेत अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए देश से बाहर भेज दिया।
2012 में फ्रांस की लियोन यूनीवर्सिटी ने एक खास तरह के सॉफ्टवेयर से यह पहचान की कि 1999 में एक ग्रुप के साथ खड़े बच्चों में किम जोंग उन ही है।
किम हमेशा बहाना बनाता था कि उसके माता-पिता को जर्मन नहीं आती, इसलिए वो स्कूल नहीं आ सकते। 2001 में किम स्विटजरलैंड से उत्तर कोरिया वापस लौट गया। दरअसल नाम बदलकर शिक्षा ग्रहण करने के पीछे भी एक कारण था।
1998-1999 के दौरान उत्तर कोरिया के तत्कालीन तानाशाह किम जोंग इल भी सभी काम गुप्त रूप से करते थे, क्योंकि उनके कारनामों से कई दुश्मन पैदा हो गए थे। उन्हें सूचना मिली कि उनके बच्चों का अपहरण करके हत्या की जा सकती है, इसलिए उन्होंने किम जोंग उन समेत अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए देश से बाहर भेज दिया।
2012 में फ्रांस की लियोन यूनीवर्सिटी ने एक खास तरह के सॉफ्टवेयर से यह पहचान की कि 1999 में एक ग्रुप के साथ खड़े बच्चों में किम जोंग उन ही है।